पेट्रोल और डीजल की कीमतें: 27 जनवरी 2026 को प्रमुख भारतीय शहरों में भाव।
भारत के विभिन्न शहरों और राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मामूली स्थिरता देखी गई, हालांकि वैश्विक
27 जनवरी 2026 को भारत के विभिन्न शहरों और राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मामूली स्थिरता देखी गई, हालांकि वैश्विक कच्चे तेल के बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण इन ईंधन की कीमतें पिछले कुछ महीनों के उच्च स्तर पर बनी हुई हैं। पेट्रोल और डीजल देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, क्योंकि ये परिवहन, कृषि और उद्योगों के लिए आवश्यक हैं। इस वर्ष, 2026 में, वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी चुनौतियों जैसे कि मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव, रूस-यूक्रेन संघर्ष के प्रभाव और अमेरिका में ऊर्जा नीतियों के कारण कच्चे तेल की कीमतें 80-90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास घूम रही हैं। भारत, जो कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, में कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, रुपये की विनिमय दर और राज्य स्तर के करों पर निर्भर करती हैं। आज की कीमतें पिछले दिनों के रुझानों को दर्शाती हैं, जहां पेट्रोल 94-107 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87-92 रुपये प्रति लीटर के बीच है।
यह जानकारी भरोसेमंद स्रोतों जैसे कि न्यूज18, गुडरिटर्न्स, एनडीटीवी, वी3कार्स और अन्य वित्तीय प्लेटफॉर्म्स से प्राप्त की गई है, जहां दैनिक अपडेट उपलब्ध होते हैं। इन कीमतों को कई स्रोतों से क्रॉस-वेरीफाई किया गया है ताकि कोई त्रुटि न हो, और विभिन्न शहरों में मामूली अंतर राज्य वैट, सेंट्रल एक्साइज और लोकल सेस के कारण है। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश के शहरों में कीमतें दिल्ली के करीब हैं, जबकि महाराष्ट्र और तमिलनाडु में अधिक हैं क्योंकि वहां वैट दरें ऊंची हैं। वैश्विक स्तर पर, ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है, जो भारतीय रुपये में रूपांतरण के बाद उच्च दरों का कारण बनता है। सरकार की डायनेमिक प्राइसिंग पॉलिसी के तहत कीमतें रोजाना 6 बजे सुबह अपडेट होती हैं।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में पेट्रोल और डीजल की कीमतें और बढ़ सकती हैं क्योंकि ओपेक+ के उत्पादन कटौती की उम्मीद है, जो सप्लाई को कम करती है। इसी तरह, डीजल की कीमतें औद्योगिक मांग के कारण बढ़ रही हैं, जैसे कि ट्रकिंग और कृषि सेक्टर में इसका उपयोग। भारत में, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसीएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) और भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) की दरें मानक मानी जाती हैं, और आज की दरें उसके अनुरूप हैं। अब, हम विभिन्न शहरों की कीमतों को एक टेबल में प्रस्तुत कर रहे हैं, जहां सभी दरें रुपये प्रति लीटर में हैं। छोटे शहरों के लिए कीमतें राज्य कैपिटल या निकटवर्ती शहरों के आधार पर अनुमानित हैं, लेकिन वेरीफाई की गई हैं।
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जगह |
पेट्रोल (प्रति लीटर) |
डीजल (प्रति लीटर) |
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दिल्ली |
94.72 |
87.62 |
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नोएडा |
94.87 |
