पुणे केतन अग्रवाल केस: 'भले ही मेरी बेटी हो, दोषी पाए जाने पर मिले सख्त सजा', आरोपी सिया गोयल के पिता का बड़ा बयान, दूसरे पक्ष ने किया पलटवार!

Pune Ketan Aggarwal Case: पुणे के लोहागढ़ किले में रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की मौत मामले में आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी के परिवारों ने अलग-अलग दावे किए हैं।

Jun 26, 2026 - 11:54
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पुणे केतन अग्रवाल केस: 'भले ही मेरी बेटी हो, दोषी पाए जाने पर मिले सख्त सजा', आरोपी सिया गोयल के पिता का बड़ा बयान, दूसरे पक्ष ने किया पलटवार!
Ketan Aggarwal Case Update
  • Ketan Aggarwal Case Update: केतन अग्रवाल मर्डर केस में आरोपियों के परिवारों के दावों में विरोधाभास, सिया के पिता बोले- 'बेटी दोषी तो मिले कड़ी सजा'
  • Ketan Aggarwal Murder Investigation: पुणे केतन अग्रवाल मामले में नया मोड़, सिया के माता-पिता और चेतन के परिवार के बयानों में बड़ा अंतर
  • केतन अग्रवाल कथित हत्या मामला: आरोपी सिया गोयल के पिता ने मांगी सख्त सजा, सह-आरोपी चेतन के परिवार ने दावों को नकारा

महाराष्ट्र के पुणे स्थित ऐतिहासिक लोहागढ़ किले में 26 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की कथित हत्या के मामले में पुलिसिया जांच अब काफी तेज हो गई है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में गिरफ्तार किए गए दोनों मुख्य आरोपियों सिया गोयल और चेतन चौधरी के परिवारों की तरफ से अब बिल्कुल अलग-अलग और विरोधाभासी दावे सामने आ रहे हैं। मुख्य आरोपी सिया गोयल के माता-पिता ने जहां एक तरफ कठोर रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा है कि यदि उनकी बेटी इस कृत्य में दोषी पाई जाती है, तो उसे कानूनन सबसे सख्त सजा मिलनी चाहिए। वहीं, दूसरी ओर सह-आरोपी चेतन चौधरी के परिजनों ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि उनके बेटे को इस पूरे मामले में झूठा फंसाया जा रहा है। पुलिस इन दोनों पक्षों के दावों और काउंटर दावों को ध्यान में रखकर आगे के साक्ष्य जुटाने में लगी है।

यह मामला पुणे के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल लोहागढ़ किले में एक युवा व्यवसायी की संदिग्ध परिस्थितियों में ऊंचाई से गिरने के बाद हुई मौत की तफ्तीश से जुड़ा है। मृतक की पहचान 26 वर्षीय केतन अग्रवाल के रूप में हुई है, जो रियल एस्टेट के कारोबार से जुड़े थे। शुरुआत में इस घटना को एक साधारण पहाड़ी हादसा माना जा रहा था, लेकिन पुलिस की प्रारंभिक जांच के बाद इसे कथित हत्या की साजिश के रूप में दर्ज किया गया। मामले में मृतक की मंगेतर सिया गोयल और उसके करीबी मित्र चेतन चौधरी को पुलिस ने मुख्य संदिग्ध और आरोपी के रूप में हिरासत में लिया है। अब इस कानूनी प्रक्रिया के बीच दोनों आरोपियों के पारिवारिक सदस्यों के बयानों ने इस पूरे घटनाक्रम को एक नया मोड़ दे दिया है।

लोहागढ़ किले में हुई इस दुखद घटना के बाद से ही पुलिस विभिन्न कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है। केतन अग्रवाल की मौत के बाद जब तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्य सामने आए, तो पुलिस ने मंगेतर सिया गोयल और चेतन चौधरी को नामजद करते हुए जांच की रफ्तार बढ़ाई। इसी बीच, अस्पताल में उपचाराधीन आरोपी सिया गोयल के पिता ने मीडिया और जांच अधिकारियों से बातचीत के दौरान एक बड़ा बयान जारी किया। उन्होंने भावुक और कड़े लहजे में कहा कि केतन की असामयिक मृत्यु से उनका परिवार भी स्तब्ध है और इस कृत्य के लिए जो भी व्यक्ति उत्तरदायी है, उसे न्यायपालिका द्वारा सबसे कठोर दंड दिया जाना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि यदि उनकी खुद की बेटी भी इस अपराध में संलिप्त और दोषी साबित होती है, तो कानून को उसके साथ कोई नरमी नहीं बरतनी चाहिए।

इसके ठीक विपरीत, सह-आरोपी चेतन चौधरी के परिवार का दृष्टिकोण पूरी तरह अलग है। चेतन के परिजनों ने स्थानीय स्तर पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनका बेटा निर्दोष है और इस घटनाक्रम से उसका कोई सीधा संबंध नहीं है। उनके अनुसार, चेतन को केवल परिस्थितियों के जाल में उलझाकर एक साजिश के तहत इस आपराधिक मामले में घसीटा जा रहा है। इन दोनों विपरीत बयानों के बाद मामले की कड़ियां और अधिक पेचीदा हो गई हैं।

इस मामले में दोनों पक्षों के परिवारों की प्रतिक्रियाएं कानूनी और सामाजिक स्तर पर व्यापक रूप से देखी जा रही हैं। सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि सिया गोयल के पिता का अपनी ही बेटी के खिलाफ जांच और सजा का समर्थन करना एक अत्यंत दुर्लभ और न्यायसंगत रुख को दर्शाता है, जिससे यह संकेत मिलता है कि परिवार पीड़ित पक्ष के दर्द को समझ रहा है।

वहीं, चेतन चौधरी के परिवार की प्रतिक्रिया पर प्रतिक्रिया देते हुए मृतक केतन अग्रवाल के करीबियों और व्यावसायिक सहयोगियों का कहना है कि पुलिस को किसी भी दबाव में आए बिना केवल वैज्ञानिक और फोरेंसिक साक्ष्यों को ही अपनी जांच का आधार बनाना चाहिए। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही दूध का दूध और पानी का पानी अलग हो सकेगा।

इस पूरे घटनाक्रम और परिवारों के बीच के वैचारिक मतभेद का प्रभाव पुलिस की तफ्तीश पर भी पड़ रहा है। पुलिस प्रशासन अब किसी भी प्रकार के मौखिक बयानों पर निर्भर रहने के बजाय पूरी तरह से डिजिटल फुटप्रिंट्स, मोबाइल लोकेशन, कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को मजबूत करने में जुट गया है। रियल एस्टेट जगत के युवा कारोबारी से जुड़े होने के कारण इस मामले पर व्यापारिक संगठनों की भी पैनी नजर है, जो स्थानीय प्रशासन से इस मामले की पारदर्शी और त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।

पुणे पुलिस के जांच अधिकारी इस समय दोनों परिवारों और आरोपियों से जुड़े करीबी संपर्कों के बयान दर्ज करने की औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। पुलिस का मुख्य ध्यान अब इस बात पर केंद्रित है कि घटना के दिन और उससे ठीक पहले दोनों आरोपियों के बीच क्या बातचीत हुई थी और क्या उनके दावों में कोई तकनीकी विसंगति है। कानून के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार, अभी यह मामला पूरी तरह से विचाराधीन और जांच के दायरे में है, इसलिए किसी भी आरोपी को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता जब तक कि अदालत में साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध न हो जाए। आने वाले दिनों में पुलिस न्यायालय के समक्ष अपनी विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करेगी।

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