Israel Election Results - एग्जिट पोल्स में आइज़ेनकोट गठबंधन आगे, लिकुड सबसे बड़ी पार्टी; सरकार गठन पर फंसा पेंच

इसराइल चुनाव में गादी आइज़ेनकोट के गठबंधन और नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला। 120 सीटों वाली नेसेट में सरकार गठन की प्रक्रिया और समीकरण समझें।

Oct 28, 2026 - 14:17
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Israel Election Results - एग्जिट पोल्स में आइज़ेनकोट गठबंधन आगे, लिकुड सबसे बड़ी पार्टी; सरकार गठन पर फंसा पेंच

इसराइल में संपन्न हुए आम चुनावों के एग्जिट पोल्स और शुरुआती रुझानों ने देश की राजनीति को एक बार फिर रोचक और पेचीदा मोड़ पर ला खड़ा किया है। यदि अंतिम परिणाम भी एग्जिट पोल्स के अनुरूप रहते हैं—जिसमें पूर्व सेना प्रमुख गादी आइज़ेनकोट का विरोधी गठबंधन कुल सीटों में आगे रहता है और निवर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी संसद (नेसेट) में सबसे बड़े एकल दल के रूप में उभरती है—तो सरकार गठन की प्रक्रिया बेहद जटिल हो जाएगी।

इसराइल की संसदीय प्रणाली में कुल 120 सीटें हैं, जहां सरकार बनाने के लिए न्यूनतम 61 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है। इसराइली चुनावी इतिहास यह दिखाता है कि वहां कभी भी किसी एक राजनीतिक दल को अपने दम पर पूर्ण बहुमत नहीं मिला है, जिससे सरकार बनाने का दारोमदार हमेशा गठबंधन की खींचतान पर निर्भर करता है।

राष्ट्रपति की भूमिका और सरकार बनाने का पहला अवसर (Mandate)

चुनावी नतीजों की आधिकारिक घोषणा के बाद सरकार गठन की गेंद इसराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग के पाले में चली जाएगी। संवैधानिक नियमों के अनुसार, राष्ट्रपति संसद में निर्वाचित सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और प्रतिनिधियों के साथ औपचारिक विचार-विमर्श करेंगे।

इस प्रक्रिया में प्रत्येक दल राष्ट्रपति को यह लिखित या मौखिक अनुशंसा सौंपता है कि वे किसे प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। कानूनन राष्ट्रपति के लिए यह अनिवार्य नहीं है कि वह सबसे बड़ी एकल पार्टी के नेता को ही आमंत्रित करें। राष्ट्रपति उस नेता को सरकार बनाने का पहला मैंडेट (जनादेश) सौंपते हैं, जिसके पास 61 सांसदों का समर्थन जुटाने की सबसे अधिक और व्यावहारिक संभावना नजर आती है। ऐसे में यदि आइज़ेनकोट का गठबंधन 61 के करीब पहुंचता है या अधिक दलों की सिफारिश हासिल करता है, तो उन्हें पहला मौका मिल सकता है। इसके विपरीत यदि नेतन्याहू अपने पारंपरिक दक्षिणपंथी और धार्मिक सहयोगियों को एकजुट रखने में सफल रहते हैं, तो वे भी इस दावेदारी में बने रहेंगे।

सरकार गठन के लिए उपलब्ध कानूनी समयसीमा

जिस भी नेता को राष्ट्रपति सरकार बनाने का अवसर देते हैं, उसे शुरुआती तौर पर 28 दिनों की समयसीमा प्रदान की जाती है। यदि इन 28 दिनों में गठबंधन वार्ता पूरी नहीं हो पाती, तो राष्ट्रपति के विवेकानुसार इसे 14 दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है, जिससे अधिकतम 42 दिन का समय मिलता है।

यदि पहला नेता निर्धारित समय में 61 सांसदों का समर्थन जुटाकर नई सरकार पेश करने में विफल रहता है, तो राष्ट्रपति यह मैंडेट दूसरे सबसे बड़े गठबंधन या दल के नेता को सौंपते हैं, जिन्हें इसके लिए 28 दिन का समय मिलता है। यदि दूसरा नेता भी सरकार नहीं बना पाता, तो मामला सीधे नेसेट के पास चला जाता है, जहां किसी भी सांसद के पास 21 दिनों के भीतर 61 सदस्यों का समर्थन जुटाकर सरकार बनाने का अंतिम विकल्प होता है। यदि यह प्रयास भी निष्फल रहा, तो संसद स्वतः भंग हो जाती है और देश को दोबारा चुनावों का सामना करना पड़ता है।

आगे क्या-क्या राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं?

1. विरोधी गठबंधन की सरकार: यदि गादी आइज़ेनकोट अन्य मध्यमार्गी, वामपंथी और स्वतंत्र दलों के साथ-साथ अरब दलों या दक्षिणपंथी असंतुष्टों का न्यूनतम समर्थन हासिल कर लेते हैं, तो वे 61 का आंकड़ा छूकर नेतन्याहू को सत्ता से बाहर कर सकते हैं।

2. नेतन्याहू की जोड़-तोड़ और किंगमेकर की भूमिका: नेतन्याहू अपनी लिकुड पार्टी के सबसे बड़े दल होने के दर्जे का लाभ उठाकर विरोधी खेमे के कुछ छोटे दलों या व्यक्तिगत सांसदों को पाला बदलने के लिए राजी करने की कोशिश कर सकते हैं। इसके अलावा अति-रूढ़िवादी और धुर-दक्षिणपंथी सहयोगियों को साथ रखकर वे बहुमत के जादुई आंकड़े तक पहुंचने का प्रयास करेंगे।

3. राष्ट्रीय एकता सरकार या राजनीतिक गतिरोध: यदि दोनों ही खेमे 61 का बहुमत जुटाने में पूरी तरह असमर्थ रहते हैं, तो देश में राजनीतिक अनिश्चितता गहरा सकती है। ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री पद के रोटेशन (बारी-बारी से नेतृत्व) के फॉर्मूले पर एक वृहद राष्ट्रीय एकता सरकार (Unity Government) पर विचार हो सकता है, अथवा इसराइल को एक बार फिर कुछ ही महीनों में नए सिरे से मध्यावधि चुनाव का सामना करना पड़ सकता है।

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