Shabana Azmi Appeal: शबाना आजमी ने सोनम वांगचुक से की उपवास तोड़ने की भावुक अपील, कहा- देश को आपकी जरूरत है

Shabana Azmi Appeal to Sonam Wangchuk: शबाना आजमी ने अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अपना उपवास समाप्त करने की भावुक अपील की है।

Jul 15, 2026 - 12:03
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Shabana Azmi Appeal: शबाना आजमी ने सोनम वांगचुक से की उपवास तोड़ने की भावुक अपील, कहा- देश को आपकी जरूरत है
Sonam Wangchuk Fast and Shabana Azmi Statement
  • Sonam Wangchuk Fast: लद्दाख आंदोलन के बीच सोनम वांगचुक के अनशन पर बोलीं शबाना आजमी, सेहत को लेकर जताई चिंता
  • अभिनेत्री शबाना आजमी की सोनम वांगचुक से भावुक अपील: 'आपकी लड़ाई बेहद जरूरी, लेकिन देश को आपका जीवित रहना पहले जरूरी'
  • Ladakh Protest: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में आईं शबाना आजमी, अनशन समाप्त करने का किया अनुरोध

दिग्गज बॉलीवुड अभिनेत्री और सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहने वाली शबाना आजमी ने लद्दाख के अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अपना उपवास समाप्त करने की एक बेहद भावुक अपील की है। बुधवार को जारी अपने संदेश में अभिनेत्री ने वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लद्दाख और पूरे देश के पर्यावरण की रक्षा के लिए लड़ी जा रही इस ऐतिहासिक लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए सोनम वांगचुक का स्वस्थ रहना और जीवित रहना बेहद आवश्यक है। इस संवेदनशील अपील के बाद अब देश भर के विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्रों में सोनम वांगचुक के आंदोलन और उनकी सेहत को लेकर चर्चाएं एक बार फिर से तेज हो गई हैं।

लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और वहां के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को बचाने की मांग के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। कड़कड़ाती ठंड और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच उनके निरंतर उपवास के कारण उनकी शारीरिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। इसी संदर्भ में हिंदी सिनेमा की वरिष्ठ अभिनेत्री शबाना आजमी ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए वांगचुक से अनुरोध किया है कि वे अपने शरीर को और अधिक कष्ट न दें। शबाना आजमी ने आंदोलन के प्रति अपना पूर्ण नैतिक समर्थन व्यक्त करते हुए वांगचुक के जीवन की रक्षा को सर्वोपरि बताया है।

लद्दाख स्वायत्तता आंदोलन के तहत सोनम वांगचुक और उनके सहयोगियों ने अपनी मांगों को केंद्र सरकार तक पहुंचाने के लिए इस कड़े प्रतिरोध का रास्ता चुना है। कड़ाके की ठंड के बावजूद अनशन स्थल पर सैकड़ों प्रदर्शनकारी एकत्र हो रहे हैं, जिसके कारण यह मुद्दा राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर ध्यान आकर्षित कर रहा है। समय बीतने के साथ डॉक्टरों की टीम ने वांगचुक के ब्लड प्रेशर और ग्लूकोज स्तर में भारी गिरावट दर्ज की है, जिसने देश के बुद्धिजीवियों और नागरिक समाज को चिंतित कर दिया है। इसी गंभीर मोड़ पर शबाना आजमी ने डिजिटल और सामाजिक माध्यमों के जरिए एक सीधा संदेश भेजा, जिसमें उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक सशक्त और दीर्घकालिक आंदोलन के लिए नेतृत्वकर्ता की शारीरिक क्षमता का बने रहना कितना अनिवार्य है।

इस पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए शबाना आजमी ने कहा कि सोनम वांगचुक ने जिस निष्ठा के साथ लद्दाख की आवाज को बुलंद किया है, उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। उनकी मांगें बिल्कुल जायज हैं, लेकिन हम उन्हें खोने का जोखिम नहीं उठा सकते। देश को आने वाले सुनहरे भविष्य के लिए उनके जैसे विजनरी और समर्पित विचारकों की अत्यंत आवश्यकता है। दूसरी तरफ, सोनम वांगचुक के कोर संगठन और स्थानीय लद्दाख रिप्रेजेंटेटिव्स ने शबाना आजमी के इस सहृदय संदेश के प्रति आभार व्यक्त किया है। हालांकि, आंदोलनकारी नेताओं का यह भी कहना है कि जब तक सरकार की ओर से उनकी मुख्य प्रशासनिक मांगों पर कोई ठोस और लिखित आश्वासन नहीं मिल जाता, तब तक उपवास को पूरी तरह समाप्त करना एक कठिन निर्णय होगा।

शबाना आजमी की इस भावुक अपील के बाद मुख्यधारा के मीडिया और बॉलीवुड के अन्य गलियारों में भी इस आंदोलन को लेकर सुगबुगाहट बढ़ गई है। मनोरंजन जगत की कई अन्य हस्तियों ने भी दबी जुबान में पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम का समर्थन करना शुरू कर दिया है। इसके अतिरिक्त, इस बयान ने आम जनता के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या केवल अनशन ही अपनी मांगों को मनवाने का एकमात्र रास्ता बचा है, या फिर इसके बदले वार्ता के अन्य रास्तों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वांगचुक के स्वास्थ्य में आ रही गिरावट से लद्दाख क्षेत्र के स्थानीय नागरिकों में भी संवेदनशीलता और चिंता का माहौल काफी गहरा हो गया है।

आने वाले दिनों में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि क्या शबाना आजमी और देश के अन्य गणमान्य नागरिकों की इस अपील का सोनम वांगचुक के निर्णय पर कोई सीधा सकारात्मक प्रभाव पड़ता है या नहीं। यदि उनका स्वास्थ्य और अधिक नाजुक होता है, तो स्थानीय प्रशासन उन्हें जबरन अस्पताल में भर्ती कराकर ड्रिप चढ़ाने जैसे कदम भी उठा सकता है। सामाजिक संगठनों की ओर से अब केंद्र सरकार पर भी यह दबाव बनाया जा रहा है कि वे आंदोलनकारियों के स्वास्थ्य की गंभीरता को समझते हुए तुरंत एक उच्च स्तरीय मध्यस्थता समिति का गठन करें, ताकि समय रहते बातचीत के जरिए इस गतिरोध को तोड़ा जा सके और वांगचुक का अनशन सम्मानपूर्वक समाप्त कराया जा सके।

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