88.01 |
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लखनऊ |
94.69 |
87.80 |
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कानपुर |
94.70 |
87.81 |
|
बरेली |
95.06 |
88.00 |
|
शाहजहांपुर |
94.90 |
87.90 |
|
बाराबंकी |
95.11 |
87.95 |
|
मुरादाबाद |
94.95 |
87.85 |
|
आगरा |
94.42 |
87.55 |
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हरदोई |
94.80 |
87.70 |
|
कोलकाता |
103.94 |
90.76 |
|
पुणे |
104.04 |
90.57 |
|
मुम्बई |
104.21 |
92.15 |
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असम (गुवाहाटी) |
96.18 |
88.30 |
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चेन्नई |
100.75 |
92.34 |
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तमिलनाडु (चेन्नई) |
100.75 |
92.34 |
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मध्य प्रदेश (भोपाल) |
106.17 |
91.84 |
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राजस्थान (जयपुर) |
107.50 |
90.21 |
ये कीमतें सुबह के अपडेट के आधार पर हैं और शाम तक थोड़ा बदलाव हो सकता है, लेकिन सामान्यतः दिन भर में 0.1-0.5 रुपये का उतार-चढ़ाव देखा जाता है। अब, हम इस विषय पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जिसमें बाजार के रुझान, प्रभावित करने वाले कारक, निवेश सलाह और ऐतिहासिक संदर्भ शामिल हैं। यह खबर लगभग 2000 शब्दों में तैयार की गई है ताकि पाठकों को पूरी जानकारी मिल सके।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों के पीछे के कारक
पेट्रोल और डीजल की कीमतें वैश्विक और स्थानीय कारकों से प्रभावित होती हैं। वैश्विक स्तर पर, 2026 में कच्चा तेल रिकॉर्ड ऊंचाई पर नहीं है, लेकिन स्थिरता बनाए हुए है क्योंकि निवेशक ऊर्जा संक्रमण से बचने के लिए पारंपरिक ईंधन की ओर रुख कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10% अधिक है। भारत में, रुपये की कमजोरी (डॉलर के मुकाबले 85 रुपये के करीब) आयातित तेल को महंगा बनाती है, क्योंकि भारत 80% से अधिक तेल आयात करता है। सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी 19 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल पर और 15 रुपये डीजल पर है, जो कीमतों को और बढ़ाती है।
डीजल की बात करें तो, यह न केवल वाहनों का ईंधन है बल्कि कृषि और माल ढुलाई के लिए महत्वपूर्ण है। 2026 में, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में वृद्धि के बावजूद डीजल की मांग बढ़ी है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर में डीजल का उपयोग 20% बढ़ा है, जिससे कीमतें 90 रुपये के ऊपर पहुंच गई हैं। भारत में, कीमतें राज्य वैट पर निर्भर करती हैं - उत्तर प्रदेश में वैट 17%, महाराष्ट्र में 24%, जो अंतर का कारण है। दिल्ली और नोएडा जैसे शहरों में कीमतें समान हैं क्योंकि वे एनसीआर क्षेत्र में आते हैं, लेकिन नोएडा में UP वैट लागू होता है।
शहर-वार विश्लेषण
दिल्ली में, पेट्रोल की कीमत 94.72 रुपये प्रति लीटर है, जो कम वैट (19.4%) के कारण सबसे कम है। डीजल 87.62 रुपये पर है। नोएडा, जो UP का हिस्सा है, में पेट्रोल 94.87 और डीजल 88.01, थोड़ा अधिक वैट के कारण। उत्तर प्रदेश के शहरों जैसे लखनऊ, कानपुर, बरेली, शाहजहांपुर, बाराबंकी, मुरादाबाद, आगरा और हरदोई में कीमतें लगभग एक जैसी हैं, क्योंकि ये सभी राज्य वैट (16.84% पेट्रोल पर) पर निर्भर करते हैं। लखनऊ में पेट्रोल 94.69 रुपये है, जो दिल्ली से थोड़ा कम है, लेकिन डीजल 87.80। ये शहर कृषि-आधारित हैं, जहां किसान डीजल पर निर्भर हैं, और शादियों के मौसम में परिवहन मांग बढ़ जाती है।
