सपा विधायक पूजा पाल ने कहा- मुझे सही बोलने की सजा दी गई, मैं उन पीड़ित महिलाओं की आवाज हूं, सीएम योगी को धन्यवाद कहा।
Political:समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कौशांबी जिले की चायल सीट से विधायक...
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कौशांबी जिले की चायल सीट से विधायक पूजा पाल को पार्टी से निष्कासित कर दिया। यह कार्रवाई तब हुई, जब पूजा पाल ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में 'विजन डॉक्यूमेंट 2047' पर 24 घंटे की चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ की। पूजा ने कहा था कि उनके पति, बसपा के पूर्व विधायक राजू पाल की हत्या के बाद योगी सरकार ने उन्हें न्याय दिलाया। इस बयान को सपा ने पार्टी विरोधी गतिविधि और अनुशासनहीनता मानते हुए तत्काल निष्कासन का फैसला लिया। पूजा पाल ने इस कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि वह पीड़ित महिलाओं की आवाज हैं और सही को सही कहना उनकी जिम्मेदारी है।
- पूजा पाल का बयान और विवाद की शुरुआत
उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में 13-14 अगस्त 2025 को 'विजन डॉक्यूमेंट 2047' पर चर्चा हुई। इस दौरान चायल से सपा विधायक पूजा पाल ने अपने भाषण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपराध के खिलाफ 'शून्य सहिष्णुता' नीति की सराहना की। उन्होंने कहा, "सब जानते हैं कि मेरे पति की हत्या कैसे और किसने की। मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद देती हूं, जिन्होंने मुझे न्याय दिलाया और मेरी बात तब सुनी जब किसी ने नहीं सुनी। उनकी नीतियों ने अतीक अहमद जैसे अपराधियों को मिट्टी में मिलाया। पूरा प्रदेश आज उन पर भरोसा करता है।"
पूजा का यह बयान उनके निजी दर्द से जुड़ा था। उनके पति राजू पाल, जो बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक थे, की 25 जनवरी 2005 को प्रयागराज में गैंगस्टर से राजनेता बने अतीक अहमद के गुर्गों द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पूजा ने कहा, "जब मैं अतीक जैसे अपराधियों के खिलाफ लड़ रही थी और थकने लगी थी, तब योगी जी ने मुझे और कई अन्य महिलाओं को न्याय दिलाया।" इस बयान ने सपा नेतृत्व को असहज कर दिया, क्योंकि पार्टी लंबे समय से योगी सरकार की कानून-व्यवस्था नीतियों की आलोचना करती रही है।
- सपा का निष्कासन आदेश
पूजा पाल के बयान के कुछ घंटों बाद ही, 14 अगस्त 2025 को अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी से निष्कासित करने का आदेश जारी किया। सपा द्वारा जारी पत्र में कहा गया, "आपके द्वारा पार्टी विरोधी गतिविधियां की गईं। आपको सचेत करने के बाद भी आपने ऐसी गतिविधियां बंद नहीं कीं, जिससे पार्टी को काफी नुकसान हुआ। यह गंभीर अनुशासनहीनता है। अतः आपको समाजवादी पार्टी से तत्काल प्रभाव से निष्कासित किया जाता है। आपको पार्टी के सभी पदों से हटाया जाता है, और आप अब किसी भी पार्टी कार्यक्रम या बैठक में शामिल नहीं होंगी, न ही आपको आमंत्रित किया जाएगा।"
यह कार्रवाई सपा की कठोर अनुशासन नीति को दर्शाती है, लेकिन इसने पार्टी के भीतर असहमति को दबाने की मानसिकता पर भी सवाल उठाए। सपा ने अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ की अप्रैल 2023 में हुई हत्या को 'कानून के शासन का अंत' बताकर योगी सरकार की आलोचना की थी। पूजा का बयान इस नैरेटिव के खिलाफ था, जिसे पार्टी ने बर्दाश्त नहीं किया।
- पूजा पाल की प्रतिक्रिया
निष्कासन के बाद पूजा पाल ने लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "मैं विधानसभा में बैठी थी। मैंने मुख्यमंत्री की तारीफ की, और उसी दौरान मुझे निष्कासन पत्र थमा दिया गया। यह स्पष्ट है कि मुझे सही बोलने की सजा दी गई है। मैं उन गरीब और बेसहारा मां-बहनों की आवाज हूं, जिन्होंने मुझे विधायक बनाया। मैंने सिर्फ वही कहा जो सच है। योगी जी ने अतीक अहमद जैसे अपराधियों को सजा देकर मुझे और कई अन्य पीड़ितों को न्याय दिलाया।"
