Accidents : रविवार की सुबह रही हादसों से भरी- ग्वालियर, जोधपुर और श्रीनगर में लगातार सड़क हादसों ने मचाई खलबली, 15 से अधिक की मौत

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया। स्थानीय लोगों की मदद से शवों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज

Nov 16, 2025 - 13:47
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Accidents : रविवार की सुबह रही हादसों से भरी- ग्वालियर, जोधपुर और श्रीनगर में लगातार सड़क हादसों ने मचाई खलबली, 15 से अधिक की मौत
फोटो : प्रतीकात्मक; Accidents : रविवार की सुबह रही हादसों से भरी- ग्वालियर, जोधपुर और श्रीनगर में लगातार सड़क हादसों ने मचाई खलबली, 15 से अधिक की मौत

रविवार की सुबह देश के विभिन्न हिस्सों से एक के बाद एक दर्दनाक खबरें सामने आईं। मध्य प्रदेश के ग्वालियर, राजस्थान के जोधपुर और जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर के आसपास के इलाकों में हुए सड़क हादसों ने सुबह के उजाले को काली स्याही से भर दिया। इन हादसों में कुल 15 से अधिक लोगों की जान चली गई, जबकि दर्जनों घायल हो गए। ये घटनाएं न केवल परिवारों को शोक में डुबो रही हैं, बल्कि सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल भी खड़े कर रही हैं। तेज रफ्तार, अंधेरा और वाहनों की खराब स्थिति जैसी वजहों से ये हादसे हुए, जो आमतौर पर सड़कों पर देखे जाते हैं।

सबसे पहले खबर आई मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले से। यहां ग्वालियर-झांसी राजमार्ग पर सुबह करीब छह बजे एक भयानक टक्कर हुई। मालवा कॉलेज के सामने एक फॉर्च्यूनर एसयूवी तेज गति से एक रेत से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली से जा टकराई। हादसा इतना जोरदार था कि एसयूवी का चेसिस बुरी तरह मुड़ गया और अंदर बैठे पांच युवक मौके पर ही दम तोड़ दिए। ये सभी दोस्त थे और ग्वालियर के दीनदयाल नगर इलाके के निवासी थे। मृतकों में क्षितिज उर्फ प्रिंस राजावत, कौशल भदौरिया, आदित्य प्रताप सिंह जादौन, अभिमन्यु सिंह और शिवम राजपुरोहित शामिल हैं। ये युवक शायद किसी घूमने-फिरने के सिलसिले में बाहर निकले थे, लेकिन किस्मत ने उनका साथ छोड़ दिया।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया। स्थानीय लोगों की मदद से शवों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। सिटी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस रॉबिन जैन ने बताया कि हादसा सुबह के धुंधले अंधेरे में हुआ, जिसमें एसयूवी चालक की लापरवाही का हाथ हो सकता है। ट्रैक्टर-ट्रॉली गलत दिशा से सड़क पर आई थी या नहीं, यह सीसीटीवी फुटेज से जांचा जा रहा है। परिवार वाले सदमे में हैं। क्षितिज के पिता ने कहा कि बेटा कल रात ही घर लौटा था और सुबह जल्दी निकल गया। अब पूरा मोहल्ला शोक में डूबा है। यह हादसा ग्वालियर जिले में इस साल का 150वां सड़क हादसा है, जो राज्य में सड़क सुरक्षा अभियान की जरूरत बताता है।

इसी बीच, राजस्थान के जोधपुर जिले से एक और दुखद खबर आई। यहां नेशनल हाईवे-125 पर जोधपुर-बालेशर मार्ग के खारी बेरी गांव के पास सुबह-सुबह एक टैंपो और ट्रेलर ट्रक की जोरदार टक्कर हो गई। टैंपो में सवार श्रद्धालु बालेशर के एक मंदिर की यात्रा पर जा रहे थे। हादसे में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि 14 अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। मरने वालों में तीन महिलाएं शामिल हैं, जो टैंपो में पीछे बैठी थीं। ट्रेलर पर अनाज के बोरे लदे हुए थे, और टक्कर इतनी तेज थी कि टैंपो का अगला हिस्सा चूरन हो गया।

