यमन में भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की मौत की सजा रद्द, ग्रैंड मुफ्ती का दावा, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार।
Kerala News: केरल की नर्स निमिषा प्रिया, जो यमन में 2017 में एक हत्या के मामले में मौत की सजा का सामना कर रही थीं, उनकी सजा को पूरी तरह रद्द.....

केरल की नर्स निमिषा प्रिया, जो यमन में 2017 में एक हत्या के मामले में मौत की सजा का सामना कर रही थीं, उनकी सजा को पूरी तरह रद्द करने की खबर सामने आई है। भारत के ग्रैंड मुफ्ती कंथापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार के कार्यालय ने 28 जुलाई 2025 को एक बयान जारी कर दावा किया कि यमन की राजधानी सना में एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद निमिषा की मौत की सजा को रद्द कर दिया गया है। हालांकि, इस बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि यमन सरकार से अभी तक इसकी आधिकारिक लिखित पुष्टि नहीं मिली है। भारत सरकार और निमिषा के परिवार को इस मामले में आगे की प्रक्रिया के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। यह खबर निमिषा के परिवार और समर्थकों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है, जो उनकी रिहाई के लिए लंबे समय से प्रयास कर रहे हैं।
- निमिषा प्रिया का मामला
निमिषा प्रिया, जो केरल के पलक्कड़ जिले के कोल्लेंगोड की रहने वाली हैं, 2008 में बेहतर नौकरी की तलाश में यमन गई थीं। वहां उन्होंने सना के एक सरकारी अस्पताल में नर्स के रूप में काम शुरू किया। 2014 में, उन्होंने अपना खुद का क्लिनिक शुरू करने का फैसला किया। यमनी कानून के अनुसार, विदेशियों को व्यवसाय शुरू करने के लिए स्थानीय साझेदार की जरूरत होती है। इसलिए, निमिषा ने तलाल अब्दो महदी नाम के एक यमनी नागरिक के साथ साझेदारी की।
हालांकि, निमिषा और तलाल के बीच संबंध जल्द ही खराब हो गए। निमिषा और उनके समर्थकों का दावा है कि तलाल ने उनके पैसे हड़प लिए, उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया। 2017 में, निमिषा ने कथित तौर पर अपने पासपोर्ट को वापस लेने के लिए तलाल को बेहोश करने की कोशिश की। इसके लिए उन्होंने तलाल को एक सेडेटिव इंजेक्शन दिया, लेकिन खुराक ज्यादा होने के कारण तलाल की मौत हो गई। इसके बाद, निमिषा ने सबूत मिटाने के लिए तलाल के शव को टुकड़ों में काटकर एक पानी की टंकी में फेंक दिया। अगस्त 2017 में, निमिषा को यमन- सऊदी अरब सीमा के पास गिरफ्तार कर लिया गया।
2018 में, सना की एक स्थानीय अदालत ने निमिषा को हत्या का दोषी ठहराया और 2020 में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। उनके परिवार ने 2023 में यमन के सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल में अपील की, लेकिन इसे खारिज कर दिया गया। दिसंबर 2024 में, यमन के राष्ट्रपति राशद अल-अलीमी ने उनकी सजा को मंजूरी दी, और जनवरी 2025 में हूती विद्रोहियों के सुप्रीम पॉलिटिकल काउंसिल के अध्यक्ष महदी अल-मशात ने भी इसे हरी झंडी दी। निमिषा की फांसी 16 जुलाई 2025 को तय की गई थी, लेकिन भारत सरकार और धार्मिक नेताओं के हस्तक्षेप के बाद इसे स्थगित कर दिया गया।
- रिहाई के लिए प्रयास
निमिषा की रिहाई के लिए उनके परिवार, समर्थकों और भारत सरकार ने कई स्तरों पर प्रयास किए। 2020 में, निमिषा के समर्थन में 'सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल' का गठन किया गया, जिसमें निर्वाचित प्रतिनिधि, वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल थे। इस संगठन ने निमिषा की रिहाई के लिए धन जुटाने और यमनी कानून के तहत 'दिया' (ब्लड मनी) के जरिए पीड़ित परिवार से माफी मांगने की कोशिश की। यमनी कानून में शरिया के तहत, पीड़ित का परिवार दोषी को माफ करके सजा को रद्द कर सकता है, बशर्ते वे ब्लड मनी स्वीकार करें।
निमिषा की मां प्रेमकुमारी, जो केरल में एक घरेलू सहायिका हैं, अप्रैल 2024 से यमन में हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के दिसंबर 2023 के आदेश के बाद, जिसमें भारत सरकार को यमन यात्रा पर प्रतिबंध में छूट देने को कहा गया था, प्रेमकुमारी अपनी बेटी से मिलने सना पहुंचीं। उन्होंने 24 अप्रैल 2024 को जेल में निमिषा से मुलाकात की और तलाल के परिवार से माफी मांगने की कोशिश की। निमिषा ने भी एक पत्र में अपनी गलती को अनजाने में हुआ हादसा बताया और माफी की गुहार लगाई।
