Lok Sabha Adjourned Sine Die: वंदे मातरम् गायन के साथ लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, पीएम मोदी और शाह रहे मौजूद
Lok Sabha Adjourned Sine Die: संसद के मॉनसून सत्र 2026 के अंतिम दिन लोकसभा की कार्यवाही राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के गायन के साथ अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।

- Parliament Monsoon Session 2026: मॉनसून सत्र के अंतिम दिन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुई लोकसभा, हंगामे के बीच राष्ट्रीय गीत का हुआ गायन
- वंदे मातरम् गायन के साथ अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुई लोकसभा, पीएम मोदी और अमित शाह की मौजूदगी में समापन
- Lok Sabha Adjourned Sine Die: लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, संसद का मॉनसून सत्र 2026 संपन्न
संसद के मॉनसून सत्र 2026 के अंतिम दिन 13 अगस्त को लोकसभा की कार्यवाही राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के आधिकारिक गायन के साथ अनिश्चितकाल के लिए स्थगित (Sine Die) कर दी गई। संसद भवन के निचले सदन में इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत सत्ता पक्ष व विपक्ष के कई वरिष्ठ सदस्य मौजूद रहे। जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, राष्ट्रगीत की धुन बजाई गई और उसके तुरंत बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की। 20 जुलाई 2026 से शुरू हुआ यह मॉनसून सत्र विपक्ष के लगातार जारी हंगामे, नारेबाजी और गतिरोध के बीच संपन्न हो गया।
13 अगस्त 2026 को संसद के मॉनसून सत्र का अंतिम दिन था। नियमानुसार सत्र के समापन अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की बैठक बुलाई। बैठक शुरू होते ही राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के सभी छंदों का गायन हुआ, जिसके सम्मान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विपक्ष के नेता व सांसद अपने स्थानों पर खड़े रहे।
गीत समाप्त होते ही अध्यक्ष ओम बिरला ने बिना किसी पारंपरिक समापन भाषण (Valedictory Address) के लोकसभा की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित (Adjourned Sine Die) करने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही लगभग तीन सप्ताह तक चले हंगामेदार मॉनसून सत्र का औपचारिक समापन हो गया। मॉनसून सत्र 2026 की शुरुआत 20 जुलाई को हुई थी। पूरे सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने विभिन्न राष्ट्रीय एवं जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख बनाए रखा। विपक्ष द्वारा छात्र आंदोलनों पर कथित पुलिस कार्रवाई, प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े दान विवाद जैसे विषयों पर गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में सीधे जवाब की मांग की जा रही थी।
सत्र के आखिरी दिन भी संसद परिसर के मकर द्वार पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के सांसदों के बीच तीखी नारेबाजी और जवाबी प्रदर्शन देखने को मिला। इसके बाद जैसे ही सदन की कार्यवाही प्रारंभ हुई, विपक्षी सांसदों ने वेल में आकर नारेबाजी जारी रखी। भारी शोर-शराबे और गतिरोध को देखते हुए अध्यक्ष ने राष्ट्रगीत के उपरांत सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का फैसला लिया। इस सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक हंगामे और बिना विस्तृत चर्चा के पारित कराए गए।
लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक-दूसरे पर संसदीय परंपराओं को बाधित करने का आरोप लगाया। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और भाजपा नेताओं ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार हर मुद्दे पर नियम के तहत चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष केवल राजनीतिक एजेंडा चलाने के लिए सदन को चलने नहीं देना चाहता था।
दूसरी ओर, विपक्षी दल के नेताओं और कांग्रेस का कहना था कि सरकार महत्वपूर्ण जनमुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। विपक्ष का आरोप था कि गृह मंत्री और प्रधानमंत्री को सदन में आकर जवाब देना चाहिए था, लेकिन सरकार ने संवाद के बजाय विधायी कामकाज को जल्दबाजी में निपटाना सही समझा। सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने से सत्र में निर्धारित कई विधायी कार्यों और सार्वजनिक महत्व के विषयों पर व्यापक बहस नहीं हो सकी। विपक्ष के लगातार शोर-शराबे के कारण लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस बार सत्र का प्रदर्शन और उत्पादकता (Productivity Report) संबंधी पारंपरिक समापन भाषण भी नहीं पढ़ सके।
हालांकी, हंगामे के बावजूद सरकार ने कई महत्वपूर्ण संशोधनों और विधेयकों को ध्वनि मत से पारित करवा लिया। लगातार गतिरोध के चलते जनता के टैक्स के पैसे और संसद के बहुमूल्य समय का नुकसान होने को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलकों में संसदीय सुधारों और गतिरोध खत्म करने की व्यवस्था पर चर्चा छिड़ गई है। लोकसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद अब दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात जनता के बीच ले जाने की तैयारी में हैं। विपक्षी दल जहां संसद परिसर के बाहर विरोध मार्च निकालकर और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सरकार पर हमलावर रहेंगे, वहीं सत्ता पक्ष के सांसद देशव्यापी रैलियों व बयानों के जरिए विपक्ष पर संसदीय कार्यवाही को बाधित करने का आरोप लगाएंगे। अब सभी की निगाहें शीतकालीन सत्र (Winter Session) पर होंगी कि क्या तब तक दोनों पक्षों के बीच संवाद का कोई रास्ता निकल पाता है या नहीं।
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