299 रुपये की ड्रेस का लालच पड़ा महंगा, फेसबुक के जरिये मुंबई की नर्स से शॉपिंग के नाम पर एक लाख की धोखाधड़ी
ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर होने वाली यह धोखाधड़ी केवल वित्तीय नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पीड़ित के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डालती है। अस्पताल में दिन-रात मरीजों की सेवा करने वाली नर्स ने अपनी जमापूंजी
- सस्ते ऑनलाइन ऑफर के पीछे छिपा था बड़ा खतरा: मुंबई की नर्स से शॉपिंग के नाम पर एक लाख की धोखाधड़ी
- 299 रुपये की ड्रेस का लालच पड़ा महंगा: फेसबुक विज्ञापन के जरिए साइबर ठगों ने खाली किया महिला का बैंक खाता
- देवनार पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज: ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हुई प्राइवेट अस्पताल की कर्मचारी, ठगों ने चार दिनों में उड़ाए पैसे
मुंबई के देवनार इलाके में साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक निजी अस्पताल में कार्यरत नर्स को डिजिटल जालसाजों ने अपना निशाना बनाया। इस घटना की शुरुआत 16 अप्रैल 2026 को हुई, जब पीड़िता सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर सर्फिंग कर रही थी। इसी दौरान उसकी नजर एक बेहद लुभावने विज्ञापन पर पड़ी, जिसमें मात्र 299 रुपये में आकर्षक ड्रेस मिलने का दावा किया गया था। महंगाई के इस दौर में इतने कम दाम पर कपड़े मिलने की बात सुनकर महिला ने विज्ञापन पर भरोसा कर लिया और खरीदारी करने का मन बनाया। यही वह क्षण था जब वह साइबर ठगों के बुने हुए जाल में फंस गई। देवनार पुलिस के अनुसार, अगले चार दिनों के भीतर पीड़िता के बैंक खाते से किस्तों में कुल 1 लाख रुपये निकाल लिए गए, जिसका उसे भनक तक नहीं लगी। साइबर अपराधियों की कार्यप्रणाली बेहद शातिर और संगठित थी। जब नर्स ने उस विज्ञापन पर क्लिक किया, तो उसे एक बाहरी वेबसाइट पर रीडायरेक्ट कर दिया गया जो बिल्कुल असली ई-कॉमर्स साइट की तरह दिखती थी। वहां ड्रेस बुक करने के बहाने उससे उसकी व्यक्तिगत जानकारी और बैंक विवरण साझा करने को कहा गया। जैसे ही महिला ने भुगतान की प्रक्रिया शुरू की, ठगों ने तकनीकी हेरफेर के जरिए उसके फोन का एक्सेस प्राप्त कर लिया या उसे किसी ऐसे लिंक पर क्लिक करने के लिए मजबूर किया जिससे उसके खाते की सुरक्षा में सेंध लग गई। 16 अप्रैल से लेकर 20 अप्रैल के बीच, जालसाजों ने अलग-अलग ट्रांजैक्शन के माध्यम से उसकी मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर दिया। जब महिला को बैंक से पैसे कटने के मैसेज मिले, तब तक काफी देर हो चुकी थी।
सोशल मीडिया विज्ञापनों से जुड़ी सावधानी
साइबर सुरक्षा के जानकारों का मानना है कि फेसबुक या इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर दिखने वाले हर विज्ञापन पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है। ठग अक्सर लोकप्रिय ब्रांडों के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी वेबसाइट बनाते हैं। हमेशा यूआरएल (URL) की जांच करें और सुनिश्चित करें कि वेबसाइट 'https://' से शुरू हो रही है। बहुत अधिक डिस्काउंट वाले विज्ञापनों से सतर्क रहना ही बचाव का सबसे बड़ा साधन है। पीड़िता ने अपनी आपबीती में बताया कि उसने केवल एक बार मामूली राशि के भुगतान की कोशिश की थी, लेकिन ठगों ने उसके खाते को पूरी तरह खंगाल डाला। देवनार पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। जांच के दौरान यह पाया गया कि ठगों ने पैसे ट्रांसफर करने के लिए कई फर्जी वॉलेट और अलग-अलग राज्यों