दिल्ली में ब्रांडेड टूथपेस्ट के नाम पर ज़हर बेचने वाली फैक्टरी का पर्दाफाश, क्राइम ब्रांच ने आरोपी मालिक को दबोचा।

देश की राजधानी दिल्ली में नकली और मिलावटी सामान बनाने वाले गिरोहों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी सफलता हासिल की

Apr 4, 2026 - 16:56
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दिल्ली में ब्रांडेड टूथपेस्ट के नाम पर ज़हर बेचने वाली फैक्टरी का पर्दाफाश, क्राइम ब्रांच ने आरोपी मालिक को दबोचा।
दिल्ली में ब्रांडेड टूथपेस्ट के नाम पर ज़हर बेचने वाली फैक्टरी का पर्दाफाश, क्राइम ब्रांच ने आरोपी मालिक को दबोचा।
  • राजधानी के कंझावला इलाके में चल रहा था नकली टूथपेस्ट का बड़ा कारोबार, हजारों की संख्या में 'सेंसोडाइन' के रैपर और ट्यूब बरामद
  • सस्ते पेस्ट को ब्रांडेड पैकिंग में भरकर जनता की सेहत से खिलवाड़, पुलिस रेड में मशीनों और भारी मात्रा में कच्चे माल का जखीरा जब्त

देश की राजधानी दिल्ली में नकली और मिलावटी सामान बनाने वाले गिरोहों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। बाहरी दिल्ली के कंझावला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले महावीर विहार इलाके में चल रही एक अवैध फैक्टरी का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने भारी मात्रा में नकली टूथपेस्ट बरामद किया है। यह फैक्टरी एक किराए के गोदाम में गुपचुप तरीके से संचालित की जा रही थी, जहाँ नामी ब्रांड 'सेंसोडाइन' (Sensodyne) के नाम पर घटिया और असुरक्षित टूथपेस्ट तैयार कर बाजार में खपाया जा रहा था। पुलिस की इस कार्यवाही ने न केवल एक बड़े संगठित अपराध को रोका है, बल्कि आम जनता की सेहत के साथ होने वाले खिलवाड़ पर भी लगाम लगाई है। इस मामले में पुलिस ने फैक्टरी के मालिक को गिरफ्तार कर लिया है, जो लंबे समय से इस गोरखधंधे को अंजाम दे रहा था।

वारदात की जानकारी देते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि क्राइम ब्रांच की टीम को काफी समय से दिल्ली-एनसीआर के बाजारों में नकली टूथपेस्ट की सप्लाई होने की गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं। इन सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने अपना जाल बिछाया और तकनीकी सर्विलांस व मुखबिर तंत्र की मदद से महावीर विहार स्थित उस गोदाम की पहचान की जहाँ यह अवैध काम चल रहा था। गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 की देर रात जब पुलिस टीम ने मौके पर छापेमारी की, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी दंग रह गए। बेहद गंदगी और अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में वहां स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए नीले रंग के पेस्ट को ब्रांडेड ट्यूबों में भरा जा रहा था। पुलिस ने मौके से 58 वर्षीय आरोपी हरिओम मिश्रा को गिरफ्तार किया, जो इस पूरी यूनिट का संचालन कर रहा था।

कैसे होता था नकली टूथपेस्ट का खेल?

पुलिस जांच के दौरान यह पाया गया कि आरोपी हरिओम मिश्रा बाहरी बाजारों से बहुत ही कम कीमत पर खुला और सस्ता पेस्ट खरीदता था। इस पेस्ट को बड़े-बड़े ड्रमों में भरकर रखा जाता था। इसके बाद मशीनों की सहायता से इस घटिया पेस्ट को 'सेंसोडाइन' के मार्क वाली खाली ट्यूबों में भरा जाता था। हीट गन और हीटिंग मशीनों के जरिए ट्यूबों को सील कर उन्हें असली जैसे दिखने वाले डिब्बों में पैक कर दिया जाता था, जिससे आम ग्राहक के लिए असली और नकली में अंतर करना लगभग नामुमकिन हो जाता था।

