अपनों की बेरुखी: चाय मांगने पर 65 वर्षीय बीमार डॉक्टर को पत्नी-बेटी ने निकाला, गोरखपुर बस स्टैंड पर लावारिस मिले
कुशीनगर के 65 वर्षीय बीमार होम्योपैथी डॉक्टर को चाय मांगने पर पत्नी और बेटी ने घर से निकाल दिया। गोरखपुर बस स्टैंड पर बेबस मिलने के बाद उन्हें रैन बसेरे में सहारा मिला।

- Gorakhpur News: चाय मांगने पर बुजुर्ग होम्योपैथी डॉक्टर को पत्नी-बेटी ने घर से निकाला, गोरखपुर में मिला सहारा
- Elderly Doctor Expelled By Family: कुशीनगर के बीमार डॉक्टर को परिवार ने धोखे से भेजा गोरखपुर, रैन बसेरा बना सहारा
- गोरखपुर बस स्टैंड पर बेबस मिले 65 वर्षीय बुजुर्ग डॉक्टर, परिवार ने धोखे से बस में बैठाकर घर से निकाला
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद से पारिवारिक रिश्तों को झकझोर देने वाला एक अत्यंत संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां 65 वर्षीय बीमार होम्योपैथी चिकित्सक अजय पांडेय को उनकी पत्नी और बेटी द्वारा घर से बाहर निकाल दिया गया। बताया जा रहा है कि केवल चाय मांगने को लेकर उपजे विवाद के बाद परिजनों ने उन्हें उपचार कराने का झांसा देकर धोखे से गोरखपुर जाने वाली बस में बैठा दिया। गोरखपुर बस स्टैंड पर शारीरिक कमजोरी और बीमारी के कारण लाचार व असहाय स्थिति में मिलने पर स्थानीय नगर निगम की टीम ने उन्हें तत्काल सहारा देकर रैन बसेरा पहुंचाया। जीवन भर मरीजों का उपचार करने वाले इस बुजुर्ग चिकित्सक की बेबसी देखकर स्थानीय लोग स्तब्ध हैं और प्रशासन अब उनके आगे के पुनर्वास व उपचार की व्यवस्था में जुट गया है।
कुशीनगर जिले के रहने वाले 65 वर्षीय होम्योपैथिक चिकित्सक अजय पांडेय वर्षों तक ग्रामीण क्षेत्र में अपनी सेवाएं देने के बाद पिछले करीब एक दशक से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। चलने-फिरने में असमर्थ और शुगर व ब्लड प्रेशर की दवाओं पर निर्भर इस बुजुर्ग डॉक्टर को उनके ही घर में उस वक्त तिरस्कार झेलना पड़ा जब उन्होंने अपनी छोटी बेटी से चाय मांगी थी। इस बात पर हुए विवाद के बाद पत्नी और बेटी ने कथित तौर पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया और इलाज का बहाना बनाकर उन्हें बस में बैठाकर गोरखपुर रवाना कर दिया। गोरखपुर बस स्टैंड पर जब वे कई घंटों तक अकेले और बदहवास स्थिति में बैठे रहे, तब राहगीरों और नगर निगम की सक्रिय टीम की नजर उन पर पड़ी।
पीड़ित चिकित्सक के अनुसार, वे लंबे समय तक कुशीनगर के बैसही बाजार में अपनी क्लीनिक चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते रहे थे। लगभग दस वर्ष पूर्व स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उन्होंने क्लीनिक बंद कर दी और घर पर ही रहने लगे। उनके परिवार में एक बेटा और दो बेटियां हैं, जिनमें से बेटा गुजरात में निजी नौकरी करता है और बड़ी बेटी का विवाह हो चुका है। घर पर वे अपनी पत्नी और छोटी बेटी के साथ रहते थे, जहां बीमारी के चलते उनकी निर्भरता परिवार पर बढ़ गई थी।
विवाद वाले दिन जब उन्होंने चाय की मांग की तो घर में तीखी बहस शुरू हो गई। इसके बाद पत्नी और बेटी ने उन्हें एक झोले में कुछ कपड़े थमाए और कहा कि उन्हें बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल भेजा जा रहा है। इसके बाद उन्हें जबरन बस में बैठा दिया गया। गोरखपुर पहुंचने पर जब कोई उन्हें लेने नहीं आया और उनके पास कोई साधन नहीं बचा, तो वे बस स्टैंड परिसर में ही फफक कर रो पड़े। सूचना मिलते ही नगर निगम के कर्मचारियों ने उन्हें संभाला, प्राथमिक भोजन-पानी उपलब्ध कराया और चरगांवा स्थित रैन बसेरे में सुरक्षित ठहराया।
जिस चिकित्सक ने अपना पूरा जीवन समाज के स्वास्थ्य और परिवार के भविष्य निर्माण के लिए समर्पित कर दिया, वृद्धावस्था और बीमारी के नाजुक मोड़ पर वही बुनियादी देखभाल और अपनी ही दवाओं के लिए दूसरों का मोहताज हो गया।
गोरखपुर के रैन बसेरा प्रबंधन और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस अमानवीय व्यवहार पर गहरा दुख और रोष व्यक्त किया है। रैन बसेरे के कर्मचारियों का कहना है कि बुजुर्ग चिकित्सक मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद कमजोर स्थिति में हैं और बार-बार अपने परिवार के व्यवहार को याद कर भावुक हो रहे हैं।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह मामला 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम' (Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act) के सीधे उल्लंघन का बनता है। यदि बुजुर्ग व्यक्ति औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हैं तो उनके भरण-पोषण और संरक्षण के लिए संबंधित जिला प्रशासन द्वारा विधिक कदम उठाए जा सकते हैं। वहीं, स्थानीय लोगों ने मांग की है कि गुजरात में रह रहे उनके पुत्र और कुशीनगर प्रशासन से संपर्क कर इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप किया जाए।
इस मार्मिक घटना ने समाज में तेजी से क्षीण होते पारिवारिक मूल्यों और वरिष्ठ नागरिकों की सामाजिक सुरक्षा पर फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर उन बुजुर्गों की स्थिति बेहद चिंताजनक पाई जा रही है जो स्वास्थ्य समस्याओं के कारण आर्थिक रूप से परिजनों पर निर्भर हो जाते हैं। स्थानीय स्तर पर इस घटना के सामने आने के बाद कई स्वयंसेवी संस्थाएं और नागरिक समाज के लोग बुजुर्ग डॉक्टर की दवाओं और नियमित देखभाल में मदद के लिए आगे आ रहे हैं।
नगर निगम प्रशासन और स्थानीय कल्याणकारी संस्थाएं बुजुर्ग डॉक्टर के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी कर रही हैं। डॉक्टरों की एक टीम द्वारा उनके स्वास्थ्य की जांच कराई जा रही है ताकि जरूरी दवाएं समय पर मिल सकें। इसके साथ ही प्रशासन कुशीनगर स्थित उनके परिजनों और अन्य रिश्तेदारों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है ताकि उनकी विधिवत काउंसलिंग कराई जा सके या उन्हें किसी सुरक्षित वृद्धाश्रम व पुनर्वास केंद्र में सम्मानपूर्वक रहने की स्थायी व्यवस्था दी जा सके।
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