मुजफ्फरपुर लीची किसानों के लिए नया वरदान, डॉ. मनेंद्र कुमार का मोटराइज्ड गर्डलिंग टूल मिला भारत सरकार का पेटेंट।
बिहार का मुजफ्फरपुर जिला अपनी बेहतरीन क्वालिटी वाली शाही लीची के लिए पूरे देश और विदेशों में प्रसिद्ध है। यहां उत्पादित लीची की मांग बहुत अधिक
- बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के पूर्व डीन डॉ. मनेंद्र कुमार द्वारा डिजाइन किया गया मोटराइज्ड गर्डलिंग टूल लीची ऑर्चर्ड अब पेटेंटेड, बढ़ेगी फल की गुणवत्ता और पैदावार
- लीची की खेती में क्रांति लाने वाला मोटराइज्ड गर्डलिंग उपकरण पेटेंट प्राप्त, फल साइज मिठास बढ़ाने तथा ड्रॉप रोकने में प्रभावी
बिहार का मुजफ्फरपुर जिला अपनी बेहतरीन क्वालिटी वाली शाही लीची के लिए पूरे देश और विदेशों में प्रसिद्ध है। यहां उत्पादित लीची की मांग बहुत अधिक है तथा यह फल अपनी मिठास और स्वाद के लिए जाना जाता है। अब लीची की खेती को और उन्नत बनाने के लिए एक आधुनिक उपकरण विकसित किया गया है। यह उपकरण बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के पूर्व साइंस डीन एवं पीजी जूलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. मनेंद्र कुमार द्वारा डिजाइन किया गया है। उपकरण का नाम मोटराइज्ड गर्डलिंग टूल फॉर लीची ऑर्चर्ड है। भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने इस उपकरण को पंजीकृत कर दिया है। यह उपकरण लीची के बागवानों और किसानों के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा। गर्डलिंग तकनीक लीची के पेड़ों में फूल आने तथा फल लगने को नियंत्रित करने में मदद करती है।
यह मोटराइज्ड टूल पारंपरिक गर्डलिंग विधि को आधुनिक बनाता है। इसमें मोटर की मदद से पेड़ की शाखाओं पर सटीक कट लगाया जाता है। इससे लीची के फल का साइज बढ़ता है तथा मिठास में सुधार होता है। फलों का झड़ना काफी हद तक रुक जाता है। पारंपरिक तरीके से गर्डलिंग हाथ से की जाती है जो समय लेने वाली तथा श्रमसाध्य होती है। मोटराइज्ड टूल से यह प्रक्रिया तेज तथा सटीक हो जाती है। उपकरण लीची ऑर्चर्ड में बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है। पेटेंट प्राप्त होने से इसकी तकनीकी सुरक्षा सुनिश्चित हो गई है तथा व्यावसायिक उपयोग बढ़ेगा।
मुजफ्फरपुर में लीची उत्पादन मुख्य रूप से शाही किस्म पर आधारित है। यह फल अपनी गुणवत्ता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में लोकप्रिय है। गर्डलिंग तकनीक लीची में नियमित फूल तथा फलन को प्रेरित करती है। डॉ. मनेंद्र कुमार द्वारा विकसित टूल इस तकनीक को और प्रभावी बनाता है। उपकरण से लीची के पेड़ों पर प्राथमिक शाखाओं में गर्डलिंग आसानी से की जा सकती है। इससे पैदावार बढ़ने के साथ फल की गुणवत्ता में सुधार होता है। पेटेंट से किसानों को यह उपकरण उपलब्ध कराने में आसानी होगी।
यह विकास लीची की खेती को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मजबूत करेगा। मुजफ्फरपुर में लीची बागवानी मुख्य आय का स्रोत है। उपकरण से फसल प्रबंधन बेहतर होगा तथा आर्थिक लाभ बढ़ेगा। पेटेंट कार्यालय की मंजूरी से इस आविष्कार को मान्यता मिली है। डॉ. मनेंद्र कुमार की विशेषज्ञता जूलॉजी तथा कृषि अनुसंधान में है। उपकरण लीची के अलावा अन्य फलों में भी उपयोगी हो सकता है लेकिन मुख्य फोकस लीची पर है। गर्डलिंग से फल झड़ने की समस्या कम होती है तथा फल बड़े तथा मीठे बनते हैं। पेटेंट से उत्पादन तथा वितरण में सुरक्षा मिलेगी।
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