Nepal Tibet Floods: विनाशकारी बाढ़ के एक हफ्ते बाद नेपाल और तिब्बत में स्वास्थ्यकर्मियों की चुनौती, पहचान और इलाज जारी
Nepal Tibet Floods: नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ के एक हफ्ते बाद स्वास्थ्यकर्मी घायलों के इलाज और मृतकों की पहचान में दिन-रात जुटे हैं। पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट।

- Nepal Flood Medical Relief: बाढ़ के बाद नेपाल-तिब्बत के अस्पतालों में ग्राउंड रिपोर्ट, घायलों के इलाज और पहचान में जुटे डॉक्टर्स
- Nepal Tibet Floods: तबाही के 7 दिन बाद अस्पतालों में कैसा है मंज़र? स्वास्थ्यकर्मियों का अथक प्रयास और मृतकों की पहचान की अनकही कहानी
- नेपाल और तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ के एक हफ्ते बाद स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी चुनौती, अस्पतालों में दिन-रात जुटे डॉक्टर
नेपाल और तिब्बत के हिमालयी क्षेत्रों में आई विनाशकारी बाढ़ को एक हफ्ता बीत चुका है, लेकिन आपदा से हुई तबाही के निशान अब भी गहरे बने हुए हैं। 2 सितंबर 2026 तक प्राप्त सूचनाओं के अनुसार, जहां एक ओर मलबे में दबे लोगों की खोज और राहत-बचाव कार्य जारी है, वहीं दूसरी ओर अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की टीम घायलों के इलाज और मृतकों की शिनाख्त की बेहद संवेदनशील और कठिन प्रक्रिया में जुटी है। आपदा प्रभावित इलाकों के चिकित्सा शिविरों और क्षेत्रीय अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कर्मचारी संसाधन की कमी के बावजूद दिन-रात मोर्चे पर डटे हैं। ऑन-ग्राउंड रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब मुख्य चुनौती संक्रमण को रोकना, मरीजों को आपातकालीन देखभाल देना और परिजनों तक उनके अपनों की पहचान पहुंचाना है।
हिमालयी क्षेत्र नेपाल और उससे सटे तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में भीषण मूसलाधार बारिश और भूस्खलन के कारण आई प्राकृतिक आपदा को सात दिन बीत चुके हैं। बाढ़ के पानी के उतरने के बाद अब भारी तबाही की तस्वीर साफ हो रही है।
जहां बचाव दल दूरस्थ इलाकों तक पहुंच बनाने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं क्षेत्र की स्वास्थ्य प्रणाली इस समय अपने सबसे बड़े दबाव का सामना कर रही है। हज़ारों की संख्या में घायल लोग स्थानीय चिकित्सा केंद्रों और अस्पतालों में पहुंचे हैं। इसके साथ ही, कई ऐसे शव भी लाए जा रहे हैं जिनकी पहचान कर उन्हें उनके परिजनों को सौंपना एक बेहद संवेदनशील और जटिल प्रशासनिक व चिकित्सा कार्य बन गया है।
एक हफ़्ते पहले अचानक आई बाढ़ ने आवासीय क्षेत्रों, पुलों और सड़कों को जलमग्न कर दिया था। बाढ़ के शुरुआती तीन दिनों तक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचने की वजह से आपातकालीन वाहन और एम्बुलेंस प्रभावित इलाकों तक नहीं पहुंच पा रहे थे। जैसे-जैसे मार्ग आंशिक रूप से बहाल हुए, घायलों को निकालने का काम तेज हुआ।
अस्पतालों में स्थिति यह है कि इमरजेंसी वार्ड पूरी तरह से भरे हुए हैं। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीमें बिना सोए लगातार पारियों में काम कर रही हैं। चिकित्सा कर्मियों के सामने केवल घायलों की सर्जरी या प्राथमिक उपचार करने की जिम्मेदारी ही नहीं है, बल्कि वे पानी से फैलने वाली बीमारियों के खतरे को रोकने के लिए भी उपाय कर रहे हैं। इसके साथ ही फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से शवों के फिंगरप्रिंट, डीएनए सैंपल और व्यक्तिगत कपड़ों व वस्तुओं के आधार पर शिनाख्त करने का काम भी तेजी से चल रहा है ताकि बिछड़े हुए परिवारों को सही जानकारी दी जा सके।
स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों और अस्पताल प्रशासकों का कहना है कि बाढ़ के बाद का यह चरण पहले चरण से भी अधिक चुनौतीपूर्ण है। डॉक्टरों के अनुसार, शुरुआत में फ्रैक्चर और गहरी चोटों वाले मरीज अधिक आ रहे थे, लेकिन अब दूषित पानी और जलभराव के कारण पेट से जुड़ी बीमारियों और त्वचा संक्रमण के मरीज बढ़ने लगे हैं।
अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियों और संयुक्त राष्ट्र के स्वास्थ्य निकायों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कहा है कि प्रभावित क्षेत्रों में दवाओं, साफ पानी और स्वच्छता किट की आपूर्ति बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। वहीं, स्थानीय लोगों ने विषम परिस्थितियों में भी दिन-रात सेवा दे रहे स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण और मानवीय प्रयासों की सराहना की है।
इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य व्यवस्था की सीमाओं को उजागर कर दिया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण बड़े क्षेत्रीय अस्पतालों पर अत्यधिक बोझ पड़ गया है।
इसके अलावा, अपनों को खो चुके या लापता परिजनों की खोज में जुटे लोगों के लिए मानसिक आघात (ट्रॉमा) एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि शारीरिक इलाज के साथ-साथ अब बाढ़ पीड़ितों के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रदान करना भी अनिवार्य हो गया है, जिसके लिए विशेष दल गठित किए जा रहे हैं।
आने वाले दिनों में प्राथमिक ध्यान संक्रमण जनित बीमारियों (जैसे हैजा, टाइफाइड और डेंगू) को महामारी का रूप लेने से रोकने पर रहेगा। इसके लिए बाढ़ प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर कीटनाशकों का छिड़काव और स्वच्छ पेयजल आपूर्ति बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
चिकित्सा टीमें दूरदराज के कटे हुए गांवों तक मोबाइल मेडिकल यूनिट्स भेजने की योजना पर काम कर रही हैं। साथ ही, जिन मृतकों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है, उनके नमूनों को सुरक्षित रखकर एक केंद्रीय डेटाबेस तैयार किया जा रहा है ताकि परिजनों को शिनाख्त में कोई तकनीकी बाधा न आए। अंतरराष्ट्रीय सहायता समूहों द्वारा भेजी जा रही चिकित्सा राहत सामग्री के अगले 24 से 48 घंटों में जमीनी स्तर पर वितरित होने की संभावना है।
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