Bihar Health Screening Drive: बिहार के 6 करोड़ लोगों की होगी हेल्थ स्क्रीनिंग, ABHA ID से जुड़ेगा रिकॉर्ड; सीएम का बड़ा ऐलान 

Bihar Health Screening: बिहार सरकार ने 'चिकित्सा आपके द्वार' अभियान शुरू किया है। इसके तहत 6 करोड़ लोगों की हेल्थ स्क्रीनिंग होगी और रिकॉर्ड ABHA ID से जुड़ेगा।

Sep 2, 2026 - 15:14
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Bihar Health Screening Drive: बिहार के 6 करोड़ लोगों की होगी हेल्थ स्क्रीनिंग, ABHA ID से जुड़ेगा रिकॉर्ड; सीएम का बड़ा ऐलान 
  • Chikitsa Aapke Dwar Bihar: बिहार में 'चिकित्सा आपके द्वार' अभियान का आगाज, 6 करोड़ नागरिकों का घर-घर होगा हेल्थ चेकअप 
  • Bihar Health News: बिहार में 6 करोड़ लोगों की घर-घर होगी हेल्थ स्क्रीनिंग, एबीएचए आईडी से लिंक होगा पूरा मेडिकल रिकॉर्ड 
  • बिहार में 6 करोड़ नागरिकों का घर-घर होगा हेल्थ चेकअप, 'चिकित्सा आपके द्वार' अभियान का शुभारंभ

बिहार में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने और डिजिटल तकनीक से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक स्वास्थ्य पहल का आगाज किया है। 2 सितंबर 2026 को पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 'जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार' अभियान का शुभारंभ किया। इस महत्त्वाकांक्षी अभियान के माध्यम से राज्य के लगभग 6 करोड़ नागरिकों की उनके घर पर ही विस्तृत हेल्थ स्क्रीनिंग की जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस जांच प्रक्रिया के तहत तैयार होने वाले सभी मेडिकल रिकॉर्ड्स को नागरिकों की आयुष्मान भारत डिजिटल अकाउंट यानी 'आभा आईडी' (ABHA ID) से अनिवार्य रूप से जोड़ा जाएगा। सरकार का लक्ष्य तीन महीने के भीतर दूर-दराज के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य जांच पहुंचाना है। 

बिहार सरकार ने राज्य के नागरिकों के स्वास्थ्य सुधार और गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान के उद्देश्य से व्यापक स्तर पर 'जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार' अभियान का शुभारंभ किया है। इस योजना के तहत राज्य भर के करीब 6 करोड़ लोगों की स्वास्थ्य जांच सीधे उनके घर पर की जाएगी।

इस अभियान की मुख्य विशेषता यह है कि प्रत्येक नागरिक की स्वास्थ्य स्थिति, पुरानी बीमारियों और चल रहे इलाज का संपूर्ण ब्योरा डिजिटल फॉर्मेट में दर्ज होगा। इस पूरे हेल्थ डेटा को केंद्र सरकार के डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत बनने वाली 'एबीएचए (ABHA) आईडी' से लिंक किया जाएगा, जिससे भविष्य में इलाज के दौरान मरीज का मेडिकल इतिहास एक क्लिक पर उपलब्ध हो सके।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राजधानी पटना में आयोजित भव्य कार्यक्रम में इस अभियान से जुड़े जागरूकता और स्वास्थ्य जांच रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह अभियान अगले तीन महीनों तक बिहार के सभी 38 जिलों में चरणबद्ध तरीके से चलाया जाएगा।

अभियान के कार्यान्वयन के लिए ग्राउंड लेवल पर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की विशेष टीमें गठित की गई हैं। एएनएम (ANM) और आशा (ASHA) कार्यकर्ताएं घर-घर जाकर नागरिकों का स्वास्थ्य सर्वे और स्क्रीनिंग करेंगी। विशेष रूप से 30 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिनमें उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन), मधुमेह (डायबिटीज) और विभिन्न प्रकार के कैंसर के शुरुआती लक्षणों की जांच की जाएगी।

यदि स्क्रीनिंग के दौरान किसी नागरिक में गंभीर बीमारी के लक्षण पाए जाते हैं, तो उसे त्वरित रूप से निकटतम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अनुमंडलीय अस्पताल या उच्च स्तरीय मेडिकल कॉलेज में रेफर किया जाएगा। इसके अलावा, 'मिशन कायाकल्प' के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की भी घोषणा की गई है। सभी जिलाधिकारियों (DM) को अपने-अपने जिलों में इस अभियान की नियमित मॉनिटरिंग के कड़े निर्देश दिए गए हैं। 

अभियान की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य के प्रत्येक नागरिक को उसके घर के दरवाजे पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य पहचान पत्र (ABHA ID) के माध्यम से मरीजों को बार-बार पुरानी पर्चियां और जांच रिपोर्ट संभालने की झंझट से मुक्ति मिलेगी।

कार्यक्रम में मौजूद स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कहा कि समय पर बीमारियों की पहचान होने से मरीजों का इलाज आसान हो जाता है और मृत्यु दर में कमी आती है। उन्होंने विश्वास जताया कि आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी से यह अभियान ग्रामीण बिहार में स्वास्थ्य क्रांति लाएगा। वहीं, आम नागरिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने घर-घर जांच और डिजिटल रिकॉर्ड व्यवस्था की इस पहल का स्वागत किया है। 

इस व्यापक स्वास्थ्य अभियान का बिहार की जनस्वास्थ्य प्रणाली पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। 6 करोड़ लोगों के स्वास्थ्य का आंकड़ा तैयार होने से राज्य सरकार को भविष्य के लिए लक्षित स्वास्थ्य नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।

एबीएचए आईडी (ABHA ID) से मेडिकल रिकॉर्ड लिंक होने के कारण मरीजों को किसी भी सरकारी या पंजीकृत निजी अस्पताल में इलाज कराने के दौरान अपना पूरा मेडिकल इतिहास आसानी से साझा करने की सुविधा मिलेगी। इससे अनावश्यक दोबारा होने वाली जांचों का समय और खर्च बचेगा। साथ ही, ग्रामीण इलाकों में गैर-संचारी रोगों (NCDs) जैसे ब्लड प्रेशर और शुगर का शुरुआती स्तर पर ही पता चल जाने से मरीजों को गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकेगा।

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