छापेमारी के दौरान बरामद किए गए सामान की सूची काफी लंबी है, जो इस अवैध कारोबार के व्यापक स्तर को दर्शाती है। पुलिस ने मौके से लगभग 1,800 भरे हुए नकली टूथपेस्ट ट्यूब, 10,000 से अधिक खाली ट्यूब, 1,200 तैयार पैक और करीब 130 किलोग्राम कच्चा पेस्ट बरामद किया है जो ड्रमों में भरा हुआ था। इसके अलावा भारी मात्रा में ब्रांडेड पैकिंग बॉक्स, कैप्स, रैपर, गोंद और पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी भी जब्त की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामद माल की बाजार में कीमत लाखों रुपये है। फैक्टरी में काम करने वाले छह मजदूरों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिन्होंने बताया कि वे केवल मजदूरी के लिए वहां काम कर रहे थे और मालिक के निर्देशों का पालन करते थे।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस तरह के नकली टूथपेस्ट के उपयोग को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। नकली टूथपेस्ट में अक्सर घटिया दर्जे के रसायनों, औद्योगिक रंगों और यहां तक कि हानिकारक लेड (सीसा) का उपयोग किया जा सकता है जो दांतों और मसूड़ों को नुकसान पहुँचाने के साथ-साथ गंभीर बीमारियां भी पैदा कर सकते हैं। चूंकि ये उत्पाद बिना किसी गुणवत्ता नियंत्रण या लैब टेस्टिंग के बनाए जाते हैं, इसलिए इनका उपयोग बच्चों और बुजुर्गों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह नकली माल दिल्ली के किन-किन थोक बाजारों में सप्लाई किया जाता था और इस रैकेट में अन्य कौन-कौन से वितरक शामिल हैं।

गिरफ्तार आरोपी हरिओम मिश्रा रोहिणी का रहने वाला है और वह पिछले कुछ समय से इस किराए के गोदाम में अवैध काम कर रहा था। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह अधिक मुनाफा कमाने के लालच में ब्रांडेड कंपनियों के ट्रेडमार्क का दुरुपयोग कर रहा था। उसके पास न तो इस काम का कोई लाइसेंस था और न ही वह उत्पाद शुल्क या जीएसटी का भुगतान कर रहा था। पुलिस ने उसके खिलाफ कॉपीराइट अधिनियम और धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस की एक टीम अब उन कबाड़ियों और सप्लायरों की भी तलाश कर रही है जो ब्रांडेड कंपनियों की खाली ट्यूब और पैकिंग मटेरियल इस फैक्टरी तक पहुँचाते थे।

दिल्ली में इस तरह की फैक्टरी का मिलना कोई पहली घटना नहीं है; इससे पहले भी उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के इलाकों में नकली ईनो (Eno) और अन्य सौंदर्य प्रसाधन बनाने वाली इकाइयों का भंडाफोड़ हो चुका है। पुलिस का मानना है कि ऐसे अपराधों को रोकने के लिए जनता की जागरूकता भी बेहद जरूरी है। ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे बहुत सस्ते दाम पर मिलने वाले ब्रांडेड उत्पादों को खरीदने से बचें और हमेशा विश्वसनीय दुकानों से ही सामान लें। इसके साथ ही उत्पाद की पैकिंग पर दिए गए सुरक्षा होलोग्राम और स्पेलिंग को भी ध्यान से देखने की आवश्यकता है। क्राइम ब्रांच की इस कार्यवाही के बाद दिल्ली के प्रमुख थोक बाजारों में भी हड़कंप मचा हुआ है और कई संदिग्ध दुकानदार अपनी दुकानों के शटर गिराकर भूमिगत हो गए हैं।

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