कफ सिरप तस्करी मामले में हवाला के जरिए आतंकी फंडिंग की बढ़ी आशंका, खाड़ी देशों और बांग्लादेश से जुड़े लिंक पर जांच तेज।
प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी और वितरण से जुड़े बड़े सिंडिकेट की जांच अब वित्तीय लेन-देन के गहन पहलुओं तक पहुंच
प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी और वितरण से जुड़े बड़े सिंडिकेट की जांच अब वित्तीय लेन-देन के गहन पहलुओं तक पहुंच गई है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस अवैध कारोबार से प्राप्त धन का कुछ हिस्सा हवाला नेटवर्क के माध्यम से विदेशी लिंक्स तक पहुंचाया जा रहा है, जिसमें आतंकी फंडिंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से खाड़ी देशों और बांग्लादेश से जुड़े वित्तीय ट्रेल की पड़ताल की जा रही है, क्योंकि सिंडिकेट की सप्लाई चेन इन क्षेत्रों तक विस्तारित बताई जा रही है।
यह मामला मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ, जहां कोडीन आधारित कफ सिरप की बड़ी मात्रा में अवैध भंडारण, उत्पादन और तस्करी का खुलासा हुआ। सिंडिकेट फर्जी फर्मों और शेल कंपनियों का उपयोग करके कोडीन युक्त सिरप को वैध मेडिकल सप्लाई के रूप में दिखाता था, जबकि वास्तव में इसे नशीले पदार्थ के रूप में दुरुपयोग के लिए विभिन्न राज्यों और सीमापार भेजा जाता था। जांच में सामने आया कि झारखंड और उत्तर प्रदेश की कुछ फर्में सुपर स्टॉकिस्ट के रूप में काम कर रही थीं, जहां से सिरप की खेपें बिहार, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और अन्य क्षेत्रों तक पहुंचाई जाती थीं। एजेंसियों की छापेमारी में कई ठिकानों से संदिग्ध दस्तावेज, बैंक ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और हवाला से जुड़े संभावित एंट्री वाले रिकॉर्ड बरामद हुए हैं। इनमें फर्जी बिलिंग, अंतरराज्यीय ई-वे बिल और नकली फर्मों के माध्यम से धन के आवागमन के सबूत मिले हैं। सिंडिकेट के सदस्यों द्वारा लग्जरी संपत्तियां, महंगी घड़ियां और वाहन खरीदने के मामले भी सामने आए हैं, जो अवैध कमाई को वैध दिखाने की कोशिश इंगित करते हैं। अनुमान है कि इस रैकेट से सैकड़ों करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई, जिसका बड़ा हिस्सा हवाला रूट्स और विदेशी रेमिटेंस के जरिए घुमाया गया।
जांच में यह भी पता चला कि सिंडिकेट का मास्टरमाइंड दुबई भाग गया है, जहां से वह हवाला ट्रांजेक्शंस के माध्यम से नेटवर्क को संचालित कर रहा था। बांग्लादेश सीमा के माध्यम से सिरप की तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही थी, जहां कोडीन युक्त सिरप का दुरुपयोग नशीले पदार्थ के रूप में किया जाता है। नेपाल और अन्य पड़ोसी क्षेत्रों तक भी सप्लाई चेन फैली हुई थी। एजेंसियां अब इन अंतरराष्ट्रीय लिंक्स की गहराई तक जांच कर रही हैं, विशेषकर उन हवाला ऑपरेटर्स की जो खाड़ी देशों से जुड़े हैं। पिछले कुछ महीनों में दर्ज दर्जनों एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू हुई, जिसमें फर्जी मेडिकल एजेंसियों और डमी फर्मों का जाल उजागर हुआ। कई जगहों पर छापों में करोड़ों रुपये की फर्जी बिलिंग और ट्रांसपोर्ट परमिट मिले, जो सिरप की अवैध डायवर्जन को छिपाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे। सिंडिकेट ने नियंत्रित दवाओं को बड़े पैमाने पर प्राप्त कर उन्हें गैर-चिकित्सीय उपयोग के लिए रूट किया। जांच एजेंसियां अब सभी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही हैं, ताकि पूरे फाइनेंशियल फ्लो और हवाला नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
इस मामले में फर्जी दस्तावेजों पर ड्रग लाइसेंस प्राप्त करने, किराए के पते पर नकली मेडिकल स्टोर दिखाने और करोड़ों की खरीद-बिक्री के बावजूद कोई वास्तविक स्टॉक न रखने जैसे तरीके अपनाए गए। कुछ फर्मों ने बंद हो चुकी कंपनियों की सिरप को भी सुपर स्टॉकिस्ट के रूप में दिखाया। एजेंसियों को संदेह है कि अवैध कमाई को बेनामी संपत्तियों और विदेशी खातों में लगाया गया। खाड़ी देशों से जुड़े रेमिटेंस और बांग्लादेश तक की तस्करी चेन को देखते हुए आतंकी फंडिंग के एंगल की भी बारीकी से जांच हो रही है, क्योंकि हवाला अक्सर ऐसे अनौपचारिक चैनलों का हिस्सा होता है। जांच आगे बढ़ने के साथ नए खुलासे होने की संभावना है, विशेषकर उन विदेशी लिंक्स की जो दुबई और अन्य खाड़ी क्षेत्रों से जुड़े हैं। सिंडिकेट की सप्लाई बांग्लादेश तक पहुंचने से सीमापार नेटवर्क की गहराई स्पष्ट हो रही है। एजेंसियां अब डिजिटल और बैंक रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच कर रही हैं, ताकि हवाला ट्रांजेक्शंस के पूरे ट्रेल को ट्रेस किया जा सके। इस मामले ने नियंत्रित दवाओं के दुरुपयोग और अवैध वित्तीय नेटवर्क की गंभीर समस्या को उजागर किया है, जिसमें आतंकी फंडिंग जैसी गंभीर आशंकाएं भी शामिल हैं। जांच जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां तथा संपत्ति जब्ती की कार्रवाई संभव है।
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