UP News: बाराबंकी में खड़ी कार का गोरखपुर में कट गया टोल, 45 दिन बाद सामने आया फर्जीवाड़े का अनोखा खेल
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में खड़ी कार का गोरखपुर में टोल टैक्स कटने का अजीब मामला आया है। करीब 45 दिन की छानबीन के बाद एक ही नंबर की दूसरी कार बरामद हुई है।

- Barabanki Duplicate Car Case: एक ही नंबर की दो कारें देख पुलिस भी हैरान, टोल टैक्स मैसेज से खुला जालसाजी का राज
- अजब-गजब: गैराज में खड़ी थी कार और गोरखपुर में कट रहा था फास्टैग टोल, डेढ़ महीने बाद खुली बड़ी मिस्ट्री
- यूपी में फर्जी नंबर प्लेट का बड़ा खुलासा: बाराबंकी में खड़ी कार का गोरखपुर में कटा टोल, मिली दूसरी हुबहू गाड़ी
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और गोरखपुर जिले के बीच वाहन जालसाजी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। बाराबंकी में एक मकान के बाहर खड़ी कार का अचानक गोरखपुर के टोल प्लाजा पर फास्टैग (Fastag) टोल कट गया। जुलाई 2026 में पीड़ित कार मालिक को जब मोबाइल पर इसका मैसेज मिला, तो उनके होश उड़ गए क्योंकि गाड़ी कई दिनों से घर से बाहर ही नहीं निकली थी। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस और साइबर सेल ने जब तफ्तीश शुरू की, तो करीब 45 दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पुलिस ने हूबहू उसी नंबर और मॉडल की दूसरी कार को बरामद कर लिया है, जो फर्जी नंबर प्लेट लगाकर सड़कों पर दौड़ रही थी। इस घटना के बाद आरटीओ (RTO) और पुलिस प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूरी तरह सतर्क हो गया है।
यह पूरा मामला डिजिटल तकनीक और भौतिक जालसाजी के गठजोड़ से जुड़ा है। बाराबंकी के रहने वाले एक कार मालिक की गाड़ी उनके घर पर खड़ी थी, लेकिन उनके बैंक खाते से लिंक फास्टैग से गोरखपुर के एक टोल प्लाजा पर पैसे कटने का अलर्ट आया। तकनीकी खराबी मानकर शुरू हुई यह शिकायत अंततः एक बड़े आपराधिक सांठगांठ में तब्दील हो गई। छानबीन के दौरान यह साफ हो गया कि यह सिर्फ फास्टैग की कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं थी, बल्कि किसी शातिर गिरोह या व्यक्ति द्वारा एक ही नंबर और पहचान की दो गाड़ियों को समानांतर रूप से चलाया जा रहा था ताकि टैक्स चोरी या किसी अन्य गैर-कानूनी गतिविधि को अंजाम दिया जा सके।
घटनाक्रम की शुरुआत करीब डेढ़ महीने पहले हुई जब बाराबंकी निवासी पीड़ित के मोबाइल पर एक मैसेज आया। मैसेज में बताया गया कि उनकी कार ने गोरखपुर के टोल प्लाजा को पार किया है और निर्धारित टोल टैक्स काट लिया गया है। पीड़ित हैरान था क्योंकि उसकी कार बाराबंकी में उसके सामने खड़ी थी। उसने तुरंत टोल प्रबंधन और स्थानीय पुलिस को इस मामले की लिखित सूचना दी।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया और टोल प्लाजा के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले। फुटेज में जो कार टोल पार करती दिखी, उसका नंबर और मॉडल पूरी तरह पीड़ित की कार जैसा ही था। इसके बाद पुलिस ने जाल बिछाया और संदिग्ध रूटों पर सर्विलांस की मदद ली। करीब 45 दिनों तक चली लंबी खोजबीन और नाकेबंदी के बाद आखिरकार पुलिस ने उस दूसरी कार को ढूंढ निकाला। जब दोनों कारों को आमने-सामने खड़ा किया गया, तो पुलिस अधिकारी भी हक्के-बक्के रह गए। दूसरी कार पर फर्जी तरीके से पीड़ित की कार का ही नंबर दर्ज था, जिससे टोल बूथों के ऑटोमैटिक स्कैनर गच्चा खा रहे थे।
इस अनोखे और गंभीर मामले में विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएं इस प्रकार हैं:
पीड़ित कार मालिक: पीड़ित ने राहत की सांस लेते हुए कहा कि शुरुआत में वह बेहद डरा हुआ था। उसे डर था कि अगर उस फर्जी कार से कोई बड़ा अपराध या दुर्घटना हो जाती, तो पुलिस उसके घर पहुंच जाती। उसने पुलिस की मुस्तैदी की सराहना की है।
बाराबंकी पुलिस प्रशासन: पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सीधे तौर पर धोखाधड़ी और जालसाजी का है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी नंबर प्लेट लगाने के पीछे का मुख्य उद्देश्य क्या था। क्या इस कार का इस्तेमाल किसी अवैध गतिविधि या तस्करी में किया जा रहा था?
परिवहन विभाग (RTO) के अधिकारी: आरटीओ अधिकारियों के मुताबिक, हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) के दौर में इस तरह का फर्जीवाड़ा बेहद गंभीर है। चेसिस नंबर और इंजन नंबर के मिलान के बाद ही आगे की सख्त दंडात्मक कार्रवाई तय की जाएगी।
इस घटना ने पूरे उत्तर प्रदेश में वाहन सुरक्षा और फास्टैग स्कैनिंग प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान में गाड़ियों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) लगाना अनिवार्य है, ताकि नंबरों की नकल न की जा सके। इसके बावजूद अगर 45 दिनों तक एक ही नंबर की दूसरी गाड़ी सड़कों पर खुलेआम घूमती रही, तो यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है। इस खुलासे के बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और स्थानीय पुलिस टोल प्लाजा पर सुरक्षा मानकों को और कड़ा करने पर विचार कर रही है ताकि केवल नंबर प्लेट ही नहीं, बल्कि वाहन के अन्य डिजिटल आरएफआईडी (RFID) डेटा का भी सटीक मिलान हो सके।
बाराबंकी पुलिस ने फर्जी कार को अपने कब्जे में ले लिया है और उसके चालक व मालिक के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी और मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने यह नंबर प्लेट कहाँ से बनवाई थी। पुलिस को आशंका है कि इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह हो सकता है जो चोरी की गाड़ियों को खपाने के लिए वैध गाड़ियों के नंबरों का इस्तेमाल करता है। आने वाले दिनों में जिले के सभी प्रमुख चेक-पॉइंट्स पर नंबर प्लेटों की औचक जांच का एक विशेष अभियान चलाया जाएगा।
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