Satish Mahana Statement: 'सच्ची श्रद्धा से दान न देने वालों का पैसा चोरी हुआ', राम मंदिर चंदा चोरी विवाद पर बोले विधानसभा स्पीकर

Ram Mandir Donation Theft: यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने राम मंदिर चंदा चोरी विवाद पर कहा कि पैसा उनका चोरी हुआ, जिन्होंने सच्ची श्रद्धा से दान नहीं दिया था।

Jul 15, 2026 - 12:21
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Satish Mahana Statement: 'सच्ची श्रद्धा से दान न देने वालों का पैसा चोरी हुआ', राम मंदिर चंदा चोरी विवाद पर बोले विधानसभा स्पीकर
Satish Mahana Statement
  • Ram Mandir Donation Row: राम मंदिर चंदे की चोरी पर यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का बड़ा बयान, राजनीतिक गलियारों में हलचल
  • राम मंदिर चंदा चोरी पर विधानसभा स्पीकर सतीश महाना का अजीबो-गरीब बयान, कहा- 'पैसा उनका चोरी हुआ जिन्होंने...'
  • UP Politics: राम मंदिर चंदा चोरी विवाद पर यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का विवादित बयान, विपक्ष ने घेरा

उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) सतीश महाना ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित किए गए चंदे में कथित धांधली और चोरी के आरोपों पर एक बेहद चौंकाने वाला बयान दिया है। बुधवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से मुखातिब होते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि राम मंदिर के नाम पर पैसा केवल उन्हीं लोगों का चोरी हुआ है, जिन्होंने सच्ची श्रद्धा और पवित्र भाव से दान नहीं दिया था। उनके इस आध्यात्मिक और दार्शनिक तर्क वाले राजनीतिक बयान ने प्रदेश के सियासी हलकों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। आगामी दिनों में इस संवेदनशील विषय पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और तेज होने के पूरे आसार दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि विपक्षी दलों ने स्पीकर के इस बयान को चंदा चोरी के आरोपियों को बचाने का एक प्रयास करार दिया है।

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए देश भर से करोड़ों श्रद्धालुओं ने समर्पण राशि और चंदा दिया था। हाल ही में इस चंदे की राशि के प्रबंधन और कुछ तकनीकी स्तरों पर कथित हेराफेरी या चेक बाउंस होने के मामले सामने आने के बाद विपक्ष इस मुद्दे को लेकर लगातार सरकार और संबंधित ट्रस्ट पर हमलावर रहा है। इसी पृष्ठभूमि में, जब उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना से इस चंदा चोरी के आरोपों से जुड़ा सवाल पूछा गया, तो उन्होंने विधिक या प्रशासनिक जवाब देने के बजाय एक धार्मिक और आध्यात्मिक टिप्पणी कर दी। उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक एक बचाव की मुद्रा के रूप में देख रहे हैं, जिसने अब एक बड़े सियासी विवाद का रूप ले लिया है।

यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना एक निर्धारित जिला दौरे और सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। वहां मीडिया कर्मियों ने उनसे राम मंदिर चंदे में हो रही कथित अनियमितताओं और चोरी की शिकायतों पर प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल किया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए महाना ने कहा कि भगवान राम के काम में जो भी व्यक्ति निश्छल और सच्ची श्रद्धा से अपना योगदान देता है, उसका धन कभी व्यर्थ नहीं जाता और न ही उसे कोई छू सकता है। उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा कि जिन लोगों की नीयत साफ नहीं थी या जिन्होंने बिना सच्ची श्रद्धा के केवल दिखावे के लिए दान दिया था, उन्हीं का पैसा चोरी हुआ है। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होते ही विपक्षी नेताओं ने इसे लपक लिया और इसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी बताना शुरू कर दिया।

इस संवेदनशील विषय पर सभी प्रमुख पक्षों का रुख संतुलित और मुखर रहा है। समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस (Congress) सहित अन्य विपक्षी दलों के प्रवक्ताओं ने संयुक्त रूप से इस बयान की निंदा की है। विपक्ष का तर्क है कि विधानसभा अध्यक्ष का यह बयान उन भ्रष्टाचारियों और चोरों का हौसला बढ़ाने वाला है जिन्होंने भगवान राम के नाम पर आम जनता की गाढ़ी कमाई को लूटा है। विपक्ष ने मांग की है कि आस्था के नाम पर दिए गए एक-एक पैसे का ऑडिट होना चाहिए और दोषियों को जेल भेजा जाना चाहिए।

दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के स्थानीय नेताओं ने स्पीकर के बयान का बचाव करते हुए कहा है कि उनके कहने का तात्पर्य केवल धार्मिक आस्था और ईश्वर के प्रति समर्पण से था, जिसे राजनीतिक रंग देकर तिल का ताड़ बनाया जा रहा है। सत्तापक्ष का कहना है कि राम मंदिर ट्रस्ट पूरी पारदर्शिता से काम कर रहा है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की अफवाहें केवल राजनीतिक द्वेष के कारण फैलाई जा रही हैं।

सतीश महाना के इस बयान का सीधा प्रभाव उत्तर प्रदेश की राजनीति और आम जनता के धार्मिक विमर्श पर देखने को मिल रहा है। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर एक लंबी बहस छिड़ गई है कि क्या किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को कानूनी मामलों में इस तरह का आध्यात्मिक वर्गीकरण करना चाहिए। राजनीतिक मोर्चे पर, विपक्ष को आगामी विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को उठाकर सरकार को घेरने का एक नया हथियार मिल गया है। इसके अलावा, आम श्रद्धालुओं के बीच भी चंदे की सुरक्षा और उसकी पारदर्शिता को लेकर कूटनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं, जो आने वाले समय में चंदा एकत्रीकरण के अभियानों को प्रभावित कर सकती हैं।

चंदा चोरी के आरोपों को लेकर जहां एक तरफ कानूनी एजेंसियां और ट्रस्ट अपनी आंतरिक जांच या स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में जुटे हैं, वहीं राजनीतिक मंचों पर यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। आने वाले दिनों में विपक्षी दल इस बयान के विरोध में प्रदर्शन कर सकते हैं या फिर इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग और राज्यपाल तक अपनी शिकायत पहुंचा सकते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या खुद विधानसभा अध्यक्ष इस बढ़ते विवाद को शांत करने के लिए अपने बयान पर कोई नया स्पष्टीकरण जारी करते हैं, या फिर यह मुद्दा आने वाले स्थानीय चुनावों में एक प्रमुख राजनीतिक नैरेटिव बनकर उभरता है।

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