IIT Madras Convocation: आईआईटी मद्रास में मां-बेटे ने एक साथ ली डिग्री, 45 वर्षीय जिगीषा और 21 साल के आदित्य की अनूठी कहानी

IIT Madras Convocation: आईआईटी मद्रास के दीक्षांत समारोह में 45 वर्षीय जिगीषा टेलर और उनके 21 वर्षीय बेटे आदित्य कपाड़िया ने एक साथ डिग्री हासिल कर इतिहास रचा है।

Jul 16, 2026 - 14:19
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IIT Madras Convocation: आईआईटी मद्रास में मां-बेटे ने एक साथ ली डिग्री, 45 वर्षीय जिगीषा और 21 साल के आदित्य की अनूठी कहानी
Mother Son Graduate Together
  • Inspirational IIT Story: बेटे की सलाह पर मां ने शुरू की पढ़ाई, अब दोनों ने एक साथ आईआईटी मद्रास से पूरी की डिग्री
  • आईआईटी मद्रास के दीक्षांत समारोह में जब एक साथ मंच पर पहुंचे मां और बेटे, डिग्री लेते देख खड़े होकर तालियां बजाने लगे लोग
  • IIT Madras: शिक्षा की कोई उम्र नहीं! 45 साल की मां और 21 साल के बेटे ने आईआईटी मद्रास से एक साथ पास की परीक्षा, मिली डिग्री

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के हाल ही में आयोजित दीक्षांत समारोह (कॉन्वोकेशन प्रोग्राम) में एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद सभी प्रोफेसरों, छात्रों और अतिथियों का दिल जीत लिया। चेन्नई स्थित इस प्रतिष्ठित संस्थान के मंच पर जब 45 वर्षीय जिगीषा टेलर अपने 21 वर्षीय बेटे आदित्य कपाड़िया के साथ डिग्री लेने पहुंचीं, तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मां और बेटे की इस जोड़ी ने एक ही संस्थान से एक साथ अपनी उच्च शिक्षा पूरी की है। हालांकि, यह अनोखा सफर पहले से तय नहीं था, बल्कि बेटे की एक छोटी सी सलाह और मां के दृढ़ संकल्प का परिणाम था। आगे की राह में, यह असाधारण उपलब्धि समाज में इस संदेश को मजबूती से प्रसारित कर रही है कि सीखने और खुद को साबित करने की कोई निश्चित उम्र नहीं होती है।

आईआईटी मद्रास का दीक्षांत समारोह हर साल देश के सबसे प्रतिभावान युवाओं को डिग्रियां सौंपने का गवाह बनता है, लेकिन इस साल का आयोजन एक पारिवारिक और शैक्षणिक मिसाल के कारण इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। 45 साल की उम्र में जहां लोग अपने करियर के ठहराव या बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करते हैं, वहीं जिगीषा टेलर ने खुद एक छात्र के रूप में देश के सबसे कठिन संस्थानों में से एक में दाखिला लिया। उन्होंने अपने 21 वर्षीय बेटे आदित्य कपाड़िया के साथ न केवल कठिन पाठ्यक्रमों की पढ़ाई की, बल्कि सफलता पूर्वक परीक्षाएं उत्तीर्ण कर एक ही बैच में स्नातक/पोस्ट ग्रेजुएट की उपाधि हासिल की। यह घटना दर्शाती है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच भी अकादमिक ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है।

