MP पुलिस का फर्जी खेल- फर्जी ड्रग्स केस में छात्र को पकड़ा, हाईकोर्ट ने छह पुलिसकर्मियों को किया निलंबित।
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने एक कक्षा 12 के छात्र को बस से जबरदस्ती उतारकर फर्जी

मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने एक कक्षा 12 के छात्र को बस से जबरदस्ती उतारकर फर्जी अफीम तस्करी के मामले में फंसाने का प्रयास किया, जो अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से उजागर हो गया है। यह घटना 29 अगस्त 2025 को घटी, जब 18 वर्षीय छात्र सोहन को एक चलती बस से सादे कपड़ों में वर्दीधारी पुलिसकर्मियों ने खींच लिया। पुलिस ने दावा किया कि छात्र के पास 2.7 किलोग्राम अफीम बरामद हुई, और उसे नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटांसेज एक्ट (एनडीपीएस एक्ट) के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। लेकिन सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल वीडियो में साफ दिखा कि कोई ड्रग्स नहीं थे, बस पुलिसकर्मी छात्र को जबरन ले गए। हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 5 दिसंबर को छात्र को जमानत दे दी, और 9 दिसंबर को मंदसौर के पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया। कोर्ट में एसपी ने स्वीकार किया कि मामला फर्जी था, और छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए गए। यह कार्रवाई मल्हारगढ़ पुलिस स्टेशन की हालिया उपलब्धि को धक्का पहुंचाती है, जो नवंबर 2025 में देश के सर्वश्रेष्ठ पुलिस स्टेशनों में नौवें स्थान पर था। घटना की शुरुआत 29 अगस्त 2025 को हुई, जब सोहन, जो मल्हारगढ़ का निवासी है और कक्षा 12 में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हो चुका था, एक बस में सवार होकर यात्रा कर रहा था। वह पीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहा था, और कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं थी। बस के सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, रात करीब 11:15 बजे तीन सादे कपड़ों वाले व्यक्ति बस में चढ़े और सोहन को जबरन उतार लिया। वीडियो में कोई पीछा, संघर्ष या ड्रग्स का कोई संकेत नहीं दिखा। बस के यात्रियों ने भी मोबाइल पर इस घटना को रिकॉर्ड किया, जिसमें पुलिसकर्मी छात्र को घसीटते हुए ले जाते दिखे। लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में गिरफ्तारी दोपहर 5:15 बजे मल्हारगढ़ के पास दिखाई गई, जहां कथित रूप से 2.71 किलोग्राम अफीम बरामद हुई। अगले दिन, 30 अगस्त को, सोहन को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, और एनडीपीएस एक्ट के तहत जेल भेज दिया गया। परिवार ने तुरंत शिकायत दर्ज की, लेकिन पुलिस ने दावा किया कि गिरफ्तारी वैध थी। जांच में पता चला कि वीडियो में दिखे व्यक्ति मल्हारगढ़ पुलिस स्टेशन के ही कर्मचारी थे, हालांकि प्रारंभिक जांच अधिकारी ने इंकार किया था।
परिवार ने इस अन्याय के खिलाफ 5 दिसंबर 2025 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में याचिका दायर की, जिसमें अवैध अपहरण, गलत गिरफ्तारी और सबूतों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया। याचिका में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए गए, जो पुलिस के दावों से मेल नहीं खाते थे। कोर्ट ने फुटेज देखा, जिसमें बस से उतारने का समय और स्थान पुलिस के रिकॉर्ड से 35 किलोमीटर दूर और छह घंटे बाद का था। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह समन्वित कार्रवाई लगती है, जिसमें पूरा पुलिस स्टेशन शामिल प्रतीत होता है। जस्टिस अभयंकर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मंदसौर एसपी विनोद कुमार मीणा को 9 दिसंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान एसपी ने स्वीकार किया कि छात्र को बस से अवैध रूप से उठाया गया, और मामला कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन था। उन्होंने बताया कि प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं, जैसे एनडीपीएस एक्ट की अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन न करना, और गिरफ्तारी के समय का गलत रिकॉर्ड। कोर्ट में पेशी के दौरान एसपी मीणा ने सूचित किया कि छह पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया है, जिनमें थाना प्रभारी राजेंद्र पंवार, सब-इंस्पेक्टर संजय प्रताप, सब-इंस्पेक्टर साजिद मंसूरी, और कांस्टेबल नरेंद्र सिंह, जितेंद्र सिंह तथा दिलीप जाट शामिल हैं। ये वही अधिकारी हैं, जो वीडियो में छात्र को बस से खींचते दिखे। निलंबन का आदेश विभागीय जांच के साथ जारी किया गया, जिसकी अगुवाई एडिशनल एसपी करेंगे। जांच में अपहरण, फर्जी केस दर्ज करने, और सबूतों के साथ छेड़छाड़ जैसे आरोपों की पड़ताल होगी। कोर्ट ने विभागीय जांच की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, और मामले पर अपना अंतिम फैसला सुरक्षित रख लिया। सोहन को 5 दिसंबर को ही जमानत मिल चुकी थी, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह निर्दोष साबित होने तक निगरानी में रहेगा। वकील हिमांशु ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि छात्र एक उज्ज्वल विद्यार्थी है, और इस घटना से उसकी भविष्य की योजनाएं प्रभावित हुई हैं।
मामले की जांच में कई विसंगतियां सामने आईं। पुलिस ने दावा किया कि छात्र को पीछा करने के बाद गिरफ्तार किया गया, लेकिन कोई गवाह या वाहन रिकॉर्ड नहीं मिला। सीसीटीवी फुटेज से साबित हुआ कि बस रुकने के बाद ही छात्र को उतारा गया, और कोई ड्रग्स का पैकेट नहीं दिखा। पुलिस स्टेशन के अंदर के फुटेज में भी सोहन सफेद शर्ट में दिखा, जो बस वाले वीडियो से मेल खाता है। जांच अधिकारी ने प्रारंभ में कहा कि वीडियो में दिखे व्यक्ति मल्हारगढ़ पुलिस के नहीं हैं, लेकिन एसपी ने कोर्ट में पुष्टि की कि वे स्टेशन के ही कर्मचारी थे। एनडीपीएस एक्ट के तहत बरामदगी की प्रक्रिया में दो गवाहों की उपस्थिति, सर्च मेमो और सैंपलिंग अनिवार्य है, लेकिन इनका पालन नहीं हुआ। कोर्ट ने इन लापरवाहियों पर सवाल उठाए, और कहा कि यह कानून का दुरुपयोग है। विभागीय जांच में यदि दोष सिद्ध होता है, तो निलंबित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है। यह घटना मध्य प्रदेश पुलिस की छवि को धूमिल करती है, खासकर जब मल्हारगढ़ स्टेशन को हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया था। स्टेशन को नवंबर 2025 में डीजीपी द्वारा नौवें सर्वश्रेष्ठ के रूप में मान्यता दी गई थी, लेकिन यह मामला उजागर होने से उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए। सोहन के परिवार ने बताया कि छात्र जेल में चार माह बिताने के बाद मानसिक रूप से प्रभावित हुआ है, और अब वह अपनी पढ़ाई पर फोकस करना चाहता है। कोर्ट ने एसपी को निर्देश दिया कि जांच निष्पक्ष हो, और पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए। वकील ने कोर्ट को छात्र की मार्कशीट भी दिखाई, जो प्रथम श्रेणी की थी। मामला अब विभागीय स्तर पर आगे बढ़ेगा, और हाईकोर्ट की अगली सुनवाई में रिपोर्ट मांगी गई है।
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