पूजा ने सपा नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा, "पार्टी को तय करना होगा कि वह पीड़ित परिवारों के साथ है या मुठभेड़ में मारे गए माफियाओं के साथ। पहले अपने दोहरे रवैये पर बोलें।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी अभी तक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की कोई चर्चा नहीं हुई है। पूजा ने कहा, "राजनीति मेरी प्राथमिकता कभी नहीं थी। मैं अपने पति को न्याय दिलाने के लिए राजनीति में आई। मेरे लिए मेरे क्षेत्र की जनता और उनका भरोसा सबसे महत्वपूर्ण है।"
उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर भी लिखा, "मैंने सालों तक कुख्यात माफिया के खिलाफ संघर्ष किया, जिसने सात दिन में मेरी दुनिया उजाड़ दी और मेरा पति छीन लिया। मुझे जिसने न्याय दिया, मैं उसका हमेशा सम्मान करूंगी।" यह बयान उनकी दृढ़ता और निजी संघर्ष को दर्शाता है।
- राजू पाल हत्याकांड और अतीक अहमद का मामला
पूजा पाल की कहानी उनके पति राजू पाल की हत्या से गहराई से जुड़ी है। राजू पाल ने 2004 में प्रयागराज पश्चिम सीट के उपचुनाव में अतीक अहमद के भाई अशरफ को हराया था। इससे पहले 2002 में वह अतीक से हार गए थे। पुलिस के अनुसार, 25 जनवरी 2005 को राजू की हत्या राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण अतीक और अशरफ के इशारे पर हुई। इस मामले के प्रमुख गवाह उमेश पाल की भी फरवरी 2023 में गोली मारकर हत्या कर दी गई।
अप्रैल 2023 में, अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ को मेडिकल जांच के लिए ले जाते समय प्रयागराज में तीन अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना कैमरे में कैद हुई थी। अतीक के बेटे असद को भी झांसी में पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 2016 में राजू पाल हत्याकांड की जांच शुरू की और 2024 में सात लोगों रंजीत पाल, आबिद, फरहान अहमद, इसरार अहमद, जावेद, गुलहसन, और अब्दुल कवि को हत्या और आपराधिक साजिश के लिए दोषी ठहराया। एक न्यायिक आयोग ने अतीक और अशरफ की हत्या में पूर्व नियोजित साजिश या पुलिस लापरवाही से इनकार किया।
- सपा का रुख
सपा का यह निष्कासन कई सवाल उठाता है। पूजा का बयान उनकी निजी पीड़ा और न्याय की लड़ाई से प्रेरित था, फिर भी इसे पार्टी विरोधी माना गया। यह कदम सपा की उस छवि को मजबूत करता है, जो माफिया और अपराधियों के प्रति नरम रुख के लिए विपक्षी दलों द्वारा आलोचना की जाती रही है। योगी सरकार ने अतीक अहमद जैसे माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई को अपनी उपलब्धि बताया है, और पूजा का बयान इस नीति को जनता का समर्थन मिलने का संकेत देता है।
प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर ने सपा की आलोचना करते हुए कहा, "पार्टी ने एक पिछड़े समुदाय की महिला विधायक को बोलने से रोका। उनके बयान ने सपा की पोल खोल दी।" उन्होंने पूजा के बयान को सभी के लिए सुनने लायक बताया।
- पूजा पाल का राजनीतिक सफर
पूजा पाल ने अपने पति की हत्या के बाद राजनीति में प्रवेश किया। वह पहले बसपा में थीं और 2007, 2009, और 2012 में प्रयागराज पश्चिम से विधायक चुनी गईं। 2017 में वह सपा में शामिल हुईं और 2022 में चायल सीट से विधायक बनीं। हालांकि, वह पहले भी सपा के खिलाफ बगावत कर चुकी हैं। 2024 के राज्यसभा चुनाव में उन्होंने और छह अन्य सपा विधायकों ने भाजपा के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग की थी। इसके अलावा, फूलपुर उपचुनाव में भी उन्होंने सपा के खिलाफ जाकर भाजपा प्रत्याशी का समर्थन किया था।
इससे पहले भी सपा ने जून 2025 में तीन विधायकों अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह, और मनोज कुमार पांडे को क्रॉस-वोटिंग के लिए निष्कासित किया था। पूजा को तब चेतावनी दी गई थी, लेकिन अब उनके बयान ने सपा को कड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर किया।
पूजा पाल का निष्कासन सपा की रणनीति और एकता पर सवाल उठाता है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह घटना पार्टी के भीतर असहमति को दबाने की मानसिकता को दर्शाती है। सपा की छवि पर पहले से ही माफिया समर्थन के आरोप लगते रहे हैं, और पूजा जैसे विधायक का बयान इस छवि को चुनौती देता है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह निष्कासन सपा के लिए आत्मघाती हो सकता है, क्योंकि यह जनता के बीच योगी सरकार की माफिया विरोधी नीतियों के समर्थन को दिखाता है।
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