राजस्थान से ISI का जासूस गिरफ्तार, प्रकाश सिंह उर्फ बादल ने सेना की गोपनीय जानकारियां पाकिस्तान भेजीं।
राजस्थान पुलिस की अपराध जांच विभाग (सीआईडी) इंटेलिजेंस विंग ने एक बड़ा खुलासा करते हुए पंजाब के फेरोजपुर जिले के
राजस्थान पुलिस की अपराध जांच विभाग (सीआईडी) इंटेलिजेंस विंग ने एक बड़ा खुलासा करते हुए पंजाब के फेरोजपुर जिले के निवासी प्रकाश सिंह उर्फ बादल को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। 34 वर्षीय आरोपी को श्रीगंगानगर जिले के सदुलवाली सैन्य क्षेत्र के निकट संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर 27 नवंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था, और गहन पूछताछ तथा तकनीकी जांच के बाद 1 दिसंबर 2025 को आधिकारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी भारतीय सेना की गतिविधियों, सैन्य ठिकानों, सीमा क्षेत्रों में निर्माण कार्यों तथा अन्य रणनीतिक जानकारियों की फोटो तथा वीडियो पाकिस्तान भेज रहा था। यह गिरफ्तारी राजस्थान सीआईडी की लंबे समय से चली आ रही निगरानी का नतीजा है, जो पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों की जासूसी गतिविधियों पर केंद्रित थी। आरोपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से आईएसआई के हैंडलर्स से संपर्क बनाए रखा था, और बदले में पैसे प्राप्त किए थे। इस मामले में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम 1923 के तहत जयपुर के विशेष पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई है, तथा जांच जारी है।
प्रकाश सिंह उर्फ बादल, कादर सिंह का पुत्र, मूल रूप से पंजाब के फेरोजपुर का निवासी है, जो सीमा क्षेत्र में स्थित होने के कारण संवेदनशील माना जाता है। सीआईडी इंटेलिजेंस के महानिरीक्षक प्रफुल्ल कुमार के अनुसार, विभाग ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों से जुड़ी संदिग्ध जासूसी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी, जब आरोपी की गतिविधियां संदेह के घेरे में आईं। 27 नवंबर को बॉर्डर इंटेलिजेंस टीम ने सदुलवाली सैन्य स्टेशन के आसपास संदिग्ध आवाजाही की सूचना पर उसे हिरासत में लिया। प्रारंभिक जांच में उसके मोबाइल फोन से कई पाकिस्तानी नंबर्स के साथ चैट्स मिले, जो जासूसी की ओर इशारा कर रहे थे। उसके बाद उसे श्रीगंगानगर के जॉइंट इंटरोगेशन सेंटर ले जाया गया, जहां प्रारंभिक पूछताछ हुई। बाद में जयपुर के सेंट्रल इंटरोगेशन सेंटर में स्थानांतरित कर गहन पूछताछ की गई, जिसमें विभिन्न खुफिया एजेंसियों ने हिस्सा लिया। तकनीकी जांच में उसके डिवाइस से प्राप्त डिजिटल साक्ष्य ने सभी आरोपों की पुष्टि की।
आरोपी की जासूसी गतिविधियां मई 2025 से सक्रिय बताई जा रही हैं, जो ऑपरेशन सिंदूर के समय से जुड़ी हुई हैं। इस अवधि में उसने भारतीय सेना के वाहनों की आवाजाही, सैन्य इंस्टॉलेशनों की स्थिति, सीमा क्षेत्रों की भौगोलिक जानकारी, पुलों तथा रेलवे लाइनों का विवरण, और चल रहे निर्माण कार्यों की फोटो तथा वीडियो एकत्र किए। ये जानकारियां सोशल मीडिया के माध्यम से पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजी जाती थीं, जो रणनीतिक महत्व की थीं। विशेष रूप से राजस्थान, पंजाब तथा गुजरात के सीमावर्ती क्षेत्रों पर फोकस रहा, जहां सैन्य गतिविधियां अधिक होती हैं। सीआईडी के अनुसार, आरोपी ने स्थानीय स्तर पर घूमकर इन जानकारियों को इकट्ठा किया, और कभी-कभी सैन्य क्षेत्रों के निकट जाकर फोटो तथा वीडियो बनाए। यह गतिविधि न केवल आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम का उल्लंघन थी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रही थी। जांच में पाया गया कि आरोपी ने आईएसआई के लिए कई संवेदनशील दस्तावेजों तथा मानचित्रों को भी साझा किया था।