पुलिस स्टेशन बालेशर के एसएचओ भाटी ने बताया कि हादसा सुबह करीब साढ़े पांच बजे हुआ। टैंपो चालक ट्रेलर को बचाने के चक्कर में सड़क से नीचे उतर गया, लेकिन टक्कर टल नहीं सकी। मृतकों के शव बालेशर अस्पताल के मोर्चरी में रखे गए हैं। घायलों को पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर जोधपुर के एमडीएम अस्पताल रेफर कर दिया गया। इनमें से कुछ की हालत नाजुक है। श्रद्धालुओं के परिवार वाले मंदिर की यात्रा के लिए निकले थे, लेकिन अब शोक सभा की तैयारी कर रहे हैं। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि ट्रेलर की तेज रफ्तार और टैंपो का ओवरलोड होना मुख्य कारण था। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जोधपुर जिले में पिछले एक महीने में ऐसे हादसों की संख्या बढ़ी है, जो राजमार्गों पर स्पीड लिमिट के उल्लंघन को दर्शाता है।

जैसे ही ये खबरें फैल रही थीं, जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से भी एक करुण घटना सामने आई। यहां बडगाम जिले के वॉटरवानी इलाके में रिंग रोड पर शनिवार रात करीब नौ बजे एक डंपर और सुजुकी एसयूवी (सुमो) के बीच भयंकर टक्कर हुई। सुमो में सवार एक परिवार किसी समारोह से लौट रहा था, जब डंपर ने पीछे से जोरदार धक्का मार दिया। हादसे में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि छह अन्य घायल हो गए। मरने वालों में एक ही परिवार के दो सदस्य शामिल हैं। ये लोग नजदीकी गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होकर घर लौट रहे थे।

स्थानीय पुलिस के अनुसार, डंपर चालक की लापरवाही से हादसा हुआ। सुमो का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया और अंदर बैठे लोग फंस गए। ग्रामीणों ने चिल्लाकर मदद मांगी, लेकिन पहुंचने में देरी हो गई। घायलों को पहले बडगाम जिला अस्पताल ले जाया गया, फिर श्रीनगर के एसएमएचएस अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से दो की हालत गंभीर है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हादसे पर शोक जताते हुए प्रशासन को घायलों के इलाज के लिए हर संभव मदद के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कारणों की गहन जांच होगी। बडगाम इलाके में रिंग रोड पर वाहनों की बढ़ती संख्या और अंधेरे में खराब लाइटिंग ने हादसों को न्योता दिया है। परिवार के एक सदस्य ने बताया कि मृतक एक बुजुर्ग दंपति के बच्चे थे, जो अब अनाथ हो गए।

ये तीनों हादसे एक ही सुबह हुए, जो संयोग से ज्यादा चिंताजनक लगते हैं। ग्वालियर में दोस्तों का ग्रुप, जोधपुर में धार्मिक यात्रा पर श्रद्धालु और श्रीनगर में परिवार का समारोह से लौटना—सभी की जिंदगियां एक पल में उजड़ गईं। विशेषज्ञों का कहना है कि सुबह के समय दृश्यता कम होने, ठंड से चालकों की सुस्ती और वाहनों की सर्विस न होने से ऐसे हादसे बढ़ते हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर साल करीब डेढ़ लाख सड़क हादसे होते हैं, जिनमें अधिकांश युवा मरते हैं। मध्य प्रदेश में 2025 में अब तक 12 हजार से ज्यादा हादसे हो चुके हैं, जबकि राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में भी संख्या चिंताजनक है।

इन घटनाओं ने फिर से सड़क सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है। पुलिस ने तीनों जगह चालान कैंप लगाने और जागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये कदम काफी हैं? चालक शिक्षा, वाहन जांच और राजमार्गों पर स्पीड कैमरे लगाना जरूरी है। परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा हो चुकी है—ग्वालियर में प्रत्येक को 5 लाख, जोधपुर में 4 लाख और श्रीनगर में सरकारी सहायता। फिर भी, खोई जिंदगियां वापस नहीं आ सकतीं।

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