भारत के ग्रैंड मुफ्ती कंथापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार ने यमनी धार्मिक नेताओं से बातचीत कर निमिषा की सजा को स्थगित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके कार्यालय ने 28 जुलाई 2025 को दावा किया कि सना में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में निमिषा की मौत की सजा को पूरी तरह रद्द करने का फैसला लिया गया। इसके अलावा, भारतीय मूल के सामाजिक कार्यकर्ता सैमुअल जेरोम, जो 1999 से यमन में रह रहे हैं, ने तलाल के परिवार के साथ बातचीत में अहम भूमिका निभाई।
- ग्रैंड मुफ्ती का बयान
ग्रैंड मुफ्ती के कार्यालय ने अपने बयान में कहा, "निमिषा प्रिया की मौत की सजा, जिसे पहले स्थगित किया गया था, अब पूरी तरह रद्द कर दी गई है। सना में एक उच्च स्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया।" हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यमन सरकार से अभी तक इसकी आधिकारिक लिखित पुष्टि नहीं मिली है। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस दावे की पुष्टि नहीं की है और कहा है कि वे यमनी अधिकारियों और निमिषा के परिवार के साथ संपर्क में हैं।
इसके अलावा, इंजीलवादी और ग्लोबल पीस इनिशिएटिव के संस्थापक डॉ. के.ए. पॉल ने 22 जुलाई 2025 को सना से एक वीडियो संदेश जारी कर दावा किया कि निमिषा की सजा रद्द कर दी गई है और वह जल्द भारत लौटेंगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यमनी नेताओं को धन्यवाद दिया। हालांकि, निमिषा के पति टॉमी थॉमस ने कहा कि उन्हें इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।
निमिषा की रिहाई की राह में सबसे बड़ी बाधा तलाल अब्दो महदी का परिवार है। तलाल के भाई अब्देलफत्ताह महदी ने 15 जुलाई 2025 को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि उनका परिवार निमिषा को माफ करने या ब्लड मनी स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा, "हमारा रुख स्पष्ट है। हम केवल क़िसास (प्रतिशोध) चाहते हैं। हमें कोई दबाव मंजूर नहीं है।" उन्होंने भारतीय मीडिया पर भी नाराजगी जताई, जिसमें निमिषा को पीड़ित के रूप में दिखाया गया।
सैमुअल जेरोम ने भी तलाल के भाई के पोस्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय मीडिया की कुछ खबरों ने तलाल के परिवार को नाराज किया है, जिससे बातचीत और मुश्किल हो गई है। उन्होंने मीडिया से संयम बरतने की अपील की ताकि निमिषा की रिहाई की संभावनाएं प्रभावित न हों।
भारत सरकार ने इस मामले में सक्रियता दिखाई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 17 जुलाई 2025 को कहा कि सरकार निमिषा के परिवार को हर संभव सहायता दे रही है। उन्होंने एक वकील नियुक्त किया है और नियमित कांसुलर मुलाकातों की व्यवस्था की है। सरकार ने यमनी अधिकारियों और कुछ मित्र देशों के साथ संपर्क कर निमिषा की सजा को स्थगित कराने में मदद की।
सुप्रीम कोर्ट में 14 जुलाई 2025 को सुनवाई के दौरान, अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमानी ने कहा कि यमन में भारत की कोई औपचारिक राजनयिक मौजूदगी नहीं होने के कारण यह मामला जटिल है, लेकिन सरकार हर संभव कोशिश कर रही है।
निमिषा का मामला भारत और यमन में मानवाधिकार संगठनों और धार्मिक नेताओं के बीच चर्चा का विषय रहा है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जुलाई 2025 में यमन में सभी मौत की सजाओं को रद्द करने की मांग की थी। निमिषा के समर्थकों का कहना है कि उनकी सुनवाई पूरी तरह अरबी में हुई, जिसे वह समझती नहीं थीं, और उन्हें न तो वकील दिया गया और न ही दुभाषिया।
निमिषा की 13 साल की बेटी मिशेल और पति टॉमी थॉमस ने भी उनकी रिहाई के लिए भावनात्मक अपील की है। मिशेल ने एक वीडियो में कहा, "मैं अपनी मां से बहुत प्यार करती हूं।" निमिषा की मां प्रेमकुमारी ने तलाल के परिवार से माफी मांगते हुए कहा कि वह उनके दर्द को समझती हैं, क्योंकि यह उनके लिए भी उतना ही दुखद है।
निमिषा प्रिया की मौत की सजा को रद्द करने की खबर उनके परिवार और समर्थकों के लिए एक बड़ी राहत है, लेकिन यमन सरकार से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार बाकी है। भारत सरकार, धार्मिक नेता और सामाजिक कार्यकर्ताओं के संयुक्त प्रयासों ने इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, तलाल के परिवार का सख्त रुख और यमन की जटिल राजनीतिक स्थिति अभी भी निमिषा की रिहाई में बाधा बनी हुई है। इस मामले का अंतिम परिणाम यमनी अधिकारियों और तलाल के परिवार के फैसले पर निर्भर करता है।
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