"शुभेंदु ने बचाई 5000 टीएमसी कार्यकर्ताओं की जान"- रिजू दत्ता के दावे से राजनीतिक गलियारों में हलचल
निलंबित नेता रिजू दत्ता ने शुभेंदु अधिकारी की जमकर प्रशंसा करते हुए उन्हें वर्तमान समय का सबसे योग्य राजनेता करार दिया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी का कद निश्चित रूप से बड़ा है, लेकिन जिस तरह का राजनीतिक अनुभव और संघर्ष शुभेंदु अधिकारी का रहा है, वह अद्वितीय है। दत्ता ने
- बंगाल की राजनीति में नया मोड़: शुभेंदु अधिकारी के मुरीद हुए तृणमूल के पूर्व प्रवक्ता
- शपथ ग्रहण के साथ ही बदला बंगाल का मिजाज; विरोधी भी कर रहे मुख्यमंत्री के संयम की सराहना
पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल के दिनों में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद से बयानों का दौर थमा नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के मात्र दो दिनों के भीतर, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से हाल ही में निलंबित किए गए नेता रिजू दत्ता ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है। रिजू दत्ता ने सार्वजनिक रूप से दावा किया है कि शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री बनते ही अपनी सूझबूझ और शांति की अपील के माध्यम से तृणमूल कांग्रेस के कम से कम 5000 कार्यकर्ताओं की जान बचाई है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद हिंसा की आशंका प्रबल थी और सत्ता का हस्तांतरण एक बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा था। रिजू दत्ता के इस चौंकाने वाले दावे के पीछे एक बड़ी घटना का जिक्र किया जा रहा है। 6 मई को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के बेहद करीबी और उनके निजी सहायक (PA) की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दत्ता का कहना है कि उस रात बंगाल एक ज्वालामुखी के मुहाने पर खड़ा था। यदि शुभेंदु अधिकारी ने अपने समर्थकों को प्रतिशोध या बदले की कार्रवाई का आह्वान किया होता, तो पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क सकती थी, जिसमें मुख्य रूप से टीएमसी के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जाता। रिजू दत्ता के अनुसार, मुख्यमंत्री ने उस भावुक और तनावपूर्ण घड़ी में भी संयम का परिचय दिया और अपने कार्यकर्ताओं से कानून हाथ में न लेने की पुरजोर अपील की, जिससे एक संभावित नरसंहार टल गया।
सत्ता परिवर्तन और हिंसा का इतिहास
पश्चिम बंगाल का राजनीतिक इतिहास अक्सर चुनावी नतीजों के बाद होने वाली हिंसा से लहूलुहान रहा है। 2021 के विधानसभा चुनाव हों या पंचायत चुनाव, राजनीतिक रंजिश के कारण जान-माल का भारी नुकसान देखा गया है। ऐसे में 2026 के नतीजों के बाद, जब सत्ता की कमान बदली है, तब मुख्यमंत्री द्वारा शांति की अपील करना एक नई राजनीतिक संस्कृति की शुरुआत मानी जा रही है।
निलंबित नेता रिजू दत्ता ने शुभेंदु अधिकारी की जमकर प्रशंसा करते हुए उन्हें वर्तमान समय का सबसे योग्य राजनेता करार दिया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी का कद निश्चित रूप से बड़ा है, लेकिन जिस तरह का राजनीतिक अनुभव और संघर्ष शुभेंदु अधिकारी का रहा है, वह अद्वितीय है। दत्ता ने शुभेंदु के 'करियर ग्राफ' की तुलना करते हुए बताया कि वे सांसद, कैबिनेट मंत्री रहे और अंततः नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराकर अपनी क्षमता सिद्ध की। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए शुभेंदु अधिकारी ही सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं। यह प्रशंसा उस नेता की ओर से आ रही है जो कुछ समय पहले तक तृणमूल कांग्रेस का सबसे मुखर चेहरा माना जाता था और टीवी बहसों में विपक्षी दलों पर कड़े प्रहार करता था। टीएमसी नेतृत्व पर तीखा प्रहार करते हुए रिजू दत्ता ने पार्टी की आंतरिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी को बाहरी परामर्श एजेंसियों के हाथों गिरवी रख दिया गया था, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं और नेतृत्व के बीच की कड़ी टूट गई। दत्ता का मानना है कि पार्टी के भीतर अब लोकतंत्र का अभाव है और जो लोग सच बोलते हैं, उन्हें किनारे लगा दिया जाता है। उन्होंने भ्रष्टाचार के मुद्दों को भी छुआ और कहा कि जनता ने उसी भ्रष्टाचार का जवाब मतदान के माध्यम से दिया है। रिजू दत्ता ने स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी पार्टी की विचारधारा से नहीं, बल्कि उस तानाशाही रवैये से है जिसने बंगाल को विकास की दौड़ में पीछे धकेल दिया।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के कार्यकाल के शुरुआती 48 घंटों में जिस तरह की प्रशासनिक सक्रियता दिखाई दी है, उसे विपक्षी खेमे में भी महसूस किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता के साथ पक्षपात न किया जाए और शांति व्यवस्था भंग करने वालों के खिलाफ कठोरता से निपटा जाए। रिजू दत्ता ने इसी कार्यशैली को आधार बनाते हुए कहा कि एक सच्चा प्रशासक वही होता है जो सत्ता में आने के बाद प्रतिशोध की भावना को त्याग कर जनसेवा को सर्वोपरि रखे। उनके अनुसार, शुभेंदु ने मुख्यमंत्री बनते ही यह साबित कर दिया है कि वे केवल भाजपा के नहीं, बल्कि पूरे बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करने का संकल्प ले चुके हैं। इस पूरे प्रकरण ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी असहज स्थिति पैदा कर दी है। रिजू दत्ता के अलावा कई अन्य नेता भी दबी जुबान में पार्टी की हार और भविष्य की रणनीति पर असंतोष व्यक्त कर रहे हैं। कोलकाता के कुछ वरिष्ठ पार्षद और पूर्व मंत्रियों ने भी हाल के दिनों में नेतृत्व की शैली पर प्रश्नचिह्न लगाए हैं। यह असंतोष उस समय और गहरा गया जब पार्टी ने रिजू दत्ता सहित तीन प्रवक्ताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित कर दिया। पार्टी का कहना है कि ये नेता व्यक्तिगत लाभ के लिए प्रतिद्वंद्वी दल की भाषा बोल रहे हैं, जबकि निलंबित नेताओं का तर्क है कि वे केवल वह सच बोल रहे हैं जिसे पार्टी नेतृत्व सुनने को तैयार नहीं है।
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