Varanasi Crime News: वाराणसी में सतर्कता अधिष्ठान की बड़ी कार्रवाई, 50 हजार की कथित रिश्वत लेते जीएसटी अधिकारी गिरफ्तार
Varanasi GST Officer Arrested: वाराणसी में सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की टीम ने जीएसटी अधिकारी अंबिका को 50 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है।

- GST Officer Arrested in Varanasi: वाराणसी में जीएसटी रिटर्न के नाम पर मांगी घूस, विजिलेंस टीम ने अधिकारी अंबिका को रंगे हाथ दबोचा
- वाराणसी में विजिलेंस का बड़ा छापा: 50,000 रुपये की कथित घूस लेते हुए जीएसटी अधिकारी गिरफ्तार, उद्योगपति की शिकायत पर एक्शन
- BREAKING: वाराणसी में सतर्कता अधिष्ठान की टीम ने जीएसटी अधिकारी को 50 हजार रुपये की कथित घूस लेते रंगे हाथ पकड़ा
उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी विधिक कार्रवाई सामने आई है। सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की विशेष टीम ने एक सुनियोजित छापेमारी के दौरान वाणिज्य कर विभाग (जीएसटी) के अधिकारी अंबिका को 50 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई स्थानीय उद्योगपति अजय कुमार मौर्य द्वारा दर्ज कराई गई एक आधिकारिक शिकायत के आधार पर गुरुवार 16 जुलाई 2026 को की गई। आरोपी अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने फरवरी 2023 के पुराने जीएसटी रिटर्न से जुड़े एक विभागीय मामले को रफा-दफा करने के एवज में इस अवैध राशि की मांग की थी। गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस विभाग ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी प्रक्रियाओं को अमली जामा पहनाया जा रहा है।
यह पूरा मामला वाराणसी स्थित राज्य कर (जीएसटी) कार्यालय में तैनात एक अधिकारी द्वारा कथित तौर पर अपने पद का दुरुपयोग करने से जुड़ा है। एक प्रतिष्ठित उद्योगपति के व्यावसायिक खातों की समीक्षा के दौरान अधिकारी ने पुराने टैक्स रिटर्न की विसंगतियों को ठीक करने के नाम पर दबाव बनाया था। सतर्कता अधिष्ठान को दी गई शिकायत के अनुसार, जब पीड़ित व्यापारी ने रिश्वत देने से मना किया तो उनके काम को लटकाने और अनावश्यक नोटिस भेजने का सिलसिला शुरू कर दिया गया। इसके बाद पीड़ित ने कानून का सहारा लेने का निर्णय लिया और पूरे मामले की लिखित जानकारी भ्रष्टाचार विरोधी शाखा को सौंप दी, जिसके बाद इस जाल बिछाकर कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
पीड़ित उद्योगपति अजय कुमार मौर्य का एक विनिर्माण प्रतिष्ठान है, जिसके फरवरी 2023 के वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) रिटर्न की जांच का जिम्मा संबंधित अधिकारी के पास था। जांच के नाम पर अधिकारी अंबिका द्वारा लगातार चक्कर लगवाए जा रहे थे और मामले को रफा-दफा करने के लिए 50 हजार रुपये की मांग की जा रही थी। उद्योगपति ने इसकी गोपनीय शिकायत वाराणसी स्थित सतर्कता अधिष्ठान के पुलिस अधीक्षक से की। शिकायत की प्राथमिक सत्यता जांचने के बाद विजिलेंस टीम ने एक विशेष ट्रैप टीम (Trap Team) का गठन किया। योजना के मुताबिक, जैसे ही उद्योगपति ने रासायनिक पाउडर लगे नोटों की गड्डी अधिकारी को सौंपी, पहले से ही सादे कपड़ों में तैनात सतर्कता दल ने धावा बोलकर उन्हें रंगे हाथ दबोच लिया। मौके पर ही अधिकारी के हाथों को धुलाया गया, जिसमें फिनोलफ्थैलिन पाउडर के कारण पानी का रंग गुलाबी हो गया, जो कि रिश्वत के लेनदेन का एक मुख्य वैज्ञानिक साक्ष्य माना जाता है।
इस बड़ी गिरफ्तारी के बाद सतर्कता अधिष्ठान के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत यह विधिक कार्रवाई की गई है। आरोपी के पास से कथित तौर पर बरामद की गई घूस की राशि को सील कर दिया गया है। चूंकि कानून के सिद्धांतों के अनुसार किसी भी आरोपी को अदालत द्वारा दोष सिद्ध होने तक सीधे दोषी नहीं माना जा सकता, इसलिए पुलिस विभाग साक्ष्यों को बेहद मजबूती से संकलित कर रहा है। दूसरी तरफ, स्थानीय व्यापार मंडल और औद्योगिक संघों ने इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा है कि कर विभागों में ईमानदारी से काम करने वाले व्यापारियों का उत्पीड़न बंद होना चाहिए। हालांकि, आरोपी पक्ष की ओर से या उनके विधिक प्रतिनिधियों की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या बयान जारी नहीं किया गया है।
इस कार्रवाई का तात्कालिक प्रभाव वाराणसी के वाणिज्य कर विभाग के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों पर साफ देखा जा रहा है। विभाग के भीतर हड़कंप की स्थिति है और कामकाज को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। स्थानीय व्यापारिक समुदाय के बीच इस घटना से यह सकारात्मक संदेश गया है कि यदि कोई अधिकारी अनुचित मांग करता है, तो कानूनी एजेंसियों की मदद से उसे कानून के दायरे में लाया जा सकता है। इसके साथ ही, यह मामला प्रशासनिक स्तर पर टैक्स असेसमेंट की प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है, जिससे करदाताओं और अधिकारियों के बीच सीधे व्यक्तिगत संपर्क को कम किया जा सके और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो।
गिरफ्तारी के बाद सतर्कता अधिष्ठान की टीम आरोपी अधिकारी को लेकर अपने क्षेत्रीय मुख्यालय आई है, जहां उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इस रैकेट में विभाग के कुछ अन्य कर्मचारी या बिचौलिये भी शामिल थे। कानून के मुताबिक, आरोपी को 24 घंटे के भीतर भ्रष्टाचार निवारण मामलों की विशेष अदालत (Anti-Corruption Court) के समक्ष पेश किया जाएगा, जहां पुलिस उनकी न्यायिक हिरासत की मांग कर सकती है। इसके अलावा, विजिलेंस टीम आरोपी के आवासीय और अन्य ठिकानों की संपत्तियों की भी जांच कर सकती है ताकि आय से अधिक संपत्ति के किसी भी कोण का पता लगाया जा सके।
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