Pramod Krishnam Moradabad: 'राम मंदिर पर बोलने का हक सिर्फ हिंदुओं को', मुरादाबाद में विपक्ष पर बरसे आचार्य प्रमोद

पूर्व कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने मुरादाबाद में राम मंदिर चंदा चोरी मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने विपक्ष को सनातन विरोधी करार दिया।

Jul 12, 2026 - 07:31
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Pramod Krishnam Moradabad: 'राम मंदिर पर बोलने का हक सिर्फ हिंदुओं को', मुरादाबाद में विपक्ष पर बरसे आचार्य प्रमोद
पूर्व कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम
  • Acharya Pramod Krishnam: अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले पर बोले आचार्य प्रमोद कृष्णम, की CBI जांच की मांग
  • अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी महापाप, हो CBI जांच! मुरादाबाद में विपक्ष पर बरसे आचार्य प्रमोद कृष्णम
  • राम मंदिर चंदा चोरी प्रकरण पर आचार्य प्रमोद कृष्णम का बड़ा बयान, विपक्ष को बताया सनातन विरोधी

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में शनिवार को एक मीडिया संवाद के दौरान पूर्व कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित चंदा चोरी मामले को लेकर तीखा बयान दिया है। उन्होंने मंदिर में चढ़ावे और चंदे की चोरी को एक 'महापाप' करार देते हुए केंद्र सरकार से इस पूरे प्रकरण की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि यह मामला सिर्फ वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक आस्था और विश्वास पर गहरा आघात है। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को 'सनातन विरोधी' और 'रामविरोधी' बताते हुए कहा कि विपक्ष का मुख्य एजेंडा राम मंदिर की आड़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि को धूमिल करना है।

शनिवार को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक कार्यक्रम के सिलसिले में पहुंचे आचार्य प्रमोद कृष्णम ने प्रेस वार्ता आयोजित की। इस दौरान उन्होंने अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में हाल ही में सामने आए कथित चंदा और चढ़ावा चोरी के विवाद पर अपनी बेबाक राय रखी। पूर्व कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर हिंदुओं की आस्था का सर्वोच्च केंद्र है और वहां के पवित्र कोष में किसी भी प्रकार की हेराफेरी को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इस गंभीर आरोप की निष्पक्षता से जांच के लिए उच्चतम स्तर की एजेंसी यानी सीबीआई को जिम्मा सौंपने की वकालत की है।

मुरादाबाद में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने राम मंदिर के मुद्दे पर देश की राजनीति और विशेषकर कांग्रेस की भूमिका को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ने वाले चंदे की चोरी का मामला सामान्य आर्थिक अपराध नहीं है। यह देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित की गई श्रद्धा की चोरी है।

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने विपक्ष, विशेषकर अपनी पूर्व पार्टी कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी को भगवान श्री राम या उनके भव्य मंदिर पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि राम के विषय पर बात करने का अधिकार केवल और केवल हिंदुओं को है। उनके अनुसार, वर्तमान विपक्ष पूरी तरह से सनातन विरोधी और रामविरोधी विचारधारा से ग्रस्त है। इतिहास गवाह है कि इन दलों ने कभी भी राम मंदिर निर्माण के आंदोलन या उसके अस्तित्व का समर्थन नहीं किया। आज जब मंदिर बनकर तैयार है, तब भी इनका राम या राम मंदिर से कोई आत्मीय जुड़ाव नहीं है।

आचार्य प्रमोद कृष्णम के इस तीखे बयान के बाद राजनीतिक हलकों में सरगर्मी तेज हो गई है। विपक्षी दलों के स्थानीय नेताओं का कहना है कि आचार्य प्रमोद कृष्णम कांग्रेस से निष्कासित होने के बाद से लगातार एकतरफा और सत्तारूढ़ दल के पक्ष में बयानबाजी कर रहे हैं। विपक्ष का तर्क है कि वे मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं पर पारदर्शिता की मांग करते रहे हैं, न कि राम का विरोध। वहीं दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और सनातन समर्थकों ने आचार्य के इस बयान का स्वागत किया है और इसे बहुसंख्यक समाज की मूल भावना का प्रकटीकरण बताया है।

इस बयान का उत्तर प्रदेश की राजनीति और आगामी राजनीतिक समीकरणों पर गहरा प्रभाव देखने को मिल सकता है। आचार्य प्रमोद कृष्णम का यह रुख साफ करता है कि वे पूरी तरह से सनातन और राम मंदिर के मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। उनके द्वारा सीबीआई जांच की मांग किए जाने से मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन पर भी पारदर्शिता बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा। साथ ही, विपक्ष को 'रामविरोधी' और 'सनातन विरोधी' बताने से आने वाले चुनावों में ध्रुवीकरण की बहस को नए सिरे से हवा मिल सकती है।

आचार्य प्रमोद कृष्णम की इस मांग के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या उत्तर प्रदेश सरकार या केंद्र सरकार अयोध्या मंदिर के कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण पर कोई उच्च स्तरीय या केंद्रीय जांच एजेंसी का गठन करती है या नहीं। इसके साथ ही, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की ओर से आचार्य के इन गंभीर आरोपों पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है, इस पर भी राजनीतिक विश्लेषकों की नजर बनी रहेगी। फिलहाल, मुरादाबाद से शुरू हुई यह राजनीतिक बहस अयोध्या से लेकर दिल्ली तक गूंज रही है।

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