एक महत्वपूर्ण पहलू यह उभरा कि प्रकाश सिंह ने अन्य लोगों के मोबाइल नंबर्स के ओटीपी प्राप्त करके व्हाट्सएप अकाउंट्स बनवाए, जो पाकिस्तानी हैंडलर्स के उपयोग में लाए जाते थे। ये अकाउंट्स जासूसी तथा अन्य राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होते थे, क्योंकि पाकिस्तानी नंबर्स से सीधे संपर्क संभव नहीं होता। आरोपी ने विभिन्न भारतीय मोबाइल उपयोगकर्ताओं से ओटीपी हासिल किए, और बदले में उन्हें पैसे दिए। ये व्हाट्सएप अकाउंट्स एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग के लिए उपयोगी साबित हुए, जिससे हैंडलर्स भारतीय नेटवर्क पर सक्रिय हो सके। सीआईडी ने इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए उसके बैंक खातों की जांच शुरू कर दी है, जहां से पैसे ट्रांसफर के लेन-देन मिले हैं। आरोपी को इन सेवाओं के बदले उचित मुआवजा मिलता था, जो जासूसी को प्रोत्साहित करने का माध्यम बना। यह तरीका आधुनिक जासूसी का एक सामान्य पैटर्न है, जहां डिजिटल टूल्स का दुरुपयोग किया जाता है।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को जयपुर के विशेष पुलिस स्टेशन में पेश किया गया, जहां आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम 1923 की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज हुआ। यह अधिनियम गोपनीय सरकारी दस्तावेजों तथा जानकारियों के अनधिकृत प्रकटीकरण को दंडनीय बनाता है, जिसमें कठोर सजा का प्रावधान है। जांच अधिकारी ने बताया कि आरोपी से तीन दिन की पुलिस रिमांड ली गई है, ताकि उसके नेटवर्क के अन्य सदस्यों का पता लगाया जा सके। पूछताछ में यह सामने आया कि वह अकेला कार्यकर्ता नहीं था, बल्कि राजस्थान तथा पंजाब में अन्य लोगों से जुड़ा हुआ था। सीआईडी इंटेलिजेंस ने सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ा दी है, ताकि ऐसी गतिविधियां रोकी जा सकें। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से राजस्थान में जासूसी के कई मामले सामने आए हैं, लेकिन यह गिरफ्तारी नेटवर्क को झकझोरने वाली साबित हो रही है।
इस घटना का संदर्भ ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा है, जो मई 2025 में शुरू हुआ था। यह ऑपरेशन भारतीय सेना की सीमा सुरक्षा तथा खुफिया गतिविधियों को मजबूत करने का हिस्सा था, जिसके दौरान पाकिस्तानी जासूसों की सक्रियता बढ़ गई थी। आरोपी ने इसी समय से आईएसआई के संपर्क में आना शुरू किया, और संवेदनशील क्षेत्रों में घुसपैठ की कोशिश की। सदुलवाली जैसे सैन्य स्टेशन रणनीतिक महत्व के हैं, जहां वाहनों तथा उपकरणों की आवाजाही नियमित होती है। आरोपी ने इनकी फोटो खींचकर भेजीं, जो दुश्मन ताकतों के लिए उपयोगी साबित हो सकती थीं। जांच में उसके फोन से मिले वीडियो तथा इमेजेस ने साबित किया कि वह व्यवस्थित तरीके से कार्य कर रहा था। सीआईडी ने उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक कर दिया है, और पाकिस्तानी नंबर्स को ट्रैक करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मांगा है।
प्रकाश सिंह की गिरफ्तारी से पता चला कि वह स्थानीय स्तर पर सामान्य जीवन जी रहा था, लेकिन गुप्त रूप से जासूसी में लिप्त था। फेरोजपुर से श्रीगंगानगर की दूरी कम होने के कारण वह आसानी से सीमा क्षेत्रों में आ-जा सकता था। सीआईडी की निगरानी में बॉर्डर इंटेलिजेंस टीम की भूमिका महत्वपूर्ण रही, जिसने संदिग्ध आवाजाही पर तुरंत कार्रवाई की। पूछताछ के दौरान आरोपी ने कई राज खोले, लेकिन पूर्ण नेटवर्क का खुलासा अभी बाकी है। जांच एजेंसियां अब उसके संपर्कों को ट्रेस कर रही हैं, जिसमें पंजाब तथा गुजरात के अन्य संदिग्ध शामिल हो सकते हैं। आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत सजा में 14 वर्ष तक की कैद तथा जुर्माना हो सकता है, जो मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
इस गिरफ्तारी ने सीमावर्ती राज्यों में सुरक्षा उपायों पर जोर दिया है। राजस्थान पुलिस ने सभी जिलों में खुफिया इकाइयों को अलर्ट किया है, ताकि डिजिटल जासूसी को रोका जा सके। व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ओटीपी दुरुपयोग रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाने की योजना है। आरोपी के डिवाइस से प्राप्त डेटा का विश्लेषण जारी है, जिसमें एन्क्रिप्टेड मैसेजेस शामिल हैं। सीआईडी ने स्पष्ट किया कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, और पूर्ण जांच के बाद अन्य कार्रवाइयां होंगी। श्रीगंगानगर जैसे सीमा जिलों में सैन्य ठिकानों की सुरक्षा पहले से ही सख्त है, लेकिन ऐसी घटनाएं सतर्कता की आवश्यकता बताती हैं।
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