चंडीगढ़ में किरण खेर को 12.76 लाख रुपये का नोटिस- सरकारी आवास के बकाया किराए पर विवाद, पूर्व सांसद ने मांगी सफाई।
Bollywood News: चंडीगढ़ प्रशासन ने पूर्व बीजेपी सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री किरण खेर को सेक्टर-7 में आवंटित सरकारी आवास (T-6/23) के लिए.....
Bollywood News: चंडीगढ़ प्रशासन ने पूर्व बीजेपी सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री किरण खेर को सेक्टर-7 में आवंटित सरकारी आवास (T-6/23) के लिए 12,76,418 रुपये के बकाया किराए का नोटिस जारी किया है। यह नोटिस 24 जून 2025 को उनके सेक्टर-8ए स्थित निजी निवास (कोठी नंबर 65) पर सहायक नियंत्रक (वित्त और लेखा) किराया कार्यालय द्वारा भेजा गया। नोटिस में बकाया राशि को जल्द से जल्द जमा करने का निर्देश दिया गया है, अन्यथा 12% वार्षिक ब्याज लगाया जाएगा। किरण खेर ने नोटिस के जवाब में प्रशासन को पत्र लिखकर बकाया राशि की गणना और नियमों पर स्पष्टीकरण मांगा है, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें पहले कोई सूचना नहीं दी गई थी।
नोटिस के अनुसार, बकाया राशि में लाइसेंस शुल्क (किराया), जुर्माना, और ब्याज शामिल हैं, जो कुल 12,76,418 रुपये बनते हैं। इसका ब्यौरा इस प्रकार है:
जुलाई 2023 से 5 अक्टूबर 2024 तक: नियमित लाइसेंस शुल्क के रूप में 5,725 रुपये बकाया।
6 अक्टूबर 2024 से 5 जनवरी 2025 तक: इस अवधि को "अनधिकृत कब्जा" माना गया, जिसके लिए 100% जुर्माना लगाया गया, जो 3,64,620 रुपये है।
6 जनवरी से 12 अप्रैल 2025 तक: परिसर खाली करने की आधिकारिक तारीख तक 200% जुर्माना लगाया गया, जो 8,20,000 रुपये है।
अतिरिक्त शुल्क: 8 नवंबर 2014 से खाली करने की तारीख तक 25% अतिरिक्त किराए के रूप में 26,106 रुपये और 30 अप्रैल 2025 तक 12% वार्षिक ब्याज के रूप में 59,680 रुपये जोड़े गए।
प्रशासन ने किरण खेर को यह राशि डिमांड ड्राफ्ट या बैंक ट्रांसफर के माध्यम से जमा करने को कहा है। भुगतान से पहले संबंधित कैशियर से भुगतान विवरण प्राप्त करने का निर्देश भी दिया गया है।
- किरण खेर की प्रतिक्रिया
किरण खेर ने नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशासन को पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने बकाया राशि की गणना और नियमों पर सवाल उठाए। उनके कार्यालय से जारी बयान में कहा गया कि उन्हें बकाया राशि की जानकारी केवल मीडिया के माध्यम से मिली। उन्होंने हाउस अलॉटमेंट कमेटी (HAC) के नियम SR 317-AM-21 का हवाला देते हुए कहा कि रिटायरमेंट के बाद चार महीने तक सामान्य लाइसेंस शुल्क, चार से छह महीने तक 50 गुना, और छह से सात महीने तक 100 गुना शुल्क लागू होना चाहिए। लेकिन प्रशासन ने चार महीने के बाद सीधे 100 गुना और फिर 200 गुना जुर्माना लगाया, जो नियमों के अनुरूप नहीं लगता।
उन्होंने 25% अतिरिक्त किराए (26,106 रुपये) और 12% ब्याज (59,680 रुपये) की गणना पर भी सवाल उठाया, क्योंकि उन्हें पहले कोई नोटिस या सूचना नहीं दी गई थी। खेर ने प्रशासन से गणना की समीक्षा और शुल्कों के लिए विस्तृत औचित्य प्रदान करने का अनुरोध किया है।
किरण खेर 2014 और 2019 में चंडीगढ़ से बीजेपी की लोकसभा सांसद रहीं। इस दौरान उन्हें सेक्टर-7 में सरकारी आवास T-6/23 आवंटित किया गया था। नियमों के अनुसार, सांसदों को कार्यकाल के बाद आवास खाली करना होता है, और लाइसेंस शुल्क समय पर जमा करना होता है। खेर पर आरोप है कि उन्होंने तय समय के बाद भी आवास खाली नहीं किया और लाइसेंस शुल्क का भुगतान समय पर नहीं किया।
यह मामला तब और चर्चा में आया, जब चंडीगढ़ के निवासियों और कार्यकर्ताओं ने नियमों के समान प्रवर्तन पर सवाल उठाए। कई लोगों ने तुलना की कि चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने धनास पुनर्वास फ्लैटों में डिफॉल्टरों और फर्नीचर मार्केट के विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की थी, लेकिन खेर के मामले में देरी हुई। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में इसे विशेषाधिकार का मामला बताया गया।
नोटिस की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से फैली। एक एक्स पोस्ट में लिखा गया, “किरण खेर को 12.76 लाख का नोटिस! सरकारी आवास का किराया समय पर चुकाना चाहिए था।” कुछ यूजर्स ने इसे बीजेपी नेताओं की जवाबदेही पर सवाल उठाने का मौका माना, जबकि अन्य ने खेर का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें पहले सूचना नहीं दी गई। एक यूजर ने लिखा, “नियम सबके लिए बराबर होने चाहिए, चाहे सांसद हों या आम आदमी।”
केंद्र सरकार सांसदों और अधिकारियों के लिए सामान्य पूल और विभागीय पूल में उपलब्ध आवासों के लिए लाइसेंस शुल्क वसूलती है। यह शुल्क बाजार दरों से कम होता है और सांसदों को सुविधा प्रदान करने के लिए लिया जाता है। चंडीगढ़ प्रशासन के नियमों के तहत, आवास खाली न करने पर भारी जुर्माना लगाया जाता है, जैसा कि खेर के मामले में हुआ।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक समान मामले में बिहार के पूर्व विधायक अविनाश कुमार सिंह की याचिका खारिज की थी, जिन्हें 2014 से 2016 तक सरकारी बंगले में अनधिकृत रूप से रहने के लिए 21 लाख रुपये का जुर्माना देना पड़ा था। इस फैसले में कोर्ट ने कहा कि कोई भी सरकारी आवास को अनिश्चित काल तक नहीं रख सकता।
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