Political News: चंद्रबाबू नायडू की केंद्र से मांग: 500 और 2000 रुपये के नोट वापस लें, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दें। 

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू ने 27 मई 2025 को केंद्र सरकार से 500 रुपये और 2000 रुपये ...

May 29, 2025 - 12:12
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Political News: चंद्रबाबू नायडू की केंद्र से मांग: 500 और 2000 रुपये के नोट वापस लें, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दें। 

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू ने 27 मई 2025 को केंद्र सरकार से 500 रुपये और 2000 रुपये के उच्च मूल्यवर्ग के नोटों को पूरी तरह से वापस लेने की मांग की। यह बयान उन्होंने टीडीपी की वार्षिक महानाडु सभा के उद्घाटन सत्र में वाईएसआर कडप्पा जिले के सीके दिन्ने मंडल में दिया। नायडू ने इस मांग को काले धन पर अंकुश लगाने, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और राजनीति में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया। यह पहली बार नहीं है जब नायडू ने उच्च मूल्यवर्ग के नोटों को वापस लेने की वकालत की है; उन्होंने 2013 और 2016 में भी इसी तरह की मांग की थी। इस खबर ने न केवल आंध्र प्रदेश, बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है।

  • महानदु सभा में नायडू की मांग

27 मई 2025 को कडप्पा में आयोजित टीडीपी की तीन दिवसीय महानदु सभा में चंद्रबाबू नायडू ने अपने संबोधन में उच्च मूल्यवर्ग के नोटों को खत्म करने की मांग को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा, "मैंने सबसे पहले 500 और 1000 रुपये के नोटों को खत्म करने की मांग की थी। अब 2000 और 500 रुपये के नोट लाए गए हैं, लेकिन इन्हें भी खत्म करना चाहिए।" नायडू ने डिजिटल भुगतान की बढ़ती लोकप्रियता का हवाला देते हुए तर्क दिया कि उच्च मूल्यवर्ग के नोटों की अब कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि डिजिटल लेनदेन के इस युग में नकदी का चलन कम करने से भ्रष्टाचार और काले धन पर अंकुश लगेगा।नायडू ने यह भी उल्लेख किया कि टीडीपी हमेशा से स्वच्छ राजनीति और पारदर्शिता की पक्षधर रही है। उन्होंने दावा किया कि उच्च मूल्यवर्ग के नोटों को खत्म करने से राजनीतिक दलों के लिए डिजिटल दान को बढ़ावा मिलेगा, जिससे नकद आधारित भ्रष्टाचार कम होगा। सभा में मौजूद हजारों कार्यकर्ताओं से इस प्रस्ताव पर समर्थन मांगते हुए उन्होंने तालियों और समर्थन के जरिए अपनी बात को और मजबूत किया।

चंद्रबाबू नायडू लंबे समय से डिजिटल अर्थव्यवस्था और कम नकदी वाले लेनदेन के समर्थक रहे हैं। 2016 में जब केंद्र सरकार ने 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को बंद करने का फैसला किया था, तब नायडू ने इस कदम का स्वागत किया था, हालांकि उन्होंने 2000 रुपये के नए नोटों के प्रचलन पर सवाल उठाए थे। 2013 में भी नायडू ने 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने की मांग की थी, ताकि भ्रष्टाचार और हवाला कारोबार पर लगाम लगाई जा सके।उनका तर्क रहा है कि उच्च मूल्यवर्ग के नोट काले धन को जमा करने और अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने में सहायक होते हैं। 2017 में विशाखापट्टनम पुलिस द्वारा 1379 करोड़ रुपये के हवाला रैकेट का पर्दाफाश होने के बाद नायडू ने इस मुद्दे को और जोर-शोर से उठाया था। उन्होंने कहा था कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर ने उन्हें बताया था कि आंध्र प्रदेश में पैसा आ तो रहा है, लेकिन यह कहां जा रहा है, यह स्पष्ट नहीं है।

  • काले धन और भ्रष्टाचार पर नायडू

नायडू ने अपनी सभा में काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि उच्च मूल्यवर्ग के नोटों को खत्म करने से न केवल काला धन कम होगा, बल्कि यह राजनीतिक दलों के लिए भी फायदेमंद होगा, क्योंकि इससे डिजिटल दान को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि टीडीपी ने कभी भी काले धन को बढ़ावा नहीं दिया और हमेशा पारदर्शी राजनीति की वकालत की है।इसके अलावा, नायडू ने 2018 में यह दावा किया था कि अगर 500 और 2000 रुपये के नोट बंद हो जाएं, तो कोई भी राजनीतिक दल चुनावों में धन वितरण नहीं कर पाएगा। यह बयान उन्होंने उस समय दिया था, जब उन पर विपक्षी दलों द्वारा भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे थे। नायडू का कहना था कि डिजिटल लेनदेन और कम मूल्यवर्ग के नोट (जैसे 100 और 200 रुपये) ही पर्याप्त हैं।

कडप्पा में आयोजित यह महानदु सभा टीडीपी के लिए ऐतिहासिक थी, क्योंकि यह पहली बार था जब यह आयोजन इस जिले में हुआ। लगभग 25,000 प्रतिनिधियों ने पहले दिन इस सभा में हिस्सा लिया। नायडू ने इस अवसर पर अपनी पार्टी की उपलब्धियों को गिनाया, जिसमें एक करोड़ सदस्यों को 45 दिनों में जोड़ने का रिकॉर्ड शामिल था। उन्होंने अपनी सरकार की 'सुपर सिक्स' योजनाओं की भी चर्चा की, जिसमें 'थल्ली की वंदनम' योजना के तहत पात्र छात्रों को शिक्षा के लिए 15,000 रुपये सालाना और 'अन्नदाता' योजना के तहत किसानों को 20,000 रुपये सालाना देने का वादा शामिल है।

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नायडू की इस मांग का आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण से गहरा प्रभाव पड़ सकता है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना निश्चित रूप से पारदर्शिता को बढ़ाएगा, लेकिन 500 रुपये के नोटों को पूरी तरह से हटाने से आम जनता को असुविधा भी हो सकती है। 2016 की नोटबंदी के बाद 500 और 2000 रुपये के नए नोटों को लाने का मकसद नकदी की कमी को पूरा करना था। हालांकि, आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने जून 2023 में स्पष्ट किया था कि 500 रुपये के नोटों को वापस लेने या 1000 रुपये के नोटों को फिर से शुरू करने की कोई योजना नहीं है।सोशल मीडिया पर नायडू की इस मांग को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक साहसिक कदम बताया, जबकि कुछ ने इसे अव्यवहारिक करार दिया। एक यूजर ने लिखा, "चंद्रबाबू नायडू की यह मांग डिजिटल भारत के लिए सही दिशा में है।" वहीं, कुछ ने सवाल उठाया कि क्या यह कदम आम जनता के लिए और मुश्किलें खड़ी करेगा।

500 और 2000 रुपये के नोटों को वापस लेना एक जटिल प्रक्रिया होगी। 2000 रुपये के नोटों को मई 2023 में वापस लेने की घोषणा के बाद, 15 नवंबर 2024 तक 97% नोट बैंकिंग सिस्टम में वापस आ चुके हैं। लेकिन 500 रुपये के नोट, जो मार्च 2024 तक कुल मुद्रा का 86.5% हिस्सा हैं, को हटाना एक बड़ा कदम होगा। यह न केवल आर्थिक लेनदेन को प्रभावित करेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जहां डिजिटल भुगतान अभी भी पूरी तरह से लोकप्रिय नहीं है, वहां नकदी की कमी हो सकती है।

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