Nepal Trishuli Hydropower Tunnel Rescue: 9 दिन बाद मिला जिंदगी का संदेश, त्रिशूली 3-ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट सुरंग से सुरक्षित निकाले गए 2 लोग
Nepal Tunnel Rescue: नेपाल के त्रिशूली 3-ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से 9 दिन बाद मैकेनिकल फोरमैन संजय शाह और मैकेनिकल सुपरवाइजर कबीर महर्जन को सुरक्षित निकाला गया।

- Nepal Tunnel Rescue News: नेपाल की त्रिशूली परियोजना की सुरंग में 9 दिनों तक फंसे रहे दो कर्मचारी, रेस्क्यू टीम ने जिंदा निकाला
- 9 दिन, अंधेरी सुरंग और मौत से जंग: नेपाल के त्रिशूली 3-ए प्रोजेक्ट की सुरंग से सुरक्षित निकाले गए दो लोग, जानिए कैसे हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन!
- Nepal Tunnel Rescue: नेपाल के त्रिशूली 3-ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में 9 दिनों से फंसे 2 कर्मचारियों को सुरक्षित निकाला गया
नेपाल के त्रिशूली 3-ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में पिछले 9 दिनों से फंसे दो कर्मचारियों को बचावकर्मियों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के संयुक्त प्रबंधक सुरेश राउत ने इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन और दोनों व्यक्तियों के जीवित बाहर आने की आधिकारिक पुष्टि की है। सुरंग से सबसे पहले सुरक्षित निकाले जाने वाले व्यक्ति परियोजना के मैकेनिकल फोरमैन संजय शाह हैं। वहीं, उनके साथ फंसे मैकेनिकल सुपरवाइजर कबीर महर्जन को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इस कठिन अभियान के सफल होने के बाद दोनों बचाए गए कर्मचारियों को तुरंत चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है, ताकि उनकी स्वास्थ्य स्थिति का पूरी तरह से आकलन किया जा सके।
नेपाल में बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। त्रिशूली 3-ए जलविद्युत परियोजना (Trishuli 3-A Hydropower Project) के निर्माण और रखरखाव से जुड़े सुरंग स्थल पर फंसे दो कर्मचारियों को भारी मशक्कत के बाद जीवित बचा लिया गया है।
सुरंग के भीतर नौ दिनों तक चले इस अप्रत्याशित संकट के बाद बचाए गए कर्मियों में मैकेनिकल फोरमैन संजय शाह और मैकेनिकल सुपरवाइजर कबीर महर्जन शामिल हैं। नेपाल विद्युत प्राधिकरण (NEA) के प्रशासनिक अधिकारियों ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए इसे राहत और बचाव दलों की एक बड़ी उपलब्धि बताया है।
यह हादसा त्रिशूली 3-ए जलविद्युत परियोजना स्थल की सुरंग में काम के दौरान हुआ था, जहां अचानक आए तकनीकी या प्राकृतिक व्यवधान के कारण रास्ता बंद हो गया था। इसके चलते अंदर काम कर रहे मैकेनिकल फोरमैन संजय शाह और मैकेनिकल सुपरवाइजर कबीर महर्जन सुरंग के भीतर ही फंस गए।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, नेपाल पुलिस, सेना और परियोजना के विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से राहत कार्य शुरू किया। सुरंग के अंदर फंसे कर्मचारियों तक ऑक्सीजन और जीवन रक्षक सामग्री पहुंचाने के प्रयास लगातार किए जाते रहे। 9 दिनों तक चले बेहद जटिल और जोखिम भरे ऑपरेशन के बाद बचावकर्मियों को सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने में सफलता मिली। संजय शाह को सबसे पहले बाहर लाया गया, जिसके तुरंत बाद कबीर महर्जन को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
नेपाल विद्युत प्राधिकरण के जॉइंट मैनेजर सुरेश राउत ने आधिकारिक तौर पर जानकारी देते हुए कहा कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद बचाव दल ने हार नहीं मानी और दोनों कर्मचारियों को जीवित बाहर निकाल लिया गया। उन्होंने बचाव टीम के समर्पण की सराहना की।
सुरंग से सुरक्षित बाहर आए कर्मचारियों के परिवारों ने इस खबर के बाद राहत की सांस ली है और ईश्वर के साथ-साथ बचाव दल का आभार व्यक्त किया है। परियोजना स्थल पर मौजूद अन्य कर्मचारियों और इंजीनियरों ने भी इसे एक चमत्कारिक बचाव अभियान करार दिया है।
9 दिनों तक चले इस सफल अभियान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बेहतर तालमेल और आधुनिक आपदा प्रबंधन से कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी जानें बचाई जा सकती हैं। हालांकि, इस घटना ने जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान केंद्रित कर दिया है।
पहाड़ी और संवेदनशील भौगोलिक क्षेत्रों में निर्माणाधीन परियोजनाओं में आपातकालीन निकासी और सुरंग सुरक्षा मानकों की समीक्षा की मांग अब जोर पकड़ सकती है।
सुरंग से निकाले जाने के बाद दोनों कर्मचारियों को तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र और विशेषज्ञ अस्पताल में मेडिकल ऑब्जर्वेशन के लिए भेजा गया है। डॉक्टरों की टीम उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति का परीक्षण कर रही है, क्योंकि नौ दिनों तक अंधेरी सुरंग में बंद रहने के कारण डिहाइड्रेशन और मानसिक तनाव की संभावना बनी रहती है।
इसके साथ ही नेपाल विद्युत प्राधिकरण और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियां इस बात की जांच करेंगी कि सुरंग में यह रुकावट कैसे आई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए।
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