Air India Phuket Delhi Flight Turbulence: 250 फीट नीचे क्यों गिरा विमान? जांच में सामने आई 7 सेकंड की तकनीकी खराबी
फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया फ्लाइट में भीषण टर्बुलेंस पर बड़ा खुलासा। जांच में पता चला कि 7 सेकंड के लिए विमान के कंट्रोल सर्फेसेज ने काम बंद कर दिया था।

- एअर इंडिया फ्लाइट टर्बुलेंस मामला: पायलट पर नशे के आरोप के बीच बड़ा खुलासा, प्लेन के कंट्रोल सिस्टम ने बंद किया था काम
- एअर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में 7 सेकंड तक फ्रीज हुआ कंट्रोल सिस्टम, 250 फीट नीचे गिरा विमान; जांच में नया मोड़
- Air India Flight Turbulence: फुकेट-दिल्ली विमान हादसे की जांच में बड़ा खुलासा, 7 सेकंड तक काम नहीं कर रहे थे कंट्रोल सर्फेसेज
थाईलैंड के फुकेट से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली आ रही एअर इंडिया की अंतरराष्ट्रीय उड़ान में हवा के बीच अचानक आए भीषण टर्बुलेंस और विमान के करीब 250 फीट नीचे आ जाने के मामले में बड़ा तकनीकी मोड़ सामने आया है। उड्डयन सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी विस्तृत तकनीकी जांच में यह तथ्य सामने आया है कि उड़ान के दौरान लगभग 7 सेकंड तक विमान के समस्त फ्लाइट कंट्रोल सर्फेसेज ने पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया था। हालांकि शुरुआत में पायलट की मेडिकल जांच में नशीले पदार्थ (गांजा) के अंश मिलने की बातों से मानवीय चूक की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन ब्लैक बॉक्स और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर के ताजा विश्लेषण ने तकनीकी विफलता की ओर भी बड़ा संकेत किया है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय और अंतरराष्ट्रीय जांच दल अब मानवीय एवं तकनीकी दोनों पहलुओं की संयुक्त समीक्षा कर अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में जुटे हैं।
फुकेट अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए उड़ान भरने वाली एअर इंडिया की नियमित सेवा के दौरान मध्य हवा में अचानक अप्रत्याशित और गंभीर टर्बुलेंस की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। यात्रा के दौरान क्रूजिंग अल्टीट्यूड पर विमान एकाएक लगभग 250 फीट नीचे आ गिरा, जिससे केबिन के भीतर बैठे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और कुछ यात्रियों को मामूली झटके भी लगे।
घटना की गंभीरता को देखते हुए विमानन सुरक्षा नियामकों ने तत्काल प्रभाव से उड़ान के तकनीकी मापदंडों और कॉकपिट क्रू की गतिविधियों की व्यापक जांच शुरू की। शुरुआती जांच में पायलट के मेडिकल परीक्षण को लेकर चर्चाएं सामने आईं, लेकिन उड्डयन विशेषज्ञों और तकनीकी जांचकर्ताओं के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि घटना के पीछे महज मानवीय स्थिति नहीं, बल्कि विमान के इलेक्ट्रॉनिक और मैकेनिकल प्रणालियों का एकाएक प्रतिक्रिया देना बंद कर देना भी एक मुख्य कारक था।
फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और एवियोनिक्स लॉग्स से प्राप्त प्राथमिक आंकड़ों के अनुसार, जब विमान अपने सामान्य मार्ग पर था, तभी लगभग 7 सेकंड के लिए उसके मुख्य नियंत्रण तंत्र यानी कंट्रोल सर्फेसेज (एलेरॉन, एलिवेटर और रडर) ने पायलटों के इनपुट और ऑटो-पायलट कमांड्स पर प्रतिक्रिया देना पूरी तरह बंद कर दिया था। हवा में उड़ान भरते समय यह स्थिति किसी भी आधुनिक जेट के लिए अत्यंत दुर्लभ और गंभीर तकनीकी खराबी मानी जाती है।
