चीन में 'अस्सलामु अलैकुम' कहना अब जोखिम भरा, उइगर मुसलमानों पर इस्लामी अभिवादन पर सख्त पाबंदी।
चीन के शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र में मुसलमानों, विशेष रूप से उइगर समुदाय पर धार्मिक अभिव्यक्ति पर लगातार सख्त नियंत्रण बढ़ता
चीन के शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र में मुसलमानों, विशेष रूप से उइगर समुदाय पर धार्मिक अभिव्यक्ति पर लगातार सख्त नियंत्रण बढ़ता जा रहा है। 'अस्सलामु अलैकुम' जैसे पारंपरिक इस्लामी अभिवादन का उपयोग सार्वजनिक रूप से या दैनिक जीवन में करना अब जोखिम भरा माना जाता है। यह पाबंदी चीन की 'इस्लाम की सिनिसाइजेशन' नीति का हिस्सा है जिसमें इस्लाम को चीनी संस्कृति और समाजवादी मूल्यों के अनुरूप ढालने की बात कही जाती है। शिनजियांग में उइगर और अन्य तुर्किक मुस्लिम समूहों पर धार्मिक प्रथाओं, सांस्कृतिक परंपराओं और रोजमर्रा की आदतों पर गंभीर प्रतिबंध लगाए गए हैं। इनमें इस्लामी अभिवादनों का उपयोग, धार्मिक स्कूलों में जाना और अन्य सामान्य इस्लामी रीति-रिवाज शामिल हैं। सरकारी दस्तावेजों और रिपोर्टों के अनुसार उइगरों को 'अस्सलामु अलैकुम' कहने से बचना पड़ता है क्योंकि इसे धार्मिक अतिवाद का संकेत माना जाता है।
यह नियंत्रण 2017 से तेज हुआ जब बड़े पैमाने पर उइगरों को राजनीतिक शिक्षा शिविरों में रखा गया। इन शिविरों का उद्देश्य 'धार्मिक अतिवाद' को खत्म करना बताया गया लेकिन इसमें सामान्य धार्मिक क्रियाएं जैसे प्रार्थना, उपवास और अभिवादन भी शामिल हो गए। उइगर परिवारों में 'अस्सलामु अलैकुम' जैसे अभिवादन का उपयोग अब निगरानी के दायरे में आता है। सरकार ने 'सिनिसाइजेशन ऑफ इस्लाम' को बढ़ावा दिया है जिसमें धार्मिक स्थलों, रीति-रिवाजों और व्याख्याओं को चीनी विशेषताओं के अनुरूप बनाना शामिल है। मस्जिदों की वास्तुकला में बदलाव, अरबी लिपि हटाना और धार्मिक शिक्षा पर रोक जैसी कार्रवाइयां की गई हैं। 2024 में शिनजियांग में नए नियम लागू हुए जिनमें धार्मिक गतिविधियों को चीनी संस्कृति से जोड़ने पर जोर दिया गया।
रमजान के दौरान भी उइगरों को उपवास करने से रोका जाता है। अधिकारियों द्वारा वीडियो सबूत मांगे जाते हैं कि लोग दिन में खा रहे हैं। रमजान में सामूहिक भोज आयोजित किए जाते हैं ताकि उपवास टूटे। ईद अल-फित्र जैसी छुट्टियों पर मस्जिदों में प्रार्थना पर रोक लगाई गई है। उइगरों पर लगाए गए अन्य प्रतिबंधों में लंबी दाढ़ी रखना, हिजाब पहनना और धार्मिक नाम रखना शामिल है। इन क्रियाओं को 'असामान्य' माना जाता है और इन्हें अतिवाद का संकेत समझा जाता है। बच्चे 18 वर्ष से कम उम्र के धार्मिक शिक्षा या गतिविधियों में भाग नहीं ले सकते। शिनजियांग के बाहर भी हूई मुसलमानों पर प्रभाव पड़ा है जहां अरबी लिपि वाले साइन बोर्ड हटाए गए हैं। हलाल रेस्तरां से 'हलाल' शब्द अरबी में हटाकर चीनी में लिखा गया है। मस्जिदों के गुंबद और मीनारें हटाई गई हैं और उन्हें चीनी शैली में ढाला गया है।
सरकार का कहना है कि ये कदम धार्मिक अतिवाद, आतंकवाद और अलगाववाद को रोकने के लिए हैं। शिनजियांग में सुरक्षा उपायों के तहत निगरानी बढ़ाई गई है जिसमें कैमरे, चेकपॉइंट और स्थानीय समितियां शामिल हैं। उइगरों की दैनिक गतिविधियां ट्रैक की जाती हैं। 2025 में भी ये नीतियां जारी हैं। रमजान और अन्य धार्मिक अवसरों पर निगरानी बढ़ जाती है। उइगरों को राजनीतिक अध्ययन सत्रों में भाग लेना पड़ता है और धार्मिक प्रथाओं से दूर रहने के लिए दबाव डाला जाता है। ये प्रतिबंध उइगर संस्कृति और पहचान को प्रभावित कर रहे हैं। सरकार का दावा है कि ये उपाय क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में इन्हें मानवाधिकार उल्लंघन माना गया है।
What's Your Reaction?