Hardoi Snake Bite Case: हरदोई में सांप के डसने से बिगड़ी युवक की हालत, भाई ने थप्पड़ मारकर जगाए रखा; डॉक्टरों ने 15 एंटी-वेनम देकर बचाई जान

हरदोई में जहरीले सांप के डसने से गंभीर 21 वर्षीय अरुण को भाई ने होश में रखा। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने 2 घंटे में 15 एंटी-वेनम इंजेक्शन देकर जान बचाई।

Aug 16, 2026 - 16:04
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Hardoi Snake Bite Case: हरदोई में सांप के डसने से बिगड़ी युवक की हालत, भाई ने थप्पड़ मारकर जगाए रखा; डॉक्टरों ने 15 एंटी-वेनम देकर बचाई जान
  • सांप के जहर से बेहोश हो रहा था भाई, जगाए रखने के लिए जड़े 150 थप्पड़; हरदोई में डॉक्टरों ने 15 एंटी-वेनम देकर बचाई जान
  • हरदोई मेडिकल कॉलेज में अनोखा मामला: जहरीले सांप के डसने के बाद 2 घंटे में लगे 15 एंटी-वेनम इंजेक्शन, भाई की सूझबूझ से बची 21 वर्षीय अरुण की जान
  • Hardoi News: खेत में घास उठाते समय जहरीले सांप ने डसा, मेडिकल कॉलेज में 15 एंटी-वेनम इंजेक्शन देकर बचाई गई युवक की जान

उत्तर प्रदेश के हरदोई जनपद में जहरीले सांप के डसने के बाद मौत के मुहाने पर पहुंचे 21 वर्षीय युवक अरुण को डॉक्टरों की त्वरित चिकित्सीय सूझबूझ और बड़े भाई के समर्पण ने नई जिंदगी दी है। खेत में काम करते समय घास की बोरी उठाते ही अत्यंत विषैले सांप ने अरुण को डस लिया था, जिसके बाद विष का असर तेजी से उसके शरीर में फैलने लगा। गंभीर स्थिति में उसे तत्काल हरदोई मेडिकल कॉलेज लाया गया, जहां डॉक्टरों ने न्यूरोटॉक्सिक असर से मरीज को बेहोश न होने देने की हिदायत दी। भाई ने लगातार थप्पड़ मारकर और आवाजें देकर उसे होश में बनाए रखा, जबकि मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों की टीम ने महज दो घंटे के भीतर 15 एंटी-वेनम इंजेक्शन की सघन खुराक देकर जहर के घातक असर को बेअसर कर दिया।

हरदोई जिले के ग्रामीण इलाके में रहने वाला 21 वर्षीय अरुण शनिवार को अपने कृषि खेत में मवेशियों के चारे के लिए घास की बोरी उठा रहा था। इसी दौरान बोरी के नीचे छिपे एक जहरीले सांप ने अचानक उसके हाथ पर डस लिया। सर्पदंश के कुछ ही मिनटों के भीतर अरुण को तेज चक्कर आने लगे, आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा और उसका शरीर शिथिल पड़ने लगा।

परिजनों ने किसी भी प्रकार के अंधविश्वास या झाड़-फूंक में समय नष्ट करने के बजाय तत्काल विवेक का परिचय दिया। उसका बड़ा भाई आकाश बिना किसी देरी के अरुण को लेकर सीधे हरदोई स्थित स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) के आपातकालीन वार्ड पहुंचा। अस्पताल पहुंचने तक विषैले प्रभाव के कारण मरीज की सांसें उखड़ने लगी थीं और वह कोमा जैसी स्थिति में जाने लगा था।

जान बचाने की जद्दोजहद

इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच में पाया कि सांप का विष न्यूरोटॉक्सिक प्रकृति का था, जो तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क के संकेतों को तेजी से अवरुद्ध कर रहा था। डॉक्टरों ने तुरंत मेडिकल प्रोटोकॉल शुरू किया और साथ ही परिजनों को स्पष्ट निर्देश दिया कि मरीज को किसी भी स्थिति में आंखें बंद नहीं करने देना है और उसे लगातार जगाए रखना अनिवार्य है।