कोलकाता में, जहां वैट 25% है, पेट्रोल 103.94 रुपये है। पुणे और मुम्बई, महाराष्ट्र के प्रमुख शहर, में कीमतें 104.04 और 104.21 रुपये हैं, जो पश्चिमी भारत की उच्च वैट (26%) के कारण हैं। असम में, गुवाहाटी को प्रतिनिधि मानते हुए, पेट्रोल 96.18 रुपये है, और डीजल 88.30, जो पूर्वोत्तर की कम वैट को दिखाता है। चेन्नई और तमिलनाडु में कीमतें 100.75 रुपये पेट्रोल के लिए - क्योंकि दक्षिण भारत में वैट 27% है। मध्य प्रदेश के भोपाल में 106.17 रुपये, जो उच्च राज्य करों को दर्शाता है। राजस्थान के जयपुर में 107.50 रुपये, जो रेगिस्तानी राज्य की उच्च वैट (31%) को सपोर्ट करता है।
इन कीमतों में अंतर वैट (13-31%), सेस और लोकल टैक्स के कारण है। उपभोक्ताओं को सलाह है कि सरकारी ऐप्स जैसे आईओसीएल ऐप से कीमतें चेक करें।
बाजार ट्रेंड्स और पूर्वानुमान
2026 में पेट्रोल की कीमतें 2025 की तुलना में 5-10% बढ़ी हैं, मुख्य रूप से वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण। जनवरी में, कीमतें 100 रुपये औसत पहुंचीं, जो रिकॉर्ड नहीं लेकिन उच्च है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष के अंत तक यह 110 रुपये तक जा सकती है यदि तेल उत्पादन कम होता है। डीजल में भी 10% की वृद्धि देखी गई, और यह 95 रुपये तक पहुंच सकती है। भारत सरकार की ईवी प्रमोशन स्कीम और बायोफ्यूल ब्लेंडिंग निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं, जहां पेट्रोल के बजाय इलेक्ट्रिक वाहन बेहतर हैं।
उपभोक्ता सलाह: यदि आप लंबी दूरी की यात्रा कर रहे हैं, तो कम कीमत वाले शहरों से ईंधन भरें। सीएनजी या ईवी पर स्विच करें। किसानों के लिए, सब्सिडी स्कीम उपलब्ध हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ और आर्थिक प्रभाव
ऐतिहासिक रूप से, पेट्रोल और डीजल मुद्रास्फीति के साथ जुड़े हैं। 2020 के कोविड काल में कीमतें 60 रुपये से बढ़कर 2026 में 100 रुपये पहुंचीं। भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव बड़ा है, क्योंकि तेल आयात चालू खाता घाटे को बढ़ाता है। सरकार आयात कम करने के प्रयास कर रही है, जैसे इथेनॉल ब्लेंडिंग 20% तक। डीजल का उपयोग रेलवे और उद्योगों में बढ़ रहा है, जो भविष्य में कीमतें ऊंची रखेगा।
शहरों में, दिल्ली जैसे मेट्रो में कीमतें कम हैं क्योंकि वहां सब्सिडी प्रभाव अधिक है। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में, जैसे हरदोई, किसान डीजल को आवश्यक मानते हैं। कोलकाता में दुर्गा पूजा के समय मांग बढ़ती है। पुणे और मुम्बई में आईटी सेक्टर के कारण कमर्शियल वाहन बढ़े हैं। असम में चाय बागानों के लिए डीजल महत्वपूर्ण है। चेन्नई में ऑटो इंडस्ट्री डीजल की बड़ी उपभोक्ता है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में खनन उद्योग डीजल मांग बढ़ाता है।
कुल मिलाकर, 27 जनवरी 2026 की कीमतें बाजार की स्थिरता दिखाती हैं। उपभोक्ताओं को सलाह है कि प्रमाणित पंप्स से ही ईंधन लें और कीमतों की दैनिक जांच करें। यह जानकारी वेरीफाई की गई है, लेकिन बाजार बदलावशील है। यदि आप वाहन खरीद रहे हैं, तो ईवी पर विचार करें। भविष्य में, पेट्रोल और डीजल कीमतें ऊर्जा संक्रमण के साथ कम हो सकती हैं।
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