Noida Ghaziabad Pollution Control: 1 अक्टूबर से बिना वैलिड PUCC गाड़ियों को नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल, प्रशासन ने कड़े किए नियम

नोएडा और गाजियाबाद में 1 अक्टूबर से वैध प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUCC) न होने पर पेट्रोल पंपों से ईंधन नहीं मिलेगा। प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रशासन ने दिशा-निर्देश जारी किए।

Sep 20, 2026 - 14:30
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Noida Ghaziabad Pollution Control: 1 अक्टूबर से बिना वैलिड PUCC गाड़ियों को नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल, प्रशासन ने कड़े किए नियम

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सर्दियों की शुरुआत से पहले वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए उत्तर प्रदेश प्रशासन ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। गौतमबुद्ध नगर (नोएडा-ग्रेटर नोएडा) और गाजियाबाद जनपदों में वाहनों से निकलने वाले जहरीले धुएं पर लगाम कसने के लिए 'नो पीयूसीसी, नो फ्यूल' (No PUCC, No Fuel) व्यवस्था को सख्ती से लागू करने की तैयारी की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, आगामी 1 अक्टूबर से जिन वाहनों के पास वैध 'पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट' (PUCC) नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल, डीजल या सीएनजी नहीं दी जाएगी।

शीत ऋतु के आगमन के साथ ही पूरे दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। पराली और औद्योगिक धुएं के साथ-साथ सड़क पर चलने वाले लाखों पुराने व अनफिट वाहन इस प्रदूषण के प्रमुख कारक बनते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और पुलिस विभाग ने संयुक्त रणनीति के तहत पेट्रोल पंप स्तर पर ही इस व्यवस्था को लागू करने का निर्णय लिया है।

पेट्रोल पंपों पर जांच की कार्यप्रणाली

इस नए नियम को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ईंधन स्टेशनों पर तकनीकी व्यवस्था और मानवीय निगरानी दोनों का सहारा लेने की योजना बना रहा है। पेट्रोल पंप संचालकों और डीलर्स एसोसिएशन के साथ प्रशासनिक बैठकों में स्पष्ट निर्देश दिए जा रहे हैं कि नोजल ऑपरेटर ईंधन डालने से पहले संबंधित वाहन के पीयूसीसी की वैधता सुनिश्चित करेंगे।

इसके लिए दोहरे स्तर पर सत्यापन की रूपरेखा तैयार की जा रही है:

  1. डिजिटल डेटाबेस का उपयोग: अधिकांश प्रमुख पेट्रोल पंपों पर लगे ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों और पीओएस मशीनों को केंद्रीय 'वाहन' (Vahan) पोर्टल के डेटाबेस से जोड़ने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है, जिससे वाहन का नंबर दर्ज होते ही प्रदूषण प्रमाण पत्र की स्थिति स्क्रीन पर दिख सके।

  2. भौतिक सत्यापन (मैