दिल्ली-एनसीआर में आधी रात में उल्कापिंड की चमकदार धारा ने मचाई सनसनी, वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं तेज थीं। ट्विटर पर #DelhiMeteor जैसे ट्रेंड चले। लोग वीडियो शेयर कर रहे थे, कोई कह रहा था, एलियन अटैक तो नहीं? कोई मजा

Sep 21, 2025 - 11:43
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दिल्ली-एनसीआर में आधी रात में उल्कापिंड की चमकदार धारा ने मचाई सनसनी, वीडियो वायरल
दिल्ली-एनसीआर में आधी रात में उल्कापिंड की चमकदार धारा ने मचाई सनसनी, वीडियो वायरल

सुबह करीब 1:20 बजे दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में आसमान अचानक चमक उठा। एक तेज रोशनी की धारा ने रात के अंधेरे को चीर दिया, जिसे देखकर लोग दंग रह गए। यह नजारा कुछ ही सेकंड का था, लेकिन इतना तेज कि शहर की रोशनी को भी फीका कर दिया। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, जयपुर और यहां तक कि अलीगढ़ तक फैले इस क्षेत्र में सैकड़ों लोगों ने इसे देखा। सोशल मीडिया पर वीडियो और फोटो की बाढ़ आ गई, जहां लोग इसे उल्का वर्षा या स्पेस जंक बता रहे थे। अमेरिकन मीटियर सोसाइटी के अनुसार, यह एक ब्राइट बॉलिड था, यानी एक बड़ा उल्कापिंड जो वायुमंडल में जलकर टुकड़ों में बंट गया। इंडिया टुडे और हिंदुस्तान टाइम्स जैसी संस्थाओं ने इसे प्रमुखता से कवर किया, जहां विशेषज्ञों ने बताया कि सितंबर में छोटी-मोटी उल्का गतिविधियां आम हैं। यह घटना न केवल वैज्ञानिक उत्सुकता जगाती है, बल्कि लोगों को आकाशीय घटनाओं की सुंदरता भी याद दिलाती है।

रात के उस समय अधिकांश लोग सो चुके थे, लेकिन जो जाग रहे थे, वे हैरान रह गए। एक नोएडा निवासी ने बताया कि वह रूफटॉप पर बैठा था, तभी आसमान में एक चमकदार गोला दिखा, जो धीरे-धीरे लंबी धारा बन गया और फिर छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट गया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि रोशनी नारंगी-पीली थी, जैसे कोई आग का गोला उड़ रहा हो। कुछ लोगों ने हल्की गड़गड़ाहट भी सुनी, हालांकि यह पुष्टि नहीं हुई। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, यह फ्लैश इतना तेज था कि शहर की स्ट्रीट लाइट्स को पीछे छोड़ दिया। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इसे शूटिंग स्टार एक्सप्लोजन कहा। एक यूजर ने लिखा, यह प्रकृति का अपना लाइट शो था, कितना खूबसूरत। एक अन्य ने कहा, नोएडा में मिडनाइट स्पेक्टेकल, एक ब्लेजिंग एस्टरॉइड ने आसमान रोशन कर दिया। वीडियो में बैकग्राउंड में शहर की इमारतें दिख रही हैं, जो इसकी सत्यता साबित करती हैं।

यह घटना दिल्ली-एनसीआर के अलावा राजस्थान के कुछ हिस्सों तक दिखी। वनइंडिया न्यूज के अनुसार, जयपुर के लोग भी इसे देखकर उत्साहित हो गए। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक मीटियर था, जो पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर जल गया। मीटियर क्या होता है? यह छोटे-बड़े चट्टानों के टुकड़े हैं जो अंतरिक्ष से आते हैं। जब वे वायुमंडल में घुसते हैं, तो घर्षण से गर्म होकर जलने लगते हैं, जिससे रोशनी निकलती है। अगर यह बड़ा हो, तो बॉलिड कहलाता है। अमेरिकन मीटियर सोसाइटी ने बताया कि सितंबर में छोटी उल्का वर्षाएं सक्रिय रहती हैं, हालांकि यह कोई प्रमुख शावर नहीं था। पर्सीड मीटियर शावर अगस्त में पीक पर होता है, लेकिन बिखरे हुए मीटियर कभी भी दिख सकते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा कि इसकी चमक फुल मून से ज्यादा थी, जो इसे दुर्लभ बनाती है।