के बैंक खातों का उपयोग किया है। पुलिस अब उन बैंक खातों के ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और जिस आईपी एड्रेस से धोखाधड़ी की गई है, उसकी तकनीकी जांच कर रही है। मुंबई में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच इस घटना ने कामकाजी महिलाओं और ऑनलाइन खरीदारी करने वाले लोगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर होने वाली यह धोखाधड़ी केवल वित्तीय नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पीड़ित के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डालती है। अस्पताल में दिन-रात मरीजों की सेवा करने वाली नर्स ने अपनी जमापूंजी एक झटके में खो दी, जिससे वह सदमे में है। पुलिस के अनुसार, इस तरह के मामलों में अपराधी अक्सर 'फिशिंग' (Phishing) तकनीक का सहारा लेते हैं। वे ग्राहकों को लुभाने के लिए भारी छूट वाले कूपन या 'एक के साथ एक मुफ्त' जैसे ऑफर्स का इस्तेमाल करते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इन लिंक्स पर क्लिक करता है, उनके मोबाइल फोन में गुप्त रूप से मालवेयर (Malware) इंस्टॉल हो जाता है, जो ओटीपी (OTP) और पासवर्ड जैसी संवेदनशील जानकारी ठगों तक पहुंचा देता है। देवनार पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नागरिकों को सलाह दी है कि वे किसी भी अनजान ऐप या वेबसाइट पर अपने क्रेडिट या डेबिट कार्ड की जानकारी न भरें। खास तौर पर सोशल मीडिया पर आने वाले अनजान विज्ञापनों के मामले में अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। पुलिस ने यह भी बताया कि यदि कोई व्यक्ति इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो उसे तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए। शुरुआती कुछ घंटों के भीतर सूचना देने पर पैसे वापस मिलने की संभावना काफी अधिक रहती है। इस मामले में भी पुलिस ट्रांजैक्शन चेन को ट्रैक करने की कोशिश कर रही है ताकि अपराधियों तक पहुंचा जा सके और फंड को फ्रीज किया जा सके।
मुंबई जैसे महानगरों में साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब पुलिस ने जागरूकता अभियान भी तेज कर दिए हैं। इस घटना ने यह सिद्ध कर दिया है कि ठग अब सीधे बैंक कॉल करने के बजाय विज्ञापनों के जरिए लोगों को अपनी ओर खींच रहे हैं। 299 रुपये की वह ड्रेस कभी पीड़िता तक नहीं पहुंची, लेकिन उसने उसके खाते से एक लाख रुपये जरूर कम कर दिए। पुलिस उन तकनीकी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है जिनसे यह पता चल सके कि यह विज्ञापन किस सर्वर से होस्ट किया गया था। इस तरह के सिंडिकेट अक्सर जामताड़ा या राजस्थान के कुछ इलाकों से संचालित होते हैं, जो भोले-भाले ग्राहकों को अपनी बातों में फंसाकर उनका डिजिटल डेटा चुरा लेते हैं। आने वाले समय में डिजिटल ट्रांजैक्शन की सुरक्षा को लेकर और कड़े नियमों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। देवनार पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे अपनी बैंकिंग डिटेल्स किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें और समय-समय पर अपने ऑनलाइन बैंकिंग पासवर्ड बदलते रहें। नर्स के साथ हुई यह घटना एक चेतावनी है कि इंटरनेट की दुनिया में दिखने वाली हर चमकदार चीज सच नहीं होती। पुलिस अब मामले की तह तक जाने के लिए साइबर सेल की मदद ले रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस रैकेट के मास्टरमाइंड को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
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