Parliament Monsoon Session 2026: मॉनसून सत्र के अंतिम दिन भी जारी रहा भारी हंगामा, संसद परिसर में आमने-सामने आए विपक्ष और NDA सांसद

Parliament Monsoon Session Last Day: संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी दिन भी सियासी संग्राम नहीं थमा। मकर द्वार पर NDA और विपक्षी सांसदों ने जमकर नारेबाजी की।

Aug 13, 2026 - 11:32
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Parliament Monsoon Session 2026: मॉनसून सत्र के अंतिम दिन भी जारी रहा भारी हंगामा, संसद परिसर में आमने-सामने आए विपक्ष और NDA सांसद
  • Monsoon Session Last Day Protest: मॉनसून सत्र के आखिरी दिन संसद परिसर में सियासी घमासान, विपक्ष और सत्ता पक्ष का जोरदार प्रदर्शन
  • संसद के मॉनसून सत्र के अंतिम दिन मकर द्वार पर भिड़े सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसद, जमकर हुई नारेबाजी
  • Monsoon Session Final Day: संसद के मॉनसून सत्र के अंतिम दिन परिसर में भारी हंगामा, एनडीए और इंडिया ब्लॉक का मकर द्वार पर प्रदर्शन

संसद के मॉनसून सत्र 2026 के अंतिम दिन 13 अगस्त को भी सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों के बीच चला आ रहा तीखा राजनीतिक टकराव खत्म नहीं हुआ। राजधानी नई दिल्ली स्थित संसद परिसर के ऐतिहासिक मकर द्वार के निकट राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन के सांसद एक बार फिर आमने-सामने आ गए और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ जोरदार नारेबाजी व प्रदर्शन किया। विपक्ष जहां छात्र आंदोलनों पर कथित पुलिस कार्रवाई, परीक्षा में अनियमितताओं और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरता दिखा, वहीं एनडीए सांसदों ने विपक्षी दल और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर संसद में सार्थक बहस से भागने का आरोप लगाया। दोनों सदनों में जारी गतिरोध के बीच मॉनसून सत्र का समापन हंगामेदार रहा, जिससे कई विधायी कामकाज भी प्रभावित हुए हैं। 

संसद के मॉनसून सत्र के समापन दिवस पर संसद परिसर में एक दुर्लभ नजारा देखने को मिला, जहां आमतौर पर विरोध प्रदर्शन करने वाले विपक्ष के साथ-साथ सत्ताधारी एनडीए गठबंधन के सांसदों ने भी संसद परिसर में मोर्चा खोल दिया। संसद परिसर के मकर द्वार के बाहर दोनों पक्षों के प्रतिनिधि हाथों में तख्तियां, बैनर और तख्तियां लेकर एकत्र हुए। एक तरफ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और तृणमूल कांग्रेस समेत विभिन्न विपक्षी दलों के सांसद खड़े थे। दूसरी तरफ भाजपा और उसके सहयोगी दलों के सांसदों का बड़ा समूह जमा होकर जवाबी नारेबाजी कर रहा था। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए संसद परिसर के सुरक्षाकर्मियों ने दोनों गुटों के बीच सुरक्षा घेरा (मानव श्रृंखला) बनाकर किसी भी अप्रिय स्थिति को टाला। 

मॉनसून सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष विभिन्न मुद्दों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए था। नीट परीक्षा से जुड़े विवाद, परीक्षाओं में धांधली और हाल ही में दिल्ली व झारखंड में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई के मुद्दों पर विपक्ष गृह मंत्री के बयान और सीधी चर्चा की मांग पर अड़ा रहा। विपक्षी नेताओं का आरोप था कि सरकार युवाओं और छात्रों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है। वहीं, बीते दो दिनों में सत्ता पक्ष ने भी पलटवार की रणनीति अपनाई।

एनडीए सांसदों ने संसद लाइब्रेरी से बालयोगी ऑडिटोरियम होते हुए मकर द्वार तक मार्च निकाला। सत्ता पक्ष के सांसदों का कहना था कि जब सरकार संसद के पटल पर गृह मंत्री के नेतृत्व में छात्र आंदोलनों और संबंधित विषयों पर विस्तृत चर्चा कराने के लिए तैयार थी, तब भी नेता प्रतिपक्ष और विपक्षी सांसद सदन चलने देने के बजाय हंगामा करते रहे। संसद के भीतर भी सुबह कार्यवाही शुरू होते ही दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में भारी शोर-शराबा देखने को मिला। विपक्षी सांसदों के वेल में आकर नारेबाजी करने और मकर द्वार पर दोनों पक्षों के भारी जमावड़े के चलते विधायी कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। 

प्रदर्शन के दौरान दोनों पक्षों के वरिष्ठ नेताओं ने मीडिया के समक्ष अपनी बात रखी। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सत्ता पक्ष के प्रदर्शन पर तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय संसदीय इतिहास में पहली बार देखा है कि सरकार में बैठे सांसद ही संसद के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के दबाव के कारण ही सत्ता पक्ष को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है। वहीं समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार जनहित के मुद्दों पर बहस करने के बजाय विपक्षी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है।

दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा सांसदों ने विपक्ष के रवैये की कड़ी निंदा की। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री और अन्य वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य केवल संसद के समय और जनता के टैक्स के पैसे को बर्बाद करना रहा है। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर और संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और विपक्षी दल चर्चा से भागते हैं और सिर्फ राजनीतिक लाभ उठाने के लिए छात्रों के कंधों पर बंदूक रखकर राजनीति कर रहे हैं। सत्ता पक्ष का कहना था कि गृह मंत्री जवाब देने के लिए तैयार थे, लेकिन विपक्ष ने बहाने बनाकर सदन का बहिष्कार किया। 

मॉनसून सत्र के अंतिम दिन हुए इस अभूतपूर्व प्रदर्शन और लगातार बने गतिरोध का सीधा असर संसदीय कामकाज पर पड़ा है। सत्र के दौरान सरकार द्वारा प्रस्तावित कई महत्वपूर्ण विधेयक व्यापक चर्चा के बिना ही पारित कराने पड़े या फिर हंगामे के बीच लटके रह गए। संसदीय मर्यादाओं और परंपराओं के लिहाज से भी मकर द्वार पर पक्ष और विपक्ष का इस तरह आमने-सामने आकर प्रदर्शन करना चिंता का विषय माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस गतिरोध ने साफ कर दिया है कि आगामी विधानसभा चुनावों और भावी राजनीतिक लड़ाइयों के मद्देनजर केंद्र सरकार और विपक्षी गठबंधन के बीच का राजनीतिक मनमुटाव अब और अधिक तीखा होने जा रहा है। इसका सीधा असर संसद के आगामी सत्रों के कामकाज पर भी देखने को मिल सकता है। 

मॉनसून सत्र के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद अब यह राजनीतिक लड़ाई संसद परिसर से निकलकर जनमंच और सडकों तक पहुंचने के पूरे आसार हैं। विपक्षी दल जहां छात्र संगठनों और युवाओं के मुद्दों को लेकर राज्य स्तर पर रैलियों व अभियानों के जरिए सरकार को घेरने की योजना बना रहे हैं, वहीं एनडीए के घटक दल जनता के बीच जाकर यह संदेश देने का प्रयास करेंगे कि विपक्ष संसद में विकास और जनहित के कार्यों में रोड़ा अटका रहा है। आगामी महीनों में विभिन्न राज्यों में होने वाले चुनाव इस राजनीतिक जंग के नए मैदान बनेंगे।

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