इस नाजुक घड़ी में बड़े भाई आकाश ने अत्यंत धैर्य और तत्परता दिखाई। जब भी अरुण की पलकें झपकतीं और वह बेहोशी की ओर बढ़ता, आकाश उसे लगातार झकझोरता, नाम पुकारता और गालों पर हल्के थप्पड़ मारकर सचेत रखता। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार करीब डेढ़ सौ बार थप्पड़ और आवाज देकर भाई ने उसे सोने नहीं दिया।

दूसरी ओर, मेडिकल टीम ने आपातकालीन स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए 'एंटी-स्नेक वेनम' (ASV) थेरेपी तेजी से शुरू की। जहर की अधिक मात्रा और बिगड़ते वाइटल्स को देखते हुए चिकित्सकों ने लगातार मॉनिटरिंग के बीच दो घंटे के भीतर एक के बाद एक कुल 15 वायल एंटी-वेनम इंजेक्शन ड्रिप और आईवी के माध्यम से चढ़ाए। इस त्वरित और आक्रामक चिकित्सीय हस्तक्षेप के बाद अरुण की नब्ज स्थिर हुई और विष का प्रसार रुक गया।

हरदोई मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सकों का कहना है कि सर्पदंश के मामलों में शुरुआती एक से दो घंटे का समय 'गोल्डन ऑवर' कहलाता है। डॉक्टरों के अनुसार, न्यूरोटॉक्सिक जहर सीधे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है, जिससे फेफड़ों की मांसपेशियां काम करना बंद कर देती हैं। मरीज का होश में रहना और समय पर पर्याप्त मात्रा में एंटी-वेनम मिलना ही उसकी जान बचने का मुख्य कारण बना। उपचार के बाद होश में आए अरुण और उसके परिजनों ने मेडिकल कॉलेज की टीम का आभार व्यक्त किया। भाई आकाश ने कहा कि डॉक्टरों ने जो भी निर्देश दिए, उसने बिना घबराए केवल अपने भाई की जान बचाने के लिए वही किया। स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस बात की सराहना की कि परिवार ने झाड़-फूंक के चक्कर में पड़े बिना अस्पताल का रुख किया।

यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक बड़ा और सकारात्मक संदेश प्रस्तुत करती है। बरसात और सावन के मौसम में खेतों में काम करने वाले किसानों और श्रमिकों में सर्पदंश की घटनाएं अक्सर बढ़ जाती हैं। कई बार ग्रामीण अंधविश्वास के चलते ओझाओं या तांत्रिकों के पास चले जाते हैं, जिससे मरीज को सही समय पर एंटी-वेनम नहीं मिल पाता और अनहोनी हो जाती है। इस मामले ने यह साबित किया है कि वैज्ञानिक सोच, त्वरित निर्णय और आधुनिक चिकित्सा पद्धति से सबसे जहरीले सर्पदंश के शिकार व्यक्ति को भी बचाया जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सफल मामलों का व्यापक प्रचार-प्रसार होना चाहिए ताकि ग्रामीण आबादी में प्राथमिक उपचार और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध मुफ्त एंटी-वेनम के प्रति भरोसा बढ़े।

अरुण की स्थिति अब खतरे से पूरी तरह बाहर है और उसे मेडिकल कॉलेज के आईसीयू/ऑब्जर्वेशन वार्ड से सामान्य वार्ड में शिफ्ट करने की प्रक्रिया चल रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उसके गुर्दे, यकृत और रक्तचाप के मापदंडों की नियमित जांच कर रही है ताकि जहर के किसी भी प्रकार के द्वितीयक प्रभाव को रोका जा सके। स्वास्थ्य विभाग ने इस घटना के बाद जिले के सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC/CHC) में एंटी-वेनम इंजेक्शनों का पर्याप्त बफर स्टॉक बनाए रखने के निर्देश दोहराए हैं। चिकित्सकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में काम करते समय सुरक्षा जूते और दस्ताने पहनें तथा रात के समय टॉर्च का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।

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