कुछ लोगों ने इसे स्पेस डेब्रीस बताया। द डेली गार्जियन की रिपोर्ट में कहा गया कि यह चाइनीज सीजेड-3बी रॉकेट के बॉडी का री-एंट्री हो सकता है। स्पेस डेब्रीस क्या है? अंतरिक्ष मिशनों से बचे हुए धातु के टुकड़े जो पृथ्वी की ओर लौटते हैं। वे भी वायुमंडल में जलकर रोशनी छोड़ते हैं। लेकिन विशेषज्ञों ने जल्द ही खारिज कर दिया। एबीपी लाइव के अनुसार, आकार और गति से यह मीटियर ही लगता है। इसरो या नासा ने अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन ग्रोक कमेंट में कहा गया कि यह चाइनीज रॉकेट का डेब्रीस हो सकता है। हालांकि, अधिकांश वैज्ञानिक मीटियर की ओर झुक रहे हैं। हिंदुस्तान टाइम्स ने एक विशेषज्ञ के हवाले से कहा, यह एक फायरबॉल था, जो मीटियर से जुड़ा है।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं तेज थीं। ट्विटर पर #DelhiMeteor जैसे ट्रेंड चले। लोग वीडियो शेयर कर रहे थे, कोई कह रहा था, एलियन अटैक तो नहीं? कोई मजाक उड़ा रहा था, अगली बार फायरवर्क्स मत भूलना। एक यूजर ने लिखा, दिल्ली का आसमान सिनेमा हॉल बन गया। वीडियो में फ्रैगमेंटेशन साफ दिख रही है, जहां मुख्य गोला टूटकर छोटे चमकते टुकड़ों में बदल गया। यह कुछ सेकंड चला, लेकिन लोगों की यादों में बस गया। मनीकंट्रोल ने बताया कि अलीगढ़ तक दिखा, जो 150 किलोमीटर दूर है। इससे पता चलता है कि यह ऊंचाई पर था। वैज्ञानिक कहते हैं कि मीटियर की स्पीड 25,000 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा होती है, इसलिए यह तेज दिखता है।

यह घटना लोगों को आकाश की ओर नजर डालने पर मजबूर कर गई। प्लैनेटरी सोसाइटी की सितंबर गाइड में कहा गया कि इस महीने जूपिटर और वीनस सुबह के आसमान में चमक रहे हैं, लेकिन यह मीटियर अप्रत्याशित था। टाइम एंड डेट की नाइट स्काई मैप से पता चलता है कि 21 सितंबर को सैटर्न विपोजिशन पर है, लेकिन रात के इस समय कुछ खास नहीं था। इसलिए यह रहस्यमयी लगा। विशेषज्ञों ने सलाह दी कि ऐसी घटनाओं को रिपोर्ट करें, ताकि वैज्ञानिक अध्ययन कर सकें। अमेरिकन मीटियर सोसाइटी ने रिपोर्ट्स इकट्ठा कीं, जहां दर्जनों गवाहियां आईं। एक रिपोर्ट में कहा गया कि यह पर्सीड शावर का हिस्सा हो सकता है, हालांकि पीक बीत चुका था।

दिल्ली में प्रदूषण के कारण रात का आसमान साफ कम दिखता है, इसलिए यह नजारा और खास था। हिंदुस्तान टाइम्स ने लिखा कि शहर की लाइट्स के बावजूद यह चमका। लोग बालकनी से, छत से या कार से लौटते हुए इसे देख रहे थे। एक व्यक्ति ने बताया कि वह ऑफिस से लौट रहा था, भिकाजी कामा प्लेस के पास 1:25 बजे देखा। ग्रेटर नोएडा में इसे सिनेमैटिक मोमेंट कहा। वीडियो में ध्वनि भी कैद हुई, जो दुर्लभ है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मीटियर बड़ा होता तो धमाका सुनाई देता। लेकिन यहां सिर्फ हल्की आवाज आई। टाइम्स ऑफ इंडिया ने मीटियर साइंस समझाया: इनका साइज कुछ ग्राम से किलोमीटर तक, कंपोजिशन चट्टान या धातु। वे धूमकेतु या एस्टरॉइड से आते हैं।

यह घटना वैज्ञानिक जिज्ञासा बढ़ाती है। इसरो के वैज्ञानिकों ने कहा कि वे ट्रैक कर रहे हैं। अगर स्पेस जंक होता तो नोटिस आता। लेकिन फिलहाल मीटियर ही माना जा रहा है। सोशल मीडिया ने इसे वायरल बनाया, जहां लाखों व्यूज आए। लोग शेयर कर रहे थे, कोई डर गया, कोई खुश। एक पोस्ट में लिखा, प्रकृति का जादू देखा। एक अन्य ने कहा, अगली बार टेलीस्कोप रखना। यह हमें याद दिलाता है कि आसमान में रोज नई घटनाएं हो रही हैं। सितंबर में ऑटमल इक्विनॉक्स 22 तारीख को है, जो और आकाशीय दृश्य लाएगा।

लोगों की प्रतिक्रियाएं मिश्रित थीं। कुछ ने इसे एलियन शिप कहा, लेकिन ज्यादातर उत्साहित थे। एबीपी लाइव ने वीडियो दिखाया, जहां फ्रैगमेंट्स साफ दिखे। यह दिल्ली के लिए दुर्लभ था, क्योंकि पिछली बार 2023 में कुछ ऐसा हुआ था। विशेषज्ञ कहते हैं कि भारत में सालाना हजारों मीटियर गिरते हैं, लेकिन ज्यादातर अनदेखे। यह घटना जागरूकता बढ़ाएगी। प्रशासन ने कोई चेतावनी नहीं दी, क्योंकि खतरा नहीं था। लेकिन लोगों को सलाह दी गई कि ऐसी चीजें देखें तो रिपोर्ट करें।

अंत में, यह नजारा हमें प्रकृति की सुंदरता दिखाता है। दिल्ली का व्यस्त जीवन में ऐसा पल मिलना सौभाग्य था। उम्मीद है कि भविष्य में और ऐसी घटनाएं होंगी, जो हमें आकाश की ओर देखने को प्रेरित करें। वैज्ञानिक अध्ययन से नई खोजें होंगी। यह रात दिल्लीवालों की यादों में बनी रहेगी।

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