IAF Khagantak 243 Glide Bomb Trial: भारतीय वायु सेना ने लंबी दूरी के ग्लाइड बम खगांतक-243 का किया सफल ड्रॉप ट्रायल
IAF Khagantak 243 Trial: भारतीय वायु सेना ने स्वदेशी रूप से विकसित लंबी दूरी के ग्लाइड बम 'खगांतक-243' का सफल ड्रॉप ट्रायल पूरा कर लिया है। जानें पूरी रिपोर्ट।

- Khagantak 243 Long Range Glide Bomb: स्वदेशी ग्लाइड बम खगांतक-243 का सफल परीक्षण, बढ़ी IAF की स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक क्षमता
- दुश्मन के ठिकानों पर सटीक निशाना: भारतीय वायु सेना ने स्वदेशी ग्लाइड बम 'खगांतक-243' का किया सफल ड्रॉप ट्रायल!
- भारतीय वायु सेना की बड़ी कामयाबी: स्वदेशी लंबी दूरी के ग्लाइड बम 'खगांतक-243' का सफल ड्रॉप ट्रायल पूरा
भारतीय वायु सेना (IAF) ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। वायु सेना ने स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किए गए लंबी दूरी के ग्लाइड बम 'खगांतक-243' का सफल ड्रॉप ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। 3 सितंबर 2026 को सामने आई इस उपलब्धि को भारत के स्वदेशी स्टैंड-ऑफ सटीक स्ट्राइक हथियारों (Precision Strike Weapons) के विकास की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस सफल परीक्षण के साथ ही वायु सेना की लंबी दूरी से दुश्मन के ठिकानों पर बिना एयरस्पेस में दाखिल हुए सटीक हमला करने की क्षमता में जबरदस्त इजाफा हुआ है। अब इस हथियार प्रणाली को जल्द ही अंतिम चरण के परीक्षणों के बाद लड़ाकू बेड़े में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
भारतीय वायु सेना ने आत्मनिर्भर भारत और 'मेक इन इंडिया' रक्षा पहल के तहत स्वदेशी तकनीक से निर्मित 'खगांतक-243' (Khagantak-243) नामक लंबी दूरी के ग्लाइड बम का सफल ड्रॉप परीक्षण किया है। यह बम उच्च सटीकता और लंबी दूरी तक मार करने वाले स्टैंड-ऑफ हथियारों की श्रेणी में आता है।
यह परीक्षण वायु सेना के अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान के जरिए अंजाम दिया गया, जिसने हवा में पूर्व-निर्धारित ऊंचाई से बम को रिलीज किया। बम ने अपने निर्धारित मापदंडों का पालन करते हुए सटीक नेविगेशन के साथ लक्ष्य पर निशाना साधा।
सैन्य सूत्रों के अनुसार, 'खगांतक-243' का विकास भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों और अनुसंधान संस्थानों द्वारा घरेलू उद्योग के सहयोग से किया गया है। ड्रॉप ट्रायल के दौरान वायु सेना के परीक्षण पायलटों और रक्षा विशेषज्ञों ने बम के एयरोडायनामिक डिजाइन, विंग डिप्लॉयमेंट (पंखों के खुलने की प्रक्रिया), गाइडेंस सिस्टम और लक्ष्य से टकराने की सटीकता का गहन मूल्यांकन किया।
हवा से गिराए जाने के तुरंत बाद बम के फोल्डेबल पंख सक्रिय हुए, जिससे इसने हवा में तैरते हुए (ग्लाइड करते हुए) लंबी दूरी तय की। इस दौरान उपग्रह नेविगेशन और ऑन-बोर्ड जीपीएस/आईएनएस सिस्टम ने बम को पूरी तरह सही दिशा में बनाए रखा। परीक्षण के दौरान सभी सुरक्षा और तकनीकी मानक खरे पाए गए, जिससे यह साबित हुआ कि यह हथियार प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों और इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप के बीच भी सटीक प्रहार करने में सक्षम है।
इस सफल परीक्षण पर वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि 'खगांतक-243' का सफल ड्रॉप ट्रायल भारतीय वायु सेना की परिचालन तैयारियों को और अधिक मजबूत करता है। रक्षा विशेषज्ञों ने इसे विदेशी हथियारों पर निर्भरता घटाने और भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती तकनीकी परिपक्वता का प्रतीक बताया है।
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि आधुनिक युद्धक्षेत्र में स्टैंड-ऑफ हथियारों का महत्व बहुत अधिक बढ़ गया है। स्वदेशी तकनीक से बने ऐसे ग्लाइड बम की उपलब्धता न केवल खरीद लागत में कटौती करेगी, बल्कि युद्ध की स्थिति में इनकी निर्बाध आपूर्ति भी सुनिश्चित करेगी।
आधुनिक हवाई युद्ध में जेट विमानों को दुश्मन के वायु रक्षा तंत्र (Air Defence Systems) और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (SAMs) के खतरे से बचाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। 'खगांतक-243' जैसे स्टैंड-ऑफ ग्लाइड बम लड़ाकू विमानों को दुश्मन की मिसाइल रेंज से काफी बाहर रहते हुए दूरस्थ बंकरों, रडार स्टेशनों, कमांड सेंटरों और रनवे को नष्ट करने की सुविधा देते हैं।
यह सफलता भारत की सामरिक संप्रभुता को बढ़ावा देने के साथ-साथ भविष्य में ऐसे उन्नत निर्देशित हथियारों के निर्यात की संभावनाओं को भी बल देती है। इससे स्वदेशी रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को नई ऊर्जा मिलेगी।
ड्रॉप ट्रायल के सफल समापन के बाद अब 'खगांतक-243' के विभिन्न परिचालन वातावरणों और अधिक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अंतिम यूजर ट्रायल्स किए जाएंगे। इसके बाद इसे वायु सेना के सुखोई Su-30MKI, राफेल या स्वदेशी तेजस जैसे प्रमुख लड़ाकू विमानों में एकीकृत करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
वायु सेना और रक्षा विकास एजेंसियों का लक्ष्य इस स्वदेशी ग्लाइड बम का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर इसे जल्द से जल्द सैन्य बेड़े का स्थायी हिस्सा बनाना है।
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