Mukhtar Ansari Family Kothi Unsealed: कोर्ट के आदेश पर खुली अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत की सील कोठी, जानें पूरा मामला

Lucknow Dali Bagh Kothi: अदालत के निर्देश पर लखनऊ नगर निगम की टीम ने सांसद अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी की डालीबाग स्थित सील कोठी का ताला खोल दिया है।

Sep 2, 2026 - 15:02
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Mukhtar Ansari Family Kothi Unsealed: कोर्ट के आदेश पर खुली अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत की सील कोठी, जानें पूरा मामला
Farhat Ansari Dali Bagh Kothi
  • Farhat Ansari Dali Bagh Property: लखनऊ के डालीबाग में मुख्तार अंसारी परिवार की कोठी की सील खुली, नगर निगम ने की कार्रवाई
  • Lucknow News: कोर्ट के निर्देश पर नगर निगम ने खोली अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत की डालीबाग स्थित सील कोठी
  • कोर्ट के आदेश के बाद खुली सांसद अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी की डालीबाग स्थित सील कोठी

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के वीआईपी इलाके डालीबाग में स्थित माफिया मुख्तार अंसारी की भाभी और गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी की सील कोठी को कोर्ट के निर्देश पर बुधवार, 2 सितंबर 2026 को खोल दिया गया है। लखनऊ नगर निगम की आधिकारिक टीम ने अदालत के आदेश का अनुपालन करते हुए इस कोठी की सील हटाने की कानूनी कार्रवाई पूरी की। 6700 वर्गफीट में फैली इस संपत्ति (प्लाट संख्या 21/14 बी) को गाजीपुर पुलिस ने अक्टूबर 2022 में गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क करते हुए सील किया था। लंबे समय तक चले कानूनी प्रक्रिया और कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब इस संपत्ति से पुलिस और प्रशासन की सील हटा दी गई है।

लखनऊ के डालीबाग स्थित प्लाट संख्या 21/14 बी (क्षेत्रफल 6700 वर्गफीट) में बनी कोठी, जो सांसद अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी के नाम पर दर्ज है, उसे अदालत के स्पष्ट आदेश के बाद लखनऊ नगर निगम की टीम ने अनसील कर दिया है।

यह कोठी गाजीपुर पुलिस द्वारा गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई के तहत सील की गई थी। इसके बाद सुरक्षा और देखरेख की जिम्मेदारी लखनऊ नगर निगम को सौंपी गई थी। अदालत में याचिका दायर होने और न्यायिक सुनवाई पूरी होने के पश्चात आए फैसले के आधार पर नगर निगम अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर चैनल और दरवाजों पर लगी प्रशासनिक सील को हटा दिया।

इस जायदाद पर प्रशासनिक शिकंजा कसने की शुरुआत 28 अक्टूबर 2022 को हुई थी, जब गाजीपुर जिलाधिकारी के आधिकारिक आदेश के बाद गाजीपुर पुलिस टीम ने डालीबाग स्थित इस संपत्ति को कुर्क कर सील कर दिया था। उस समय मौके पर गाजीपुर पुलिस द्वारा जब्ती का आधिकारिक बोर्ड भी लगाया गया था। इसके उपरांत, इस कुर्क की गई अचल संपत्ति की देखरेख और सुरक्षा का जिम्मा लखनऊ नगर निगम को हस्तांतरित कर दिया गया था।

तथापि, सील किए जाने के कुछ समय बाद ही कोठी के मुख्य चैनल गेट का ताला टूटा हुआ पाया गया था। मामला संज्ञान में आते ही नगर निगम प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए वहां नया ताला लगाया और उस पर कपड़े की सील (लॉक) दोबारा लगाई। इस बीच, फरहत अंसारी की ओर से गाजीपुर जिलाधिकारी को एक प्रार्थना पत्र भी प्रेषित किया गया था। इस पत्र में उन्होंने आरोप लगाया था कि अज्ञात अराजक तत्वों ने सील की गई कोठी का ताला तोड़कर अंदर रखा गृह उपयोगी सामान और अन्य कीमती वस्तुएं चुरा ली हैं। उन्हें इस घटना की जानकारी डालीबाग मोहल्ले के स्थानीय निवासियों के माध्यम से मिली थी।

उल्लेखनीय है कि यह पूरी कार्रवाई उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा माफिया और उनके करीबियों की बेनामी संपत्तियों को चिह्नित करने के अभियान के तहत हुई थी। जांच के दौरान गाजीपुर पुलिस को पता चला था कि मुख्तार अंसारी के प्रभाव क्षेत्र से जुड़ी कई बेनामी संपत्तियां डालीबाग में मौजूद हैं। जांच के आधार पर इस कोठी को सील किया गया था, जबकि इसी क्षेत्र में मौजूद अन्य अवैध निर्माणों पर प्रशासन द्वारा बुलडोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया गया था और मुक्त कराई गई जमीनों पर गरीबों के लिए आवास निर्मित किए गए थे।

अदालत के आदेश पर हुई इस अनसीलिंग की कार्रवाई को लेकर फरहत अंसारी के कानूनी प्रतिनिधियों का कहना है कि वे शुरू से ही कानून और न्याय प्रणाली पर विश्वास रखते आए हैं। उनका तर्क था कि संपत्ति के कागजात और स्वामित्व पूरी तरह से नियमानुसार कानूनी हैं और कोर्ट के फैसले से यह बात साबित हुई है।

दूसरी ओर, स्थानीय प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल अदालत के दिशा-निर्देशों का अनुपालन किया है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि नियमानुसार जिन-जिन मामलों में कानूनी औपचारिकताएं पूरी हो जाती हैं या अदालत का स्पष्ट आदेश आता है, वहां प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है।

डालीबाग स्थित इस हाई-प्रोफाइल कोठी की सील खुलने का प्रभाव लखनऊ और पूर्वी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। मुख्तार अंसारी के परिवार से जुड़ी संपत्तियों पर लगातार जारी प्रशासनिक कार्रवाई के बीच कोर्ट के इस आदेश को अंसारी परिवार के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है।

साथ ही, इस घटना से यह संदेश भी गया है कि बेनामी संपत्ति और जब्ती के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की भूमिका सर्वोपरि है। प्रशासन की जब्ती और जब्ती के बाद संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों पर भी अब प्रशासनिक स्तर पर सतर्कता बरतने की आवश्यकता रेखांकित हुई है।

सील खुलने के बाद फरहत अंसारी और उनके प्रतिनिधि अब संपत्ति की कानूनी स्थिति और अंदर मौजूद सामान का आकलन कर सकेंगे। सील टूटने और कथित चोरी के संबंध में पूर्व में दिए गए प्रार्थना पत्र पर पुलिस द्वारा आगे की विधिक जांच की जा सकती है।

इसके अतिरिक्त, डालीबाग और लखनऊ के अन्य हिस्सों में मुख्तार अंसारी या उनके अन्य सहयोगियों से जुड़ी जिन अन्य संपत्तियों पर विधिक मामले लंबित हैं, उन पर भी अदालत के आगामी फैसलों पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी। नगर निगम अब इस मामले की रिपोर्ट संबंधित प्रशासनिक निकायों को सौंपेगा।

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