जिला स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच जमकर मारपीट।
बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हारी के बाद कांग्रेस पार्टी के भीतर अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। मधुबनी जिले के कांग्रेस कार्यालय में
बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हारी के बाद कांग्रेस पार्टी के भीतर अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। मधुबनी जिले के कांग्रेस कार्यालय में आयोजित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच जमकर मारपीट हुई। यह घटना 6 जनवरी 2026 को हुई, जिसमें दो गुटों के बीच तीखी बहस हाथापाई में बदल गई और लात-घूंसे तथा लाठी-डंडों का इस्तेमाल हुआ। पूरी घटना का वीडियो सामने आया है, जो तेजी से वायरल हो रहा है। बैठक बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी। इस दौरान टिकट वितरण में अनियमितता और अन्य मुद्दों को लेकर असंतोष व्यक्त किया गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के दो गुट आपस में भिड़ गए, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई। मारपीट इतनी तेज हुई कि कुर्सियां तोड़ी गईं और पार्टी के झंडे लगे डंडों से भी पिटाई की गई। इस घटना में कई कार्यकर्ता घायल हो गए, जिनमें से एक जिला परिषद सदस्य गंभीर रूप से घायल बताया गया है।
घटना के समय बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और वरिष्ठ नेता शकील अहमद खान मौजूद थे। दोनों नेताओं के सामने ही यह हिंसक झड़प हुई, जिससे कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई। मौके पर मौजूद अन्य लोगों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन तब तक हालात नियंत्रण से बाहर हो चुके थे। मारपीट मुख्य रूप से टिकट बंटवारे और चुनावी रणनीति में असफलता को लेकर आरोप-प्रत्यारोप के बीच शुरू हुई। यह घटना कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी को उजागर करती है, जो चुनाव हार के बाद और अधिक तेज हो गई है। कार्यकर्ताओं ने संगठन की कमजोरी, टिकट वितरण और स्थानीय नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए। बहस इतनी बढ़ गई कि शारीरिक झड़प में बदल गई। वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि कैसे कार्यकर्ता एक-दूसरे पर टूट पड़े और लाठीबाजी हुई।
पार्टी के जिला अध्यक्ष सुबोध कुमार मंडल, पूर्व अध्यक्ष मनोज मिश्रा और वरिष्ठ नेता नलिनी रंजन झा समेत दर्जनों कार्यकर्ता बैठक में उपस्थित थे। घटना के बाद कार्यालय में तनाव का माहौल बना हुआ है। इस हिंसा ने पार्टी के भीतर असंतोष की गहराई को दर्शाया है। बिहार में कांग्रेस ने चुनाव में सीमित सीटों पर ही सफलता हासिल की थी, जिससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी पहले से मौजूद थी। समीक्षा बैठक को आत्ममंथन का अवसर माना गया था, लेकिन यह हिंसक झड़प में बदल गई। यह घटना पार्टी की एकता पर सवाल उठाती है और आगे की रणनीति पर प्रभाव डाल सकती है।
What's Your Reaction?







