Iran US Tension: होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की संप्रभुता नहीं चाहता अमेरिका, उप विदेश मंत्री काजेम गरीबबादी का बड़ा दावा
Iran US Crisis: ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबबादी ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा है कि वाशिंगटन होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की संप्रभुता नहीं देखना चाहता।

- Kazem Gharibabadi Statement: 'अमेरिका को खटकती है होर्मुज में ईरान की ताकत', ईरानी उप विदेश मंत्री ने वाशिंगटन पर साधा निशाना
- 'होर्मुज में हमारी संप्रभुता से डरता है अमेरिका', ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबबादी का तीखा बयान, मध्य पूर्व में सियासी हलचल तेज
- Iran vs USA: होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान का अमेरिका पर गंभीर आरोप, उप विदेश मंत्री ने बयानों से गरमाया माहौल
मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक खींचतान के बीच ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबबादी ने एक बेहद तल्ख और रणनीतिक बयान जारी कर अमेरिका (USA) पर सीधा निशाना साधा है। तेहरान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बुधवार को ईरानी उप विदेश मंत्री ने वैश्विक मंच पर दावा किया कि वाशिंगटन किसी भी कीमत पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान की संप्रभुता और उसके नियंत्रण को स्वीकार नहीं करना चाहता है। गरीबबादी के अनुसार, अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य और कूटनीतिक पकड़ बनाए रखने के लिए ईरान के वैध अधिकारों को दबाने का प्रयास कर रहा है। आगे की राह में, इस बयान के बाद फारस की खाड़ी और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन में वाशिंगटन और तेहरान के बीच नौसैनिक व कूटनीतिक मोर्चे पर जारी तनातनी और अधिक आक्रामक रूप ले सकती है, जिससे वैश्विक व्यापारिक समुदाय की चिंताएं बढ़ गई हैं।
यह पूरा मामला होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक और भौगोलिक नियंत्रण को लेकर ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच चल रहे पुराने विवाद का एक नया अध्याय है। ईरान के वरिष्ठ राजनयिक और उप विदेश मंत्री काजेम गरीबबादी ने वाशिंगटन की विदेश नीति की आलोचना करते हुए यह स्पष्ट किया कि अमेरिका जानबूझकर खाड़ी क्षेत्र में ईरान के प्रभुत्व को एक खतरे के रूप में पेश करता है। ईरानी नेतृत्व का मानना है कि होर्मुज जलमार्ग के एक बड़े हिस्से पर उसका ऐतिहासिक और कानूनी अधिकार है, जबकि अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगी इस क्षेत्र में निर्बाध अंतरराष्ट्रीय आवाजाही के नाम पर ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता को चुनौती दे रहे हैं।
काजेम गरीबबादी का यह तीखा बयान उस समय आया है जब हाल के दिनों में होर्मुज जलमार्ग और ओमान की खाड़ी में कई वाणिज्यिक तेल टैंकरों पर सुरक्षा संकट देखा गया है और अमेरिकी नौसेना ने इस क्षेत्र में अपनी गश्त काफी बढ़ा दी है। तेहरान में आयोजित एक प्रेस मीट के दौरान राजनयिक ने इस बात पर जोर दिया कि खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा केवल क्षेत्रीय देशों के हाथ में होनी चाहिए और किसी भी बाहरी ताकत का दखल स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका लगातार ऐसे नैरेटिव (विमर्श) तैयार कर रहा है जिससे यह साबित हो सके कि ईरान अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा है, जबकि असलियत यह है कि अमेरिका खुद इस क्षेत्र में तेल व्यापार पर अपना नियंत्रण थोपना चाहता है। पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के युद्धपोतों के बीच फारस की खाड़ी में कई बार आमना-सामना होने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं, जिससे कूटनीतिक स्तर पर दरार और चौड़ी हो गई है।
इस पूरे घटनाक्रम पर दोनों पक्षों का संतुलित रुख बेहद जटिल है। ईरान के उप विदेश मंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि हम अपनी सीमाओं और जलक्षेत्र की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हैं और अमेरिका की कोई भी धमकी हमारी संप्रभुता को डिगा नहीं सकती। ईरान अपनी रक्षात्मक नीतियों से पीछे नहीं हटेगा।
दूसरी ओर, वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्रालय (State Department) और पेंटागन के प्रवक्ताओं ने अतीत में हमेशा इस बात को दोहराया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग (International Waterway) है। अमेरिका का तर्क है कि वह केवल वैश्विक वाणिज्य की स्वतंत्रता और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी देश को वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ईरान के दावे अंतरराष्ट्रीय नियमों के विपरीत हैं।
काजेम गरीबबादी के इस बयान का सीधा असर मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था पर देखने को मिल रहा है। चूंकि होर्मुज जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन गलियारों में से एक है, इसलिए दोनों महाशक्तियों के बीच बढ़ते वाकयुद्ध से वैश्विक कच्चे तेल के बाजार (Crude Oil Market) में अस्थिरता का खतरा बढ़ जाता है। ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयानों से खाड़ी देशों से तेल आयात करने वाले एशियाई और यूरोपीय देशों में सप्लाई चेन को लेकर चिंताएं गहरी हो जाती हैं। इसके अलावा, समुद्री बीमा कंपनियों ने भी इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के लिए अपने जोखिम मूल्यांकन को कड़ा करना शुरू कर दिया है, जो अप्रत्यक्ष रूप से वैश्विक माल ढुलाई लागत को प्रभावित कर सकता है।
आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) या अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन में इस जुबानी जंग का असर देखा जा सकता है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा सकते हैं। खाड़ी क्षेत्र में तैनात अमेरिकी पांचवें बेड़े और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की नौसेना के बीच किसी भी प्रकार की गलतफहमी या अप्रत्याशित टकराव को रोकने के लिए ओमान और कतर जैसे मध्यस्थ देश पर्दे के पीछे से राजनयिक संवाद स्थापित करने का प्रयास कर सकते हैं। फिलहाल, यह स्पष्ट है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच प्रतिबंधों और क्षेत्रीय प्रभुत्व को लेकर कोई ठोस वार्ता नहीं होती, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य भू-राजनीतिक टकराव का एक संवेदनशील केंद्र बना रहेगा।
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