Jio Platforms IPO - अगले 4-5 वर्षों में ₹20 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है मार्केट कैप, देवेन चोकसी का अनुमान
Jio Platforms की लिस्टिंग भारतीय कैपिटल मार्केट के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। देवेन चोकसी के अनुसार 4-5 साल में कंपनी का मार्केट कैप ₹20 लाख करोड़ पहुंच सकता है।

भारतीय दूरसंचार और डिजिटल सेवा क्षेत्र की अग्रणी कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) की संभावित लिस्टिंग को लेकर बाजार में चर्चाएं तेज हो गई हैं। वित्तीय बाजार के प्रमुख विशेषज्ञ और DRChoksey Finserv के प्रबंध निदेशक देवेन चोकसी के अनुसार, अगले चार से पांच वर्षों में जियो प्लेटफॉर्म्स का बाजार पूंजीकरण (Market Capitalisation) दोगुना होकर 20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी के कारोबार में लगातार हो रहा विस्तार, 5G नेटवर्क का तेजी से बढ़ता दायरा और डिजिटल सेवाओं से होने वाली कमाई में उछाल इस मूल्यांकन को हासिल करने में मुख्य भूमिका निभाएंगे। शुद्ध लाभ और परिचालन राजस्व में निरंतर वृद्धि के चलते कंपनी लंबी अवधि में निवेशकों के लिए बड़ा आकर्षण बन सकती है।
भारतीय कैपिटल मार्केट के लिए नए दौर की शुरुआत
देवेन चोकसी का आकलन है कि जियो प्लेटफॉर्म्स की घरेलू शेयर बाजार में लिस्टिंग केवल एक कंपनी का आईपीओ नहीं होगी, बल्कि यह पूरे भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक नए युग की शुरुआत साबित हो सकती है। उनके अनुसार, इतने बड़े आकार और पहुंच वाली डिजिटल-टेक कंपनी के बाजार में आने से वैश्विक संस्थागत निवेशकों (FIIs) और घरेलू बड़े फंडों का ध्यान भारत की ओर और मजबूती से आकर्षित होगा।
इस लिस्टिंग का सकारात्मक प्रभाव अन्य बड़े गैर-सूचीबद्ध कॉर्पोरेट समूहों पर भी पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि जब एक बड़ा घरेलू तकनीकी प्लेटफॉर्म सार्वजनिक बाजार का हिस्सा बनता है, तो इससे अन्य बड़े व्यावसायिक समूहों को भी अपनी सहायक कंपनियों को बाजार में सूचीबद्ध कराने का विश्वास मिलता है, जिससे पूंजी बाजार की तरलता और गहराई में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
मजबूत कारोबारी आधार और डिजिटल इकोसिस्टम का लाभ
जियो प्लेटफॉर्म्स केवल एक पारंपरिक दूरसंचार प्रदाता न रहकर क्लाउड, डिजिटल पेमेंट्स, एंटरप्राइज सॉल्यूशंस, मीडिया और ब्रॉडबैंड सेवाओं का एक व्यापक इकोसिस्टम तैयार कर चुकी है। टेलीकॉम सेक्टर में डेटा खपत की दर लगातार बढ़ रही है और प्रति यूजर औसत राजस्व (ARPU) में भी धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है।
बाजार के जानकारों के मुताबिक, यदि कंपनी आगामी वर्षों में अपनी लाभप्रदता और परिचालन मार्जिन को इसी गति से आगे बढ़ाती है, तो 20 लाख करोड़ रुपये के मूल्यांकन का लक्ष्य यथार्थवादी बन जाता है। इस संभावित आईपीओ से रिलायंस इंडस्ट्रीज के समग्र शेयरधारक मूल्य (Shareholder Value) में भी बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है।
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