हरियाणा वोटर लिस्ट में ब्राजीलियन मॉडल की तस्वीर: डेटा त्रुटियां या साजिश? ग्राउंड जांच से सामने आई सच्चाई।
हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में भारतीय जनता पार्टी की जीत के बाद से ही विपक्षी दलों ने वोट चोरी के आरोप लगाए हैं। इनमें से सबसे चर्चित मामला वोटर लिस्ट में एक
हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में भारतीय जनता पार्टी की जीत के बाद से ही विपक्षी दलों ने वोट चोरी के आरोप लगाए हैं। इनमें से सबसे चर्चित मामला वोटर लिस्ट में एक ब्राजीलियन महिला की तस्वीर का है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 5 नवंबर 2025 को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि हरियाणा की वोटर लिस्ट में एक ब्राजीलियन मॉडल की फोटो 22 बार अलग-अलग नामों से दर्ज है। उन्होंने इसे 'हाइड्रोजन बम' करार देते हुए कहा कि यह केंद्रीकृत साजिश का प्रमाण है, जिसमें 25 लाख फर्जी वोट डाले गए। लेकिन 'आजतक' और 'इंडिया टुडे' की ग्राउंड रिपोर्ट ने इस दावे को और गहराई से जांचा। दो दिनों की पड़ताल में राय विधानसभा क्षेत्र के मछरौली और आसपास के गांवों में छह मामले सामने आए, जो साफ करते हैं कि यह वोट चोरी से ज्यादा डेटा एरर, पुरानी जानकारी और सिस्टम की कमजोरियों से जुड़ा है।
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्लाइड शो दिखाया, जिसमें एक युवा महिला की तस्वीर को विभिन्न नामों से जोड़ा गया था। नाम जैसे सीमा, स्वीटी, सरस्वती, रश्मि और विमला। उन्होंने कहा कि यह तस्वीर ब्राजीलियन मॉडल की है और यह 10 अलग-अलग बूथों पर 22 बार वोट डालने के लिए इस्तेमाल हुई। गांधी ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि डुप्लिकेट एंट्री को हटाने के लिए सॉफ्टवेयर उपलब्ध होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई। कांग्रेस का कहना था कि हरियाणा में कुल 25 लाख फर्जी वोटर थे, जिनमें 19.26 लाख बल्क वोटर, 5.21 लाख डुप्लिकेट और 93,174 अमान्य वोटर शामिल थे। यह आरोप भाजपा सरकार और चुनाव आयोग पर सीधा हमला था। भाजपा ने इसे खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस हार के बाद बहाने बना रही है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राहुल गांधी का 'एटम बम' कभी फूटता ही नहीं।
इस तस्वीर की असलियत सामने आने पर मामला और रोचक हो गया। ब्राजीलियन फैक्ट-चेकिंग एजेंसी 'आओस फाटोस' ने जांच की और पाया कि यह फोटो 2017 में ब्राजील के फोटोग्राफर माथ्यूस फेरारो द्वारा ली गई थी। यह अनस्प्लैश वेबसाइट पर फ्री स्टॉक इमेज के रूप में उपलब्ध थी, जिसे कोई भी डाउनलोड कर सकता है। तस्वीर में दिख रही महिला लैरिसा नेरी हैं, जो अब मॉडल नहीं बल्कि एक हेयर सैलून चलाती हैं। लैरिसा ने 6 नवंबर को इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट किया, जिसमें कहा, 'दोस्तों, ये मजाक जैसा लग रहा है। मेरी पुरानी फोटो का इस्तेमाल हो रहा है। मैं कभी भारत नहीं गई। ये क्या पागलपन है? वे मुझे भारतीय दिखाकर लोगों को ठग रहे हैं।' उन्होंने बताया कि उन्हें भारतीय पत्रकारों ने संपर्क किया, तब पता चला। लैरिसा ने कहा कि वह 18-20 साल की उम्र की फोटो थी, जो बिना अनुमति के इस्तेमाल हुई। इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया, जहां मीम्स और बहस छिड़ गई।
ग्राउंड रिपोर्ट ने दिखाया कि यह फोटो वोटर लिस्ट में कैसे घुस गई। 'इंडिया टुडे' की टीम ने राय क्षेत्र के मछरौली गांव में पहुंचकर प्रभावित परिवारों से बात की। पहला मामला गुनिया का था, जो 2022 में मर चुकी थीं। उनके बेटे विनोद ने बताया कि वोटर लिस्ट में मां का नाम अभी भी है, लेकिन फोटो ब्राजीलियन महिला की लगी है। सास कल्यावती ने डेथ सर्टिफिकेट दिखाया और कहा, 'मां ने 2024 चुनाव में वोट डाला था, लेकिन ये फोटो गलत कैसे?' परिवार ने नाम हटाने की मांग की। दूसरा केस सरोज का, जो भिवानी चली गईं, लेकिन राय लिस्ट में उनका नाम ब्राजीलियन फोटो के साथ बना हुआ है। बहन ने कहा, 'वह यहां नहीं रहती, फिर नाम क्यों?'
