Pakistan Forex Reserves: पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में तेज उछाल, प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने आर्थिक स्थिरता पर दिया बयान

पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में दर्ज किए गए उल्लेखनीय सुधार पर प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ का बयान सामने आया है। उन्होंने इसे आर्थिक स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम बताया।

Sep 19, 2026 - 14:34
 0  2
Pakistan Forex Reserves: पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में तेज उछाल, प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने आर्थिक स्थिरता पर दिया बयान
  • आर्थिक संकट के बीच पाकिस्तान के लिए राहत: विदेशी मुद्रा भंडार में हुआ सुधार, पीएम शहबाज़ शरीफ़ ने बताया नीतियों का असर
  • Pakistan Economy News: विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने पर बोले शहबाज़ शरीफ़, आईएमएफ पैकेज और मित्र देशों के सहयोग की अहम भूमिका
  • पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार सुधरा: डिफॉल्ट के खतरे से उबरे मुल्क की अर्थव्यवस्था पर प्रधानमंत्री ने जताई उम्मीद

इस्लामाबाद। गंभीर आर्थिक संकट, रिकॉर्ड तोड़ महंगाई और भुगतान संतुलन की भारी चुनौतियों से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए विदेशी मुद्रा भंडार के मोर्चे पर राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्रीय बैंक यानी स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश के विदेशी मुद्रा भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वित्तीय दिवालिएपन (सॉवरेन डिफॉल्ट) के मुहाने पर खड़े रहे देश के लिए भंडार में आई इस मजबूती को सरकार अपनी आर्थिक नीतियों की बड़ी सफलता के रूप में देख रही है। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा है कि यह सुधार सरकार के कड़े वित्तीय अनुशासन और आर्थिक पुनरुद्धार की दिशा में उठाए गए कदमों का सीधा परिणाम है।

प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार में दर्ज की गई यह बढ़त देश की अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने का संकेत है। उन्होंने कहा कि विगत समय में मुल्क जिस प्रकार के गंभीर आर्थिक दबाव और अनिश्चितता से गुजर रहा था, उसके मुकाबले अब वित्तीय बाजार में स्थिरता आ रही है। हालांकि, आर्थिक विश्लेषक मानते हैं कि भंडार में यह तात्कालिक इजाफा मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मिले वित्तीय सहायता पैकेज, मित्र देशों से प्राप्त द्विपक्षीय ऋणों और सख्त आयात प्रतिबंधों के चलते संभव हुआ है, न कि निर्यात में किसी बुनियादी उछाल के कारण।

आईएमएफ कार्यक्रम और मित्र देशों के सहारे संभली स्थिति

पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो बीते कुछ वर्षों के दौरान हालात इतने बदतर हो गए थे कि देश का कुल भंडार मात्र तीन से चार अरब डॉलर के आसपास सिमट गया था। उस समय पाकिस्तान के पास मुश्किल से दो से तीन सप्ताह के जरूरी सामानों के आयात का ही भुगतान करने का पैसा बचा था। ऊर्जा और खाद्य संकट के बीच देश पर विदेशी ऋणों के भुगतान में चूक (डिफॉल्ट) का सीधा खतरा मंडरा रहा था।

इस स्थिति से उबरने के लिए पाकिस्तान सरकार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ कड़े आर्थिक सुधारों की शर्तों पर समझौता करना पड़ा। आईएमएफ से बेलआउट पैकेज की किस्तें जारी होने के बाद सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और चीन जैसे मित्र देशों ने भी अपने केंद्रीय बैंकों में जमा राशि को रोलओवर किया और नए ऋण प्रदान किए। इन वित्तीय प्रवाहों के चलते केंद्रीय बैंक के भंडार में प्रत्यक्ष रूप से तेजी दिखाई दी है, जिसे वर्तमान में आधिकारिक हलकों में बड़ी उपलब्धि के तौर पर रेखांकित किया जा रहा है।

  • प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ का संदेश और राजनीतिक संदर्भ

