गर्भावस्था में सिर्फ चाय-बिस्किट या ब्रेड से नाश्ता करने की गलती न करें, डॉक्टर मनीषा मीना गुप्ता की सलाह।
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की पोषण संबंधी जरूरतें काफी बढ़ जाती हैं, क्योंकि इस समय शरीर न केवल खुद को बल्कि विकसित हो रहे शिशु

- प्रेग्नेंसी ब्रेकफास्ट में प्रोटीन, फाइबर और न्यूट्रिएंट्स जरूरी, मूंग दाल चीला-ओट्स जैसे विकल्प अपनाएं
- गर्भवती महिला और शिशु दोनों की सेहत के लिए पौष्टिक नाश्ता दिन की नींव रखता है
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की पोषण संबंधी जरूरतें काफी बढ़ जाती हैं, क्योंकि इस समय शरीर न केवल खुद को बल्कि विकसित हो रहे शिशु को भी पोषक तत्व पहुंचाना होता है। प्रसिद्ध गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर मनीषा मीना गुप्ता ने हाल ही में अपनी सलाह में जोर दिया है कि सुबह का नाश्ता सिर्फ चाय के साथ बिस्किट या सादा ब्रेड से पूरा नहीं होना चाहिए। ऐसा करने से पेट तो भर जाता है, लेकिन शरीर को प्रोटीन, आयरन, फोलिक एसिड, कैल्शियम और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। डॉक्टर गुप्ता ने बताया कि कई गर्भवती महिलाएं सुबह की जल्दबाजी या मॉर्निंग सिकनेस के कारण हल्का नाश्ता चुनती हैं, लेकिन इससे एनर्जी लेवल गिर सकता है, एनीमिया बढ़ सकता है और शिशु का विकास प्रभावित हो सकता है। उन्होंने 2026 की शुरुआत में अपनी सोशल मीडिया पोस्ट और इंटरव्यू में इस मुद्दे पर विस्तार से बात की, जहां उन्होंने भारतीय घरों में आसानी से उपलब्ध पौष्टिक विकल्पों पर फोकस किया।
डॉक्टर मनीषा मीना गुप्ता के अनुसार, ब्रेकफास्ट गर्भावस्था में पूरे दिन की एनर्जी, शिशु की ग्रोथ और कुल न्यूट्रिशन की बुनियाद होता है। वे सलाह देती हैं कि नाश्ते में प्रोटीन का अच्छा स्रोत जरूर शामिल हो, क्योंकि प्रोटीन शिशु की मांसपेशियों, ऊतकों और ब्रेन डेवलपमेंट के लिए अहम है। साथ ही फाइबर से भरपूर फूड्स कब्ज को रोकते हैं, जो प्रेग्नेंसी में आम समस्या है। उन्होंने चाय-बिस्किट या सिर्फ ब्रेड को अनहेल्दी बताया, क्योंकि ये मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट्स प्रदान करते हैं लेकिन प्रोटीन और अन्य माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी रह जाती है। डॉक्टर गुप्ता ने जोर दिया कि नाश्ता संतुलित होना चाहिए, जिसमें प्रोटीन, हेल्दी फैट्स, कॉम्प्लेक्स कार्ब्स और विटामिन्स का मिश्रण हो। इससे ब्लड शुगर लेवल स्थिर रहता है और मॉर्निंग सिकनेस भी कम हो सकती है।
सबसे पसंदीदा विकल्पों में मूंग दाल या बेसन का चीला शामिल है, जो प्रोटीन से भरपूर और आसानी से पचने वाला होता है। मूंग दाल चीला बनाने के लिए मूंग दाल को भिगोकर पीस लें, इसमें सब्जियां जैसे गाजर, पालक या टमाटर मिलाकर चटनी के साथ सर्व करें। यह ग्लूटेन-फ्री और आयरन रिच होता है, जो एनीमिया से बचाव करता है। इसी तरह बेसन चीला भी कैल्शियम और प्रोटीन देता है। डॉक्टर गुप्ता ने बताया कि चीला को वेजिटेबल्स से लोड करने से फाइबर बढ़ता है और यह लाइट डाइजेशन के साथ एनर्जी प्रदान करता है। कई गर्भवती महिलाएं इसे रोजाना बनाती हैं क्योंकि यह कम समय में तैयार हो जाता है और स्वादिष्ट भी होता है।
