8वें वेतन आयोग की शुरुआत के बीच DA- बेसिक पे विलय की अटकलों पर वित्त मंत्रालय ने लगाई मुहर, कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग को औपचारिक रूप से गठित कर लिया है, जिसका कार्यान्वयन

Dec 2, 2025 - 12:46
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8वें वेतन आयोग की शुरुआत के बीच DA- बेसिक पे विलय की अटकलों पर वित्त मंत्रालय ने लगाई मुहर, कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं। 
8वें वेतन आयोग की शुरुआत के बीच DA- बेसिक पे विलय की अटकलों पर वित्त मंत्रालय ने लगाई मुहर, कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग को औपचारिक रूप से गठित कर लिया है, जिसका कार्यान्वयन केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए वेतन संरचना में बड़े बदलाव लाने वाला साबित होगा। 3 नवंबर 2025 को जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, आयोग का गठन हो चुका है, और इसकी सिफारिशें वेतन, भत्तों, पेंशन तथा अन्य लाभों की समीक्षा पर आधारित होंगी। हालांकि, डीए (महंगाई भत्ता) और डीआर (महंगाई राहत) को बेसिक पे या पेंशन के साथ विलय करने की अटकलों पर वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसा कोई प्रस्ताव वर्तमान में विचाराधीन नहीं है। यह स्पष्टीकरण लोकसभा में 1 दिसंबर 2025 को राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा दिए गए लिखित उत्तर में आया, जहां उन्होंने कहा कि महंगाई भत्ता प्रत्येक छह माह में ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI-IW) के आधार पर संशोधित किया जाता है ताकि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की वास्तविक आय को मुद्रास्फीति से सुरक्षित रखा जा सके। आयोग के गठन से लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनभोगियों को लाभ होगा, लेकिन विलय न होने से तत्काल राहत की उम्मीदें कम हुई हैं।

8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा जारी संकल्प के माध्यम से हुआ, जो जनवरी 2025 में प्रारंभिक घोषणा के नौ माह बाद आया। आयोग की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज रंजना प्रकाश देसाई करेंगी, जबकि प्रोफेसर पुलक घोष को आंशिक सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। आयोग के कार्यक्षेत्र में केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों, अखिल भारतीय सेवाओं, रक्षा कर्मियों, संघ राज्य क्षेत्रों के स्टाफ, नियामक निकायों तथा न्यायिक अधिकारियों के वेतन, भत्तों, पेंशन, बोनस तथा अन्य लाभों की समीक्षा शामिल है। इसके अलावा, आयोग निजी क्षेत्र तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में प्रचलित वेतन संरचनाओं तथा कार्य स्थितियों का अध्ययन करेगा, और राज्य सरकारों पर सिफारिशों के वित्तीय प्रभाव का मूल्यांकन करेगा। सभी मंत्रालयों तथा विभागों को आयोग को आवश्यक जानकारी तथा सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया गया है, जबकि राज्य सरकारों तथा सेवा संघों से पूर्ण सहयोग की अपेक्षा की गई है। आयोग की सिफारिशें 18 माह के भीतर प्रस्तुत करने का लक्ष्य है, जो 2026 के अंत तक कार्यान्वयन का आधार बनेगी।

डीए और बेसिक पे के विलय की मांग लंबे समय से कर्मचारी संगठनों द्वारा उठाई जा रही है, खासकर मुद्रास्फीति की बढ़ती दर को देखते हुए। वर्तमान में डीए की दर 58 प्रतिशत है, जो जुलाई 2025 से लागू हुई, और यह 7वें वेतन आयोग के तहत बेसिक पे का हिस्सा है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि डीए का विलय होने से बेसिक पे बढ़ेगा, जिससे भविष्य के इंक्रीमेंट, पेंशन तथा अन्य लाभ जैसे एचआरए (हाउस रेंट अलाउंस) और टीए (ट्रैवल अलाउंस) पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी कर्मचारी का बेसिक पे 76,500 रुपये है और डीए 50 प्रतिशत था, तो विलय से नया बेसिक पे 1,14,750 रुपये हो जाता, जिससे 3 प्रतिशत का इंक्रीमेंट 3,442 रुपये के बजाय अधिक होता। लेकिन वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, क्योंकि डीए को मुद्रास्फीति के अनुरूप छह माह में संशोधित करने की मौजूदा प्रणाली पर्याप्त है। यह प्रणाली श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के श्रम ब्यूरो द्वारा जारी AICPI-IW पर आधारित है, जो वास्तविक जीवनयापन लागत को प्रतिबिंबित करती है।

