JPSC-JSSC Scam Controversy: रांची में डटे अभ्यर्थी, गतिरोध तोड़ने आज फिर होगी सरकार और छात्रों की बैठक

झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती धांधली के खिलाफ छात्रों का आंदोलन 16वें दिन भी जारी है। गतिरोध सुलझाने के लिए रविवार को सरकार और अभ्यर्थियों के बीच वार्ता होगी।

Aug 9, 2026 - 13:01
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JPSC-JSSC Scam Controversy: रांची में डटे अभ्यर्थी, गतिरोध तोड़ने आज फिर होगी सरकार और छात्रों की बैठक
Jharkhand Student Protest
  • झारखंड परीक्षा धांधली विवाद: 16वें दिन भी जारी छात्रों का आंदोलन, आज सरकार से नए दौर की वार्ता
  • झारखंड में JPSC-JSSC धांधली पर घमासान: 16वें दिन भी अनशन जारी, क्या आज सरकार के साथ वार्ता से निकलेगा समाधान?
  • झारखंड: JPSC और JSSC परीक्षा विवाद पर 16वें दिन भी प्रदर्शन जारी, आज दोपहर सरकार से फिर होगी बातचीत

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और धांधली के खिलाफ अभ्यर्थियों का आंदोलन रविवार को 16वें दिन में प्रवेश कर चुका है। राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बने धरना स्थल पर हजारों छात्र अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। शुक्रवार और शनिवार को हुई कई दौर की वार्ताएं बेनतीजा रहने के बाद हेमंत सोरेन सरकार ने रविवार दोपहर 12 बजे छात्र प्रतिनिधियों के साथ फिर से नए सिरे से बातचीत की घोषणा की है। वहीं, अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने और डुमरी विधायक जयराम महतो के समर्थन में अनशन पर बैठने से राज्य का सियासी और प्रशासनिक पारा चढ़ गया है।

झारखंड की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षा प्रणालियों JPSC और JSSC की परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं, पेपर लीक और सेटिंग के आरोपों को लेकर छात्रों का आक्रोश चरम पर है। 25 जुलाई से शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब एक व्यापक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की मुख्य मांगों में 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा के पीटी (PT) को रद्द करना, विवादित परीक्षाओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) या उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के पैनल से जांच कराना और दोनों आयोगों में आमूलचूल सुधार लागू करना शामिल है।

जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम को छात्रों ने अपना स्थायी आंदोलन केंद्र बना लिया है, जहां छात्र तंबू और रसद के साथ टिके हुए हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो पिछले सात दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। रविवार तड़के करीब 3 बजे उनकी सेहत अचानक काफी बिगड़ गई, जब डॉक्टरों ने पाया कि उनका ब्लड शुगर लेवल गिरकर 53 हो गया है।

गतिरोध को समाप्त करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर गठित मंत्रिस्तरीय समिति ने शुक्रवार रात और शनिवार दिन भर विभिन्न छात्र संगठनों जिनमें 'JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच', एनएसयूआई (NSUI), झारखंड छात्र मोर्चा और आदिवासी छात्र संघ शामिल हैं के साथ पांच दौर की बातचीत की, लेकिन कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद सरकार ने रविवार को फिर से छठे दौर की वार्ता आयोजित करने का फैसला किया। इस बीच, झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के प्रमुख और विधायक जयराम महतो ने भी छात्रों के समर्थन में रविवार को एकदिवसीय अनशन शुरू कर दिया है।

सरकार द्वारा बार-बार वार्ता की तिथियां घोषित करने और अलग-अलग छात्र गुटों से बात करने पर मूल आंदोलनकारी संगठन 'JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच' ने कड़ा ऐतराज जताया है। मंच के नेताओं का आरोप है कि सरकार गैर-संबंधित संगठनों को शामिल कर छात्रों की एकजुटता को तोड़ने और मुख्य मांगों से ध्यान भटकाने की "राजनीतिक पैंतरेबाजी" कर रही है। मंच ने साफ कहा है कि जब तक उनकी सभी जायज मांगें आधिकारिक रूप से नहीं मानी जातीं, वे अपने आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।

दूसरी ओर, राज्य सरकार के मंत्रियों का कहना है कि प्रशासन छात्रों के भविष्य के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। सरकार का दावा है कि वह पारदर्शी परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए सभी सुझावों पर खुले मन से विचार करने को तैयार है। इस बीच, मामले की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की टीम अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है और आयोग के पूर्व अधिकारियों से पूछताछ जारी है।

16 दिनों से लगातार जारी इस आंदोलन ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक मशीनरी को हिलाकर रख दिया है। अभ्यर्थियों का समर्थन करने के लिए विभिन्न सामाजिक संगठन, विपक्षी राजनीतिक दल और विधायक भी खुलकर सामने आ रहे हैं। राजधानी रांची में सुरक्षा व्यवस्था चुस्त कर दी गई है। अनशन पर बैठे छात्र नेताओं के गिरते स्वास्थ्य और छात्रों के आक्रोश को देखते हुए प्रशासन पर जल्द से जल्द इस विवाद को सुलझाने का भारी दबाव बन गया है।

यदि रविवार को आयोजित होने वाली छठे दौर की यह बैठक भी बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म होती है, तो छात्र संगठनों ने 10 अगस्त को प्रस्तावित 'विधानसभा मार्च' को और अधिक उग्र रूप देने का ऐलान किया है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार आज की बातचीत में अभ्यर्थियों की सीबीआई जांच और परीक्षा रद्द करने जैसी प्रमुख शर्तों को स्वीकार करती है या फिर राज्य में छात्रों का यह आंदोलन और अधिक विकराल रूप ले लेगा।

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