तीसरा उदाहरण पिंकी का। दिल्ली से मछरौली शिफ्ट होने पर वोटर कार्ड आया, लेकिन फोटो गांव की दूसरी महिला की लगी। पिंकी ने कहा, 'मैंने आधार और स्लिप से वोट डाला, लेकिन ये गड़बड़ी कैसे हुई?' चौथा मामला बिमला (पत्नी रमेश) का, जहां दो एंट्री हैं। एक सही फोटो वाली, दूसरी अलग ईपीआईसी नंबर लेकिन ब्राजीलियन फोटो वाली। नाम, घर नंबर सब एक जैसे। पांचवां केस स्वीटी का, जहां फोटो ब्लर है लेकिन नाम अलग। छठा विमला देवी का बेटा, जिनकी मां की एंट्री फर्जी लग रही। बेटे ने कहा, 'ये पूरी तरह फेक है।' इन छह मामलों से पैटर्न साफ है: क्लेरिकल मिस्टेक, जैसे फोटो अपलोड में गलती; पुराना डेटा, जैसे मृत या शिफ्ट हुए लोगों का नाम न हटना; और डिजिटल सिस्टम की कमजोरी, जहां बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) ऐप पर नोटिफिकेशन मिस कर देते हैं, तो एंट्री ऑटो-वेरिफाई हो जाती है।
चुनाव आयोग ने 6 नवंबर को विस्तृत जवाब देने का ऐलान किया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी हरियाणा ने कहा कि वायरल स्क्रीनशॉट पुरानी डेटाबेस से हैं और डिजिटली एल्टर किए गए। आयोग ने कहा कि अगर डुप्लिकेट थे, तो कांग्रेस के पोलिंग एजेंट्स ने समय पर आपत्ति क्यों नहीं की? आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) का जिक्र किया, जो डुप्लिकेट हटाने के लिए है। लेकिन विपक्ष का कहना है कि डेटाबेस आयोग को दे दो, हम साफ करेंगे। बीएलओ से बात करने पर पता चला कि फोटो वेरिफिकेशन में आधार से लिंकिंग जरूरी है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में सिग्नल या जागरूकता की कमी से एरर होते हैं।
यह मामला लोकतंत्र की मजबूती पर सवाल उठाता है। एक तरफ राहुल गांधी जैसे नेता इसे साजिश बता रहे हैं, दूसरी तरफ रिपोर्ट्स डेटा मैनेजमेंट की कमियों की ओर इशारा करती हैं। ब्राजीलियन फैक्ट-चेकर्स ने पुष्टि की कि फोटो फ्री स्टॉक इमेज थी, जिसका गलत इस्तेमाल हुआ। लैरिसा नेरी ने कहा कि यह पहचान चोरी है, जिस पर सख्ती होनी चाहिए। हरियाणा में 2024 चुनाव में भाजपा ने 48 सीटें जीतीं, लेकिन राय में जीत 4,673 वोटों से हुई। अगर 22 फर्जी वोट भी प्रभाव डालते, तो नतीजे बदल सकते थे। विशेषज्ञों का कहना है कि वोटर लिस्ट को आधार और अन्य डेटाबेस से मजबूती से लिंक करना जरूरी है।
सोशल मीडिया पर बहस तेज है। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर #VoteChori ट्रेंड कर रहा है। कुछ यूजर्स कहते हैं कि यह सिस्टम फेलियर है, जबकि अन्य भाजपा पर निशाना साध रहे। ब्राजील में भी चर्चा हो रही, जहां लैरिसा को भारतीय फॉलोअर्स मिल गए। कुल मिलाकर, यह घटना बताती है कि डिजिटल युग में डेटा सिक्योरिटी कितनी महत्वपूर्ण है। चुनाव आयोग को अब पारदर्शी जांच करनी होगी, ताकि भविष्य के चुनाव निष्पक्ष रहें। हर वोट की कीमत बराबर होनी चाहिए, और ऐसी गड़बड़ियां लोकतंत्र को कमजोर करती हैं।
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