नियंत्रण सतहों के फ्रीज हो जाने के कारण विमान के पंखों पर वायुगतिकीय संतुलन (एरोडायनामिक लिफ्ट) अचानक प्रभावित हुआ, जिसके परिणामस्वरूप विमान तेजी से 250 फीट नीचे गिर गया। सात सेकंड के इस तकनीकी अंतराल के बाद सिस्टम ने स्वतः रीसेट होकर अथवा मैनुअल बैकअप सक्रिय होने के बाद पुनः काम करना शुरू किया, जिसके बाद कॉकपिट दल ने विमान को स्थिर किया और दिल्ली में सुरक्षित लैंडिंग कराई।
जांच के समानांतर हिस्से में पायलट के स्वास्थ्य और ड्यूटी से पूर्व मेडिकल प्रोटोकॉल की जांच के दौरान संदिग्ध पदार्थ के उपयोग का पहलू भी रिकॉर्ड में आया है। हालांकि जांच दल इस बात का बारीकी से अध्ययन कर रहा है कि क्या 7 सेकंड की यह पूर्ण नियंत्रण विफलता विमान के कंप्यूटर सिस्टम के हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर ग्लिच का परिणाम थी या इसमें किसी मानवीय इनपुट का कोई प्रत्यक्ष योगदान था।
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता। जांच एजेंसी दोनों ही कोणों कॉकपिट क्रू की मेडिकल फिटनेस और एयरक्राफ्ट सिस्टम की विश्वसनीयता की निष्पक्ष जांच कर रही है। एयरलाइन प्रबंधन ने भी स्पष्ट किया है कि वे नियामकों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं और सुरक्षा ऑडिट पूरा होने तक संबंधित प्रक्रियाओं को और सख्त कर दिया गया है।
विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक फ्लाई-बाय-वायर विमानों में कंट्रोल सर्फेसेज का 7 सेकंड तक निष्क्रिय हो जाना एक बेहद गंभीर मसला है। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, यदि नियंत्रण सतहों ने काम करना बंद किया था, तो यह एक विशुद्ध तकनीकी खराबी है और इसे केवल पायलट के व्यवहार से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।
इस घटना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, सॉफ्टवेयर विश्वसनीयता और क्रू मेडिकल स्क्रीनिंग के प्रोटोकॉल को केंद्र में ला दिया है। आधुनिक विमान पूरी तरह डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण प्रणालियों पर निर्भर होते हैं, ऐसे में कुछ सेकंड के लिए भी सिस्टम का रिस्पॉन्स न करना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
विमानन उद्योग में इस घटना के सामने आने के बाद संबंधित विमान मॉडल के सॉफ्टवेयर अपडेट्स और बैकअप हाइड्रोलिक प्रणालियों की भी अतिरिक्त जांच शुरू होने की संभावना है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के पायलटों की रैंडम और सख्त मेडिकल जांच के नियमों को और अधिक कड़ा किए जाने की मांग भी उठ रही है।
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) और डीजीसीए की संयुक्त तकनीकी टीम एयरक्राफ्ट निर्माता कंपनी के एवियोनिक्स इंजीनियरों के साथ मिलकर फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर के हर मिलीसेकंड के डेटा की डिकोडिंग कर रही है। आने वाले दिनों में जांच दल अपनी विस्तृत अंतरिम रिपोर्ट पेश करेगा जिसमें यह साफ किया जाएगा कि 7 सेकंड के लिए कंट्रोल सर्फेसेज क्यों रुके और उस दौरान कॉकपिट के भीतर क्या अलार्म सक्रिय हुए थे।
विमानन नियामक ने संकेत दिया है कि जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर यदि तकनीकी गड़बड़ी की पुष्टि होती है तो बेड़े के अन्य विमानों के लिए विशेष सेवा बुलेटिन जारी किया जाएगा, और यदि क्रू के स्तर पर कोई उल्लंघन पाया गया तो विधिक और नियामक कार्रवाई की जाएगी।
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