राजधानी इस्लामाबाद में आधिकारिक मंच से बोलते हुए प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने अपनी गठबंधन सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जब उनकी सरकार ने सत्ता संभाली थी, तब देश आर्थिक पतन के कगार पर था। सरकार ने कड़े और अलोकप्रिय फैसले लेकर राष्ट्र के व्यापक आर्थिक हितों को सुरक्षित किया। शरीफ़ ने भरोसा जताया कि विदेशी मुद्रा भंडार में स्थिरता आने से विदेशी निवेशकों का विश्वास बहाल होगा और मुद्रा (पाकिस्तानी रुपया) पर बना अत्यधिक दबाव कम होगा।

इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि केवल ऋणों के सहारे विदेशी मुद्रा भंडार को लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि मुल्क को वास्तविक आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने के लिए कर प्रणाली में सुधार, कर चोरी पर अंकुश, घाटे में चल रहे सरकारी उपक्रमों का निजीकरण और स्थानीय विनिर्माण को गति देना अपरिहार्य है। उन्होंने सरकारी विभागों को निर्देश दिए कि आयात पर निर्भरता घटाने और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को आकर्षित करने के लिए विशेष निवेश सुविधा परिषद (एसआईएफसी) के तहत परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जाए।

  • आयात पर सख्त नियंत्रण और आम नागरिकों पर असर

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने और बढ़ाने की इस प्रक्रिया की एक बड़ी कीमत पाकिस्तान के आम नागरिकों और घरेलू उद्योगों को चुकानी पड़ी है। विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह (आउटफ्लो) को रोकने के लिए स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने गैर-जरूरी वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, ऑटोमोबाइल पुर्जों और औद्योगिक कच्चे माल के आयात पर कड़े प्रतिबंध लगाए।

आयात में इस कृत्रिम कटौती के कारण कई स्थानीय विनिर्माण इकाइयां कच्चे माल की कमी से जूझती रहीं, जिसके चलते उत्पादन घटा और बड़े पैमाने पर छंटनी हुई। इसके साथ ही, आईएमएफ की शर्तों के तहत बिजली, गैस और पेट्रोलियम उत्पादों पर सब्सिडी खत्म करने और भारी टैक्स लगाने से देश में खुदरा महंगाई दर ऐतिहासिक उच्च स्तरों पर पहुंच गई। यही कारण है कि जहां एक तरफ सरकारी स्तर पर विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने का जश्न मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर आम जनता आटा, चीनी, दालों और ऊर्जा के भारी बिलों से त्रस्त है।

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और स्वतंत्र शोधकर्ताओं का कहना है कि पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा संकट तब तक पूरी तरह हल नहीं हो सकता जब तक कि वह अपनी निर्यात क्षमता का विस्तार नहीं करता। पाकिस्तान का मौजूदा विदेशी मुद्रा भंडार मुख्य रूप से बाहरी ऋणों, विदेशों में काम करने वाले पाकिस्तानी प्रवासियों द्वारा भेजे जाने वाले धन (रेमिटेंस) और बेलआउट पैकेजों पर आधारित है।

विशेषज्ञों का आकलन है कि आगामी वर्षों में पाकिस्तान को अरबों डॉलर का विदेशी ऋण चुकाना है। ऐसे में यदि देश का चालू खाता घाटा दोबारा बढ़ता है, तो विदेशी मुद्रा भंडार पर फिर से दबाव आ सकता है। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के बयानों के बावजूद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को स्थायी रूप से संकट से निकालने के लिए निर्यात आधारित औद्योगीकरण, कृषि में आधुनिक तकनीक का प्रयोग और राजनीतिक स्थिरता की सख्त जरूरत बनी हुई है।

Also Read- Al Qaeda 9/11 Video: अल-कायदा ने 9/11 की 25वीं बरसी पर जारी किया नया वीडियो, मृत घोषित हमजा बिन लादेन का पहला फुटेज दिखाकर खड़ा किया नया सस्पेंस

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow