Jharkhand Maulana Jarjish Row: 'श्रीकृष्ण भी पढ़ते थे नमाज', इस्लामिक स्कॉलर मौलाना जरजिश अंसारी के बयान पर झारखंड में भारी विरोध

Maulana Jarjish Ansari Controversy: झारखंड में मौलाना जरजिश अंसारी द्वारा भगवान श्रीकृष्ण को लेकर दिए बयान पर विवाद खड़ा हो गया है। विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएं पढ़ें।

Jul 16, 2026 - 14:24
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Jharkhand Maulana Jarjish Row: 'श्रीकृष्ण भी पढ़ते थे नमाज', इस्लामिक स्कॉलर मौलाना जरजिश अंसारी के बयान पर झारखंड में भारी विरोध
Lord Krishna Controversy
  • Maulana Jarjish Ansari Controversy: मौलाना जरजिश अंसारी के श्रीकृष्ण पर दिए बयान से भड़के हिंदू संगठन, गीता के हवाले से किया था बड़ा दावा
  • झारखंड में मौलाना जरजिश अंसारी के बयान पर बढ़ा सियासी पारा, भगवान श्रीकृष्ण और गीता का जिक्र कर किए गए दावे पर हिंदू संगठनों ने जताई कड़ी आपत्ति
  • Religious Controversy: झारखंड में इस्लामिक स्कॉलर मौलाना जरजिश अंसारी के धार्मिक बयान पर विवाद, आस्था के अपमान का आरोप

झारखंड में एक धार्मिक जलसे के दौरान देश के जाने-माने इस्लामिक स्कॉलर मौलाना जरजिश अंसारी द्वारा सनातन धर्म के आराध्य भगवान श्रीकृष्ण को लेकर दिए गए एक बयान पर भारी विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो क्लिप में मौलाना ने सार्वजनिक मंच से यह दावा किया कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण भी दिन में पांच वक्त की नमाज अदा करते थे। अपने इस दावे के पक्ष में उन्होंने हिंदुओं के पवित्र धर्मग्रंथ श्रीमद्भागवत गीता के श्लोकों और संदर्भों का हवाला दिया। यह बयान और वीडियो सामने आने के बाद झारखंड सहित पूरे देश में विभिन्न हिंदू संगठनों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसे करोड़ों सनातनी हिंदुओं की धार्मिक आस्था का खुला अपमान बताया है। आगे की राह में, क्षेत्र में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रहा है ताकि अमन-चैन प्रभावित न हो।

यह पूरा मामला झारखंड के एक जिले में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम (जलसे) से जुड़ा है, जहां मुख्य वक्ता के रूप में पहुंचे मौलाना जरजिश अंसारी ने विभिन्न धर्मों के बीच समानताओं को रेखांकित करने के प्रयास में एक संवेदनशील व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने मंच से बोलते हुए दावा किया कि प्राचीन काल के सभी पूजनीय महापुरुष और ईश्वर के दूत वास्तव में एक ही व्यवस्था का पालन करते थे, जिसे वे नमाज के समकक्ष मानते हैं। इसी क्रम में उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और श्रीमद्भागवत गीता का नाम लेकर अपनी बात को पुष्ट करने का प्रयास किया। जैसे ही इस भाषण का एक विशिष्ट हिस्सा इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित हुआ, सनातन धर्म के अनुयायियों और धार्मिक विमर्श से जुड़े लोगों के बीच इसे लेकर गहरा असंतोष फैल गया।

प्राप्त विवरण के अनुसार यह धार्मिक सभा कुछ दिन पूर्व आयोजित की गई थी, जिसके बाद से इसके वीडियो अंश अलग-अलग डिजिटल माध्यमों पर साझा किए जाने लगे। वीडियो में मौलाना जरजिश अंसारी को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि भागवत गीता के भीतर भी योग, ध्यान और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण की जो विधाएं बताई गई हैं, वे मूल रूप से नमाज की शारीरिक और आत्मिक मुद्राओं जैसी ही हैं। उन्होंने दावा किया कि श्रीकृष्ण स्वयं भी उसी सर्वोच्च सत्ता की आराधना करते थे जिसे वे पांच वक्त की नमाज के रूप में देखते हैं। इस बयान की क्लिप जैसे ही हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों के पास पहुंची, उन्होंने इसे धर्मग्रंथों की मनमानी, भ्रामक और गलत व्याख्या करार दिया। विभिन्न जिलों में हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने एकत्रित होकर इस टिप्पणी के विरोध में स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंपने और कानून व्यवस्था के दायरे में सख्त विधिक कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।

इस पूरे धार्मिक और वैचारिक विवाद पर दोनों पक्षों की ओर से संतुलित और गंभीर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल सहित विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों के स्थानीय प्रवक्ताओं ने संयुक्त रूप से कहा है कि भगवान श्रीकृष्ण सनातन संस्कृति के प्राण हैं और उनके स्वरूप या गीता के उपदेशों को किसी अन्य मजहबी चश्मे से देखना पूरी तरह अनुचित है। यह करोड़ों लोगों की व्यक्तिगत और सामाजिक आस्था को आहत करने का जानबूझकर किया गया प्रयास है, जिसके लिए मौलाना को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

दूसरी तरफ, मौलाना जरजिश अंसारी के समर्थकों और कुछ अन्य इस्लामी विचारकों का तर्क है कि इस बयान का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था, बल्कि वे विभिन्न धर्मों के बीच आध्यात्मिक समानताओं को दर्शाकर आपसी समझ बढ़ाना चाहते थे। उनका कहना है कि वीडियो के एक छोटे हिस्से को संदर्भ से अलग (Out of Context) करके पेश किया जा रहा है जिससे अनावश्यक विवाद उत्पन्न हो रहा है। वहीं, झारखंड पुलिस ने बयान जारी कर सभी समुदायों से शांति बनाए रखने और सोशल मीडिया पर किसी भी भ्रामक या भड़काऊ पोस्ट को साझा न करने की अपील की है।

मौलाना जरजिश अंसारी के इस बयान का सीधा प्रभाव स्थानीय सामाजिक ताने-बाने और इंटरनेट के विमर्श पर साफ देखा जा रहा है। इस घटना के बाद से ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर धार्मिक ग्रंथों की सही और गलत व्याख्याओं को लेकर एक गंभीर शास्त्रार्थ और बहस छिड़ गई है। हिंदू विद्वानों ने गीता के वास्तविक श्लोकों के अर्थ साझा करते हुए मौलाना के दावों को पूरी तरह खारिज किया है। राजनीतिक मोर्चे पर भी विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने इस संवेदनशील मामले में फूंक-फूंक कर कदम रखा है और सभी से सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की है। पुलिस प्रशासन ने एहतियात के तौर पर संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को टाला जा सके।

स्थानीय प्रशासन और साइबर सेल की टीमें सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो के मूल स्रोत (Original Source) और पूरी रिकॉर्डिंग की बारीकी से जांच कर रही हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि बयान जानबूझकर अशांति फैलाने या किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से दिया गया था, तो संबंधित धाराओं के तहत विधिक कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सकती है। धार्मिक गुरुओं और प्रबुद्ध नागरिकों की ओर से यह प्रयास भी किए जा रहे हैं कि शांति समितियों के माध्यम से दोनों समुदायों के बीच संवाद स्थापित रखा जाए ताकि समाज का आपसी भाईचारा और एकता पूरी तरह सुरक्षित रहे।

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