लोकसभा में पूछे गए अनसुलझे प्रश्न संख्या 212 में आनंद भदौरिया ने आयोग के गठन तथा डीए विलय की समयसीमा पर सवाल उठाया था। राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने उत्तर में कहा कि सरकार ने 3 नवंबर 2025 के संकल्प द्वारा आयोग का गठन कर दिया है, लेकिन डीए/डीआर को बेसिक पे के साथ विलय का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि डीए/डीआर की दरें जीवनयापन लागत के समायोजन तथा बेसिक पे/पेंशन को मुद्रास्फीति से क्षरण से बचाने के लिए हर छह माह में संशोधित होती हैं। यह उत्तर संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन आया, जब आयोग के कार्यक्षेत्र तथा सदस्यों की सूची भी संलग्न की गई। आयोग के चेयरपर्सन रंजना प्रकाश देसाई पूर्व जस्टिस हैं, जिनका अनुभव न्यायिक तथा प्रशासनिक मामलों में गहरा है, जबकि पुलक घोष आर्थिक तथा वित्तीय विशेषज्ञ हैं। आयोग को मंत्रालयों से डेटा एकत्र करने तथा हितधारकों से सुझाव लेने का कार्य सौंपा गया है, जो सिफारिशों को व्यापक बनाएगा।

7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रहा है, जिसके बाद 8वें आयोग की सिफारिशें लागू होंगी। पिछली बार 6वें वेतन आयोग से पहले 2004 में डीए का विलय हुआ था, जब डीए 50 प्रतिशत पहुंच गया था। वर्तमान में डीए 58 प्रतिशत होने से संगठनों ने विलय की मांग तेज की, लेकिन सरकार ने मौजूदा संरचना को बनाए रखने का फैसला किया। डीआर पेंशनभोगियों के लिए समान रूप से लागू होता है, जो बेसिक पेंशन का हिस्सा है। आयोग के गठन में देरी हुई, क्योंकि जनवरी 2025 की घोषणा के बाद अक्टूबर में कार्यक्षेत्र तथा सदस्यों की पुष्टि हुई। यह देरी राज्य सरकारों तथा यूनियनों के सुझावों से जुड़ी थी। आयोग की सिफारिशें न केवल केंद्रीय कर्मचारियों को प्रभावित करेंगी, बल्कि राज्य सरकारें इन्हें अपनाकर अपने कर्मचारियों के वेतन में बदलाव करेंगी, हालांकि संशोधनों के साथ।

आयोग के कार्यक्षेत्र में वेतन मैट्रिक्स की समीक्षा प्रमुख है, जो 7वें आयोग के तहत 18 स्तरों पर आधारित है। सिफारिशें एक्स-क्लास शहरों में एचआरए को बेसिक पे का 24 प्रतिशत, टीए को 3,600 से 7,200 रुपये तथा एनपीएस (नेशनल पेंशन सिस्टम) को बेसिक का 10 प्रतिशत बनाए रखने पर विचार करेंगी। सीजीएचएस (सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) की दरें वर्तमान स्तर पर रहेंगी। आयोग सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों तथा निजी क्षेत्र की तुलना करेगा, ताकि प्रतिस्पर्धी वेतन संरचना बने। पेंशनभोगियों के लिए डीआर संशोधन महत्वपूर्ण है, जो वर्तमान में 58 प्रतिशत है। संगठनों ने आयोग के कार्यक्षेत्र में पेंशन समानता तथा न्यूनतम पेंशन वृद्धि पर जोर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि आयोग की सिफारिशें वित्तीय स्थिरता को ध्यान में रखेंगी, जो राज्य बजट पर असर डालेंगी।

डीए संशोधन की प्रक्रिया AICPI-IW पर निर्भर है, जो औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक है। प्रत्येक जुलाई और जनवरी में संशोधन होता है, जो पिछली छह माह की औसत पर आधारित है। वर्तमान 58 प्रतिशत दर अक्टूबर-दिसंबर 2024 तथा जनवरी-मार्च 2025 की मुद्रास्फीति को दर्शाती है। विलय न होने से कर्मचारियों को तत्काल लाभ नहीं मिलेगा, लेकिन आयोग की सिफारिशें फिटमेंट फैक्टर बढ़ा सकती हैं, जो वर्तमान में 2.57 है। पिछली बार 7वें आयोग ने इसे 2.57 रखा था, जिससे न्यूनतम बेसिक पे 7,000 से 18,000 रुपये हो गया। 8वें आयोग में यह 3.0 तक पहुंच सकता है, लेकिन विलय के बिना डीए अलग रहेगा। पेंशनभोगियों के लिए डीआर समान रूप से संशोधित होगा, जो उनकी मासिक आय को सुरक्षित रखेगा।

आयोग का गठन केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 10 वर्षीय चक्र का हिस्सा है, जो 2016 से चल रहा है। लगभग 50 लाख कर्मचारी तथा 69 लाख पेंशनभोगी इससे प्रभावित होंगे, जिनकी कुल संख्या 1.19 करोड़ है। रक्षा कर्मियों तथा अखिल भारतीय सेवाओं को भी लाभ मिलेगा। आयोग राज्य सरकारों के वित्त पर प्रभाव का मूल्यांकन करेगा, क्योंकि अधिकांश राज्य केंद्रीय सिफारिशें अपनाते हैं। संगठनों ने कार्यक्षेत्र में संशोधन की मांग की, लेकिन सरकार ने इसे अस्वीकार किया। विलय न होने से इंटरिम रिलीफ की उम्मीदें टूट गईं, लेकिन डीए की द्विमासिक वृद्धि जारी रहेगी। अगला संशोधन जनवरी 2026 में हो सकता है, जो AICPI पर निर्भर करेगा।

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