दिल्ली प्रशासन का प्रदूषण के खिलाफ बड़ा प्रहार, पूर्वी दिल्ली के सबोली में छह अवैध फैक्ट्रियां पूरी तरह से सील
छापेमारी की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति को सामान्य बनाए रखने और किसी भी संभावित विरोध या टकराव को रोकने के लिए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था। प्रशासनिक अधिकारियों ने फैक्ट्रियों के भीतर जाकर मशीनों, कच्चे माल और वहां प्रयुक्त
- नियमों को ताक पर रखकर जहरीला धुआं और अपशिष्ट बहाने वाली इकाइयों पर चला संयुक्त प्रशासनिक दस्ता
- बिना अनुमति रिहायशी क्षेत्र में संचालित औद्योगिक गतिविधियों पर तत्काल रोक, पुलिस बल की मौजूदगी में हुई सख्त कार्रवाई
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु और पर्यावरण प्रदूषण के बढ़ते खतरों से निपटने के लिए प्रशासनिक अमले ने एक बार फिर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। इसी कड़ी में पूर्वी दिल्ली के सबोली औद्योगिक और रिहायशी मिश्रित इलाके में एक बड़ा और औचक अभियान चलाया गया। इस विशेष अभियान के तहत पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वाली और बिना किसी वैध अनुमति के संचालित हो रही छह अवैध फैक्ट्रियों को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। अचानक हुई इस बड़ी कार्रवाई से क्षेत्र में गैर-कानूनी रूप से कारखाने चलाने वाले अन्य संचालकों के बीच हड़कंप मच गया है और प्रशासन ने साफ कर दिया है कि पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाली किसी भी गतिविधि को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस बड़े और दंडात्मक अभियान को किसी एक विभाग ने नहीं, बल्कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी), दिल्ली नगर निगम और स्थानीय पुलिस प्रशासन की एक संयुक्त टीम ने मिलकर अंजाम दिया है। इस संयुक्त दस्त ने सबोली क्षेत्र के विभिन्न कोनों में अचानक छापेमारी की, जहाँ लंबे समय से कुछ इकाइयों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों की अनदेखी किए जाने की सूचनाएं मिल रही थीं। सील की गई इन फैक्ट्रियों में निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा था और न ही इनके पास संचालन के लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र उपलब्ध थे, जिसके चलते टीम ने तत्काल प्रभाव से इन परिसरों पर ताले लगा दिए।
स्थानीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सबोली और उसके आसपास के रिहायशी इलाकों में रहने वाले नागरिकों की ओर से लगातार गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय निवासियों का जीना दूभर हो गया था क्योंकि इन फैक्ट्रियों से चौबीसों घंटे निकलने वाला जहरीला धुआं, रासायनिक अपशिष्ट और असहनीय गंध पूरे वातावरण को दूषित कर रही थी। इसके कारण न केवल हवा की गुणवत्ता खराब हो रही थी, बल्कि वहां रहने वाले बुजुर्गों और बच्चों में सांस से जुड़ी बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही थीं। इन्हीं जनशिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की और इस संयुक्त कार्रवाई को अमली जामा पहनाया। राष्ट्रीय राजधानी में गैर-पुष्टि वाले या रिहायशी क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियां संचालित करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। नियमों के मुताबिक, किसी भी निर्माण या विनिर्माण इकाई को चलाने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति से स्थापना की सहमति और संचालन की सहमति लेना अनिवार्य होता है। इसके साथ ही, फैक्ट्रियों में अपशिष्ट प्रबंधन के लिए उचित संयंत्र होने चाहिए ताकि हानिकारक तत्व खुले वातावरण या नालियों में न मिल सकें। इन छह इकाइयों में इनमें से किसी भी नियम का पालन नहीं पाया गया।
छापेमारी की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति को सामान्य बनाए रखने और किसी भी संभावित विरोध या टकराव को रोकने के लिए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था। प्रशासनिक अधिकारियों ने फैक्ट्रियों के भीतर जाकर मशीनों, कच्चे माल और वहां प्रयुक्त होने वाले ईंधन की गहनता से जांच की। जांच के दौरान यह पाया गया कि इन फैक्ट्रियों में प्रतिबंधित रसायनों और भट्टियों का उपयोग किया जा रहा था, जो हवा में पर्टिक्युलेट मैटर यानी पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर को खतरनाक रूप से बढ़ा रहे थे। सभी आवश्यक दस्तावेजों की कमी और नियमों की धज्जियां उड़ते देख अधिकारियों ने फैक्ट्रियों के मुख्य द्वारों को सरकारी सील से बंद कर दिया।
नगर निगम के अधिकारियों ने इस अभियान की सफलता के बाद स्पष्ट किया है कि यह कोई एक दिन की कार्रवाई नहीं है, बल्कि आने वाले दिनों में दिल्ली के अन्य संवेदनशील और हॉटस्पॉट इलाकों में भी इसी तरह के संयुक्त निरीक्षण अभियान चलाए जाएंगे। प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जा रही है, जिसके तहत उल्लंघनकर्ताओं को अब कोई अतिरिक्त समय या नोटिस नहीं दिया जाएगा। अवैध रूप से चल रही ऐसी फैक्ट्रियों के बिजली और पानी के कनेक्शन काटने के लिए भी संबंधित विभागों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं ताकि ये इकाइयां चोरी-छिपे दोबारा अपना काम शुरू न कर सकें।
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