Home Loan Rules: सिर्फ सस्ते मकान काफी नहीं, आसान होम लोन भी है जरूरी; एक्सपर्ट्स ने हाउसिंग सेक्टर पर दी बड़ी राय

देश के हाउसिंग सेक्टर को रफ्तार देने के लिए सिर्फ सस्ते घर नहीं, बल्कि आसान होम लोन भी जरूरी हैं। आर्थिक और रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स ने बैंकिंग नियमों में ढील देने की वकालत की है।

Jul 17, 2026 - 14:50
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Home Loan Rules: सिर्फ सस्ते मकान काफी नहीं, आसान होम लोन भी है जरूरी; एक्सपर्ट्स ने हाउसिंग सेक्टर पर दी बड़ी राय
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  • Real Estate Update: हाउसिंग सेक्टर को रफ्तार देने के लिए होम लोन प्रक्रियाओं का सरलीकरण जरूरी, आर्थिक विशेषज्ञों का दावा
  • सस्ता घर खरीदने का सपना तब होगा पूरा जब आसान होगा होम लोन, बैंकिंग एक्सपर्ट्स ने बताई हाउसिंग मार्केट की असली हकीकत
  • Business News: रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स की मांग, हाउसिंग सेक्टर की ग्रोथ के लिए होम लोन नियमों को बनाया जाए लचीला

भारतीय रियल एस्टेट और हाउसिंग सेक्टर में मंदी के बाद अब सुधार देखने को मिल रहा है, लेकिन उद्योग को एक नए और टिकाऊ उछाल (ग्रोथ) की दरकार है। आर्थिक और रियल एस्टेट मामलों के शीर्ष विशेषज्ञों का मानना है कि देश में मध्यम वर्ग को घर मुहैया कराने के लिए केवल 'सस्ते मकान' (अफोर्डेबल हाउसिंग) बना देना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके साथ 'आसान होम लोन' की उपलब्धता भी उतनी ही अनिवार्य है। जुलाई 2026 में बैंकिंग और रियल एस्टेट थिंक-टैंक द्वारा जारी एक संयुक्त वित्तीय विश्लेषण के अनुसार, जब तक आम उपभोक्ताओं के लिए गृह ऋण की कागजी प्रक्रियाएं सरल नहीं होंगी और पात्रता मानदंडों (एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया) में लचीलापन नहीं आएगा, तब तक हाउसिंग सेक्टर अपनी पूर्ण क्षमता से आगे नहीं बढ़ पाएगा। विशेषज्ञों ने इस संबंध में बैंकिंग प्रणाली और केंद्रीय बैंक से नीतिगत बदलावों की सिफारिश की है।

यह विषय देश की मैक्रो-इकोनॉमी (समष्टि अर्थशास्त्र) और मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति से जुड़ा है। सरकार और बिल्डर्स लगातार 'हर हाथ को छत' देने के मिशन के तहत किफायती आवासीय परियोजनाएं लॉन्च कर रहे हैं। हालांकि, बाजार के आंकड़े बताते हैं कि इन सस्ते घरों के लिए मांग तो है, लेकिन बड़ी संख्या में संभावित खरीदार बैंक लोन की जटिल प्रक्रियाओं, अत्यधिक दस्तावेजों की मांग और सख्त क्रेडिट स्कोर नियमों के कारण पीछे हट रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हाउसिंग मार्केट की वास्तविक मांग को वास्तविक बिक्री (सेल्स) में तब्दील करने के लिए लिक्विडिटी और होम लोन की सुलभता के बीच के अंतर को तुरंत पाटना होगा।

वर्तमान वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही की समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में मकानों की इन्वेंट्री (बिना बिके घर) बढ़ रही है। जबकि दूसरी तरफ, होम लोन के लिए आवेदन करने वाले मध्यम आय वर्ग के लगभग 35% आवेदनों को या तो खारिज कर दिया जा रहा है या फिर कागजी कमियों के कारण उनमें देरी हो रही है।

रियल एस्टेट कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषकर असंगठित क्षेत्र (अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर) में काम करने वाले लोग या छोटे व्यवसायी, जिनके पास औपचारिक टैक्स रिटर्न (ITR) का लंबा इतिहास नहीं होता, वे मकान खरीदने की वित्तीय क्षमता रखने के बावजूद लोन से वंचित रह जाते हैं। बैंकिंग प्रणाली में वर्तमान ब्याज दरें स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन पात्रता संबंधी नियमों की कड़ाई एक बड़ी बाधा बन गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति 20 से 30 लाख रुपये का किफायती मकान खरीदना चाहता है, तो उसे बैंकिंग सिस्टम के उस जटिल चक्रव्यूह से गुजरना पड़ता है जो बड़े कॉरपोरेट लोन जैसी ही सावधानी मांगता है। इसी विसंगति को दूर करने के लिए रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स ने लोन प्रोसेसिंग को आसान और पूरी तरह डिजिटल-फ्रेंडली बनाने की जोरदार वकालत की है।

इस नीतिगत विमर्श पर विभिन्न हितधारकों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं:

रियल एस्टेट डेवलपर्स (CREDAI): डेवलपर्स एसोसिएशन का कहना है कि वे निर्माण लागत में कटौती करके सस्ते घर बनाने को तैयार हैं, लेकिन खरीदार के पास पैसा तभी आएगा जब बैंक से लोन आसानी से मंजूर होगा। लोन मिलने में देरी से प्रोजेक्ट की नकदी स्थिति प्रभावित होती है।

बैंकिंग से जुड़े अधिकारी: सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकरों का तर्क है कि वे गैर-निष्पादित आस्तियों (NPA) के जोखिम को कम करने के लिए नियमों का पालन करने के लिए बाध्य हैं। हालांकि, उन्होंने माना कि तकनीक (AI और ऑटोमेशन) के जरिए प्री-अप्रूव्ड लोन और डिजिटल वेरिफिकेशन की रफ्तार को बढ़ाया जा रहा है।

आर्थिक विश्लेषक: वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) जैसी योजनाओं के तहत होम लोन के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और कम आय वर्ग के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम का दायरा बढ़ाना चाहिए ताकि बैंकों का जोखिम कम हो और वे आसानी से लोन बांट सकें।

होम लोन की सुलभता का सीधा प्रभाव देश की समग्र आर्थिक वृद्धि दर पर पड़ता है। रियल एस्टेट सेक्टर भारत में रोजगार पैदा करने वाला दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है, जो सीमेंट, स्टील, पेंट और लेबर समेत 200 से अधिक संबद्ध उद्योगों को गति देता है।

यदि होम लोन की प्रक्रियाएं आसान की जाती हैं, तो इसके तीन मुख्य प्रभाव देखने को मिलेंगे:

मांग में तात्कालिक वृद्धि: आसान फाइनेंसिंग से पहली बार घर खरीदने वाले (First-time Home Buyers) बाजार में तेजी से कदम रखेंगे।

इन्वेंट्री का तेजी से निपटान: बिल्डरों के पास अटका हुआ पैसा रिलीज होगा, जिससे वे नए प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे कर सकेंगे।

बैंकिंग क्रेडिट ग्रोथ: खुदरा ऋण (Retail Loans) के पोर्टफोलियो में सुधार होगा, जो बैंकिंग क्षेत्र की सेहत के लिए एक सुरक्षित निवेश माना जाता है।

विशेषज्ञों की इस राय के बाद, उम्मीद की जा रही है कि आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) किफायती आवास श्रेणी के लिए 'लोन-टू-वैल्यू' (LTV) अनुपात और 'रिस्क वेटेज' नियमों में कुछ ढील दे सकता है। इसके अलावा, कई प्रमुख हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां अब नए फिनटेक (Fintech) प्लेटफॉर्म के साथ हाथ मिला रही हैं, ताकि वैकल्पिक डेटा (जैसे यूटिलिटी बिल पेमेंट और रेंट हिस्ट्री) के आधार पर उन लोगों की लोन पात्रता जांची जा सके जिनके पास ट्रेडिशनल क्रेडिट स्कोर नहीं है। आने वाले महीनों में होम लोन के नियमों में होने वाला यह सरलीकरण ही भारतीय रियल एस्टेट की वास्तविक दिशा तय करेगा।

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