एक अन्य बेहतरीन विकल्प दूध के साथ ओट्स है, जो फाइबर, आयरन और बी विटामिन्स से भरपूर होता है। ओट्स को दूध में पकाकर फ्रूट्स, नट्स या चिया सीड्स मिलाएं, इससे ओमेगा-3 और एंटीऑक्सीडेंट्स मिलते हैं। डॉक्टर गुप्ता ने सुझाव दिया कि ओट्स को नट्स या फ्रूट्स के साथ मिलाकर खाने से यह और पौष्टिक बन जाता है। यह विकल्प उन महिलाओं के लिए आदर्श है जो मॉर्निंग में कुछ हल्का लेकिन न्यूट्रिशियस चाहती हैं। ओट्स कब्ज को दूर रखता है और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखता है, जो गेस्टेशनल डायबिटीज के रिस्क को कम करता है।
साउथ इंडियन विकल्पों में इडली-सांभर बहुत फायदेमंद है, क्योंकि इडली फर्मेंटेड होती है जो गट हेल्थ के लिए अच्छी है और सांभर में दाल से प्रोटीन मिलता है। इडली आसानी से पचती है और इसमें कोई तेल नहीं होता, इसलिए एसिडिटी से राहत मिलती है। डॉक्टर गुप्ता ने इसे प्रेग्नेंसी में रेकमेंड किया क्योंकि यह प्रोबायोटिक्स प्रदान करता है जो डाइजेशन सुधारता है। उपमा भी एक अच्छा विकल्प है, जहां सूजी या दलिए में ढेर सारी सब्जियां मिलाकर बनाया जाए। उपमा में वेजिटेबल्स और नट्स डालने से फाइबर और हेल्दी फैट्स बढ़ते हैं, जो शिशु के ब्रेन डेवलपमेंट में मदद करते हैं।
पोहा एक लोकप्रिय और हेल्दी ऑप्शन है, लेकिन डॉक्टर गुप्ता ने सलाह दी कि इसे अकेले न खाएं बल्कि मूंगफली, नींबू और सब्जियों के साथ मिलाकर बनाएं। पोहा में आयरन होता है और मूंगफली से प्रोटीन मिलता है, जबकि नींबू विटामिन सी देता है जो आयरन अब्सॉर्प्शन बढ़ाता है। यह लाइट और क्विक ब्रेकफास्ट है जो मॉर्निंग सिकनेस वाले दिनों में भी सूट करता है। डॉक्टर गुप्ता ने जोर दिया कि पोहा को प्रोटीन सोर्स के साथ बैलेंस करना जरूरी है, वरना यह सिर्फ कार्ब्स देगा। ये सभी विकल्प भारतीय घरों में आसानी से उपलब्ध सामग्री से बनते हैं और गर्भवती महिला की डेली न्यूट्रिशन जरूरतों को पूरा करते हैं।
डॉक्टर मनीषा मीना गुप्ता की ये सलाह गर्भावस्था में पोषण पर उनके निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, जहां वे सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर महिलाओं को जागरूक करती हैं। उन्होंने कई बार बताया कि संतुलित ब्रेकफास्ट से शिशु का वजन बेहतर रहता है, मां की एनर्जी बनी रहती है और कॉम्प्लिकेशंस कम होते हैं। गर्भवती महिलाओं को छोटे-छोटे लेकिन फ्रीक्वेंट मील्स लेने की सलाह दी जाती है, जिसमें ब्रेकफास्ट सबसे महत्वपूर्ण होता है। ये टिप्स 2026 में भी प्रासंगिक हैं, क्योंकि प्रेग्नेंसी केयर में न्यूट्रिशन का महत्व लगातार बढ़ रहा है। महिलाओं को डॉक्टर की सलाह से अपनी डाइट कस्टमाइज करनी चाहिए, लेकिन ये विकल्प सामान्य रूप से सुरक्षित और फायदेमंद हैं।
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