अमेरिकी झंडा जलाने पर जेल की सजा: डोनाल्ड ट्रंप ने जारी किया कार्यकारी आदेश।
International: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने एक विवादास्पद बयान और कार्यकारी आदेश के जरिए फिर से सुर्खियां बटोरी हैं। ट्रंप ने घोषणा की है
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने एक विवादास्पद बयान और कार्यकारी आदेश के जरिए फिर से सुर्खियां बटोरी हैं। ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिकी झंडा जलाने वालों को जेल की सजा दी जाएगी। इस संबंध में उन्होंने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें 1989 के एक ऐतिहासिक सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया गया है। इस फैसले में कोर्ट ने 5-4 के बहुमत से झंडा जलाने को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत संरक्षित माना था। ट्रंप का यह कदम अमेरिका में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर एक नई बहस छेड़ सकता है।
26 अगस्त 2025 को डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, “अमेरिकी झंडा हमारी राष्ट्रीय पहचान और गर्व का प्रतीक है। इसे जलाना या अपमान करना अस्वीकार्य है। मैंने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जो झंडा जलाने वालों के लिए एक साल की जेल की सजा सुनिश्चित करेगा। हमें अपने देश और इसके प्रतीकों का सम्मान करना होगा।” इस बयान ने अमेरिका में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं। कुछ लोगों ने इसे राष्ट्रीय गौरव की रक्षा के लिए जरूरी कदम बताया, जबकि अन्य ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया।
ट्रंप के कार्यकारी आदेश में 1989 के टेक्सास बनाम जॉनसन मामले का हवाला दिया गया है। इस मामले में ग्रेगरी ली जॉनसन नाम के एक व्यक्ति ने 1984 में डलास में रिपब्लिकन नेशनल कन्वेंशन के दौरान अमेरिकी झंडा जलाया था। टेक्सास राज्य ने जॉनसन पर झंडा अपमान का आरोप लगाया और उन्हें एक साल की जेल और 2,000 डॉलर का जुर्माना सुनाया। हालांकि, जॉनसन ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 1989 में सुप्रीम कोर्ट ने 5-4 के फैसले में कहा कि झंडा जलाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत संरक्षित है और इसे अपराध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने इसे प्रथम संशोधन के तहत संरक्षित राजनीतिक अभिव्यक्ति माना। इस फैसले ने उस समय भी भारी विवाद पैदा किया था।
ट्रंप का ताजा कार्यकारी आदेश इस सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देने की कोशिश करता है। आदेश में कहा गया है कि झंडा जलाना राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति के खिलाफ कार्य है, जिसके लिए कठोर सजा होनी चाहिए। आदेश के अनुसार, झंडा जलाने या उसका अपमान करने वालों को एक साल तक की जेल हो सकती है। हालांकि, यह आदेश तुरंत लागू नहीं हुआ है, क्योंकि इसे कानूनी रूप से लागू करने के लिए कांग्रेस की मंजूरी और संभावित रूप से सुप्रीम कोर्ट की समीक्षा की जरूरत होगी। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश संवैधानिक रूप से टिक नहीं पाएगा, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही झंडा जलाने को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा मान चुका है।
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ट्रंप का यह कदम 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद उनकी दूसरी पारी के शुरुआती दिनों में आया है। माना जा रहा है कि यह आदेश उनके समर्थकों को रिझाने और राष्ट्रीय गौरव के मुद्दे को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। ट्रंप ने अपने अभियान के दौरान बार-बार देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान पर जोर दिया था। उनकी रैलियों में अक्सर समर्थक अमेरिकी झंडे के साथ नजर आते हैं, और ट्रंप इसे अपने समर्थन का प्रतीक मानते हैं।
सीएनएन ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इस कार्यकारी आदेश की घोषणा के बाद कई नागरिक अधिकार संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (ACLU) ने एक बयान में कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने 1989 में स्पष्ट कर दिया था कि झंडा जलाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। ट्रंप का यह आदेश संविधान के खिलाफ है और इसे लागू करना मुश्किल होगा। हम इस आदेश को अदालत में चुनौती देंगे।” ACLU ने यह भी कहा कि यह आदेश उन लोगों को डराने की कोशिश है जो सरकार की नीतियों का विरोध करते हैं।
फॉक्स न्यूज के अनुसार, ट्रंप के समर्थकों ने इस आदेश का स्वागत किया है। कई रिपब्लिकन नेताओं ने कहा कि अमेरिकी झंडा देश की एकता और बलिदान का प्रतीक है, और इसका अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। रिपब्लिकन सीनेटर टेड क्रूज ने ट्रंप के फैसले का समर्थन करते हुए कहा, “हमारा झंडा हमारे सैनिकों, स्वतंत्रता, और गौरव का प्रतीक है। इसे जलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।” हालांकि, कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने इस आदेश पर सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि यह कानूनी चुनौतियों का सामना कर सकता है।
इस मुद्दे ने अमेरिका में एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के बीच तनाव को सामने ला दिया है। 1989 के बाद से कई बार झंडा जलाने को अपराध बनाने के लिए कानून बनाने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इसे रोका। 2005 में, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने झंडा जलाने के खिलाफ एक संशोधन प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन यह सीनेट में पास नहीं हो सका। ट्रंप का नया आदेश भी इसी तरह की कानूनी बाधाओं का सामना कर सकता है।
इस आदेश की घोषणा के बाद कई शहरों में छोटे-मोटे प्रदर्शन देखे गए। न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन डीसी में कुछ कार्यकर्ताओं ने झंडा जलाकर ट्रंप के आदेश का विरोध किया। इन प्रदर्शनों में पुलिस ने हस्तक्षेप नहीं किया, लेकिन कार्यकर्ताओं को चेतावनी दी गई। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा गर्म है, जहां #FlagBurning और #TrumpExecutiveOrder जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। ट्रंप के समर्थक इसे देशभक्ति का कदम बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे तानाशाही की शुरुआत करार दे रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप का यह आदेश तुरंत लागू होने की संभावना कम है। सुप्रीम कोर्ट के 1989 और 1990 (यूनाइटेड स्टेट्स बनाम आइकमैन) के फैसलों ने स्पष्ट किया है कि झंडा जलाना एक संरक्षित अभिव्यक्ति है। अगर यह आदेश लागू होता है, तो इसे अदालत में चुनौती दी जाएगी, और सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा रूढ़िवादी बहुमत के बावजूद इसके रद्द होने की संभावना ज्यादा है।
ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि वह इस मुद्दे को कांग्रेस के सामने लाएंगे और झंडा जलाने के खिलाफ एक नया कानून बनाने की कोशिश करेंगे। उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की कि वे इस मुहिम का समर्थन करें। हालांकि, डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने इस आदेश की आलोचना की है। हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी ने कहा, “यह आदेश संविधान का उल्लंघन है। ट्रंप को यह समझना चाहिए कि अमेरिका में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सबसे महत्वपूर्ण है।”
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