जिगीषा टेलर और आदित्य कपाड़िया के आईआईटी मद्रास तक पहुंचने का सफर काफी दिलचस्प और उतार-चढ़ाव भरा रहा है। कुछ साल पहले जब आदित्य ने आईआईटी के विभिन्न आधुनिक और ऑनलाइन/हाइब्रिड डिग्री प्रोग्राम्स की समीक्षा की, तो उन्होंने महसूस किया कि ये पाठ्यक्रम कामकाजी पेशेवरों और घर से पढ़ाई करने के इच्छुक लोगों के लिए बेहतरीन अवसर प्रदान करते हैं। आदित्य ने अपनी मां के भीतर छिपी पढ़ाई की ललक को पहचानते हुए उन्हें खेल-खेल में दाखिला लेने की सलाह दी। शुरुआत में जिगीषा इस बात को लेकर असमंजस में थीं कि क्या वे इस उम्र में और युवाओं के बीच आईआईटी के कठिन असाइनमेंट और परीक्षाओं को संभाल पाएंगी। बेटे के निरंतर प्रोत्साहन और तकनीकी सहायता के बल पर उन्होंने प्रवेश परीक्षा दी और चयनित हो गईं। इसके बाद शुरू हुआ दोनों का सह-अध्ययन का दौर, जहां घर के माहौल में ही दोनों एक-दूसरे के क्लासमेट बन गए। कठिन विषयों पर चर्चा करना, देर रात तक प्रोजेक्ट्स तैयार करना और अंततः एक साथ पास होकर दीक्षांत समारोह के मंच तक पहुंचना इस पूरे घटनाक्रम की सबसे खूबसूरत परिणति रही।

इस अनूठी उपलब्धि पर आईआईटी मद्रास के वरिष्ठ प्राध्यापकों और दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि ने मां-बेटे की जोड़ी की जमकर सराहना की है। संस्थान के प्रशासन का कहना है कि जिगीषा टेलर जैसी छात्राएं हमारे नए शैक्षणिक प्रारूपों की सबसे बड़ी सफलता हैं, जो शिक्षा को हर आयु वर्ग के लिए सुलभ बनाते हैं।

डिग्री प्राप्त करने के बाद भावुक होकर जिगीषा टेलर ने कहा कि अगर मेरा बेटा आदित्य मुझे प्रेरित नहीं करता और शुरुआत में फॉर्म भरने में मदद नहीं करता, तो मैं कभी इस मंच तक नहीं पहुंच पाती। उसने मेरा सहपाठी और मार्गदर्शक दोनों बनकर मेरा साथ दिया। वहीं, बेटे आदित्य ने गर्व से कहा कि मेरे लिए यह दुनिया का सबसे बेहतरीन पल है कि मैं अपनी मां के साथ इस प्रतिष्ठित संस्थान से ग्रेजुएट हो रहा हूं। वे सभी महिलाओं के लिए एक आदर्श हैं।

इस प्रेरक घटना का प्रभाव सोशल मीडिया और भारतीय शिक्षा जगत में व्यापक रूप से देखा जा रहा है। जिगीषा और आदित्य की कहानी वायरल होने के बाद उन तमाम महिलाओं और गृहणियों के भीतर एक नया आत्मविश्वास जागा है जो शादी या बच्चों के बाद अपनी अधूरी पढ़ाई छोड़ चुकी थीं। फिटनेस और करियर की तरह अब 'लाइफलॉन्ग लर्निंग' (जीवन भर सीखते रहने) के विचार को समाज में एक नई मान्यता मिल रही है। रियल-टाइम डेटा और डिजिटल कमेंट्स यह दर्शाते हैं कि लोग इस कहानी को हालिया समय की सबसे सकारात्मक और ऊर्जा से भरपूर न्यूज मान रहे हैं, जो युवाओं को भी अपनी माताओं के सपनों को पूरा करने में सहयोग देने के लिए प्रेरित करती है।

आईआईटी मद्रास से एक साथ डिग्री लेने के बाद अब यह मां-बेटे की जोड़ी अपने-अपने संबंधित क्षेत्रों में करियर को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। जिगीषा टेलर इस तकनीकी ज्ञान का उपयोग नए व्यावसायिक अवसरों या शोध कार्यों में करने की योजना बना रही हैं, जबकि आदित्य कॉर्पोरेट जगत या उच्च शोध में कदम रखेंगे। संस्थान के अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के प्रेरक उदाहरणों को देखते हुए आने वाले सत्रों में विभिन्न आयु वर्ग के कामकाजी पेशेवरों और महिलाओं के आवेदनों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। सरकार के डिजिटल इंडिया और नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के लचीले प्रारूपों के कारण भविष्य में ऐसे कई और सुखद दृश्य भारतीय विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में देखने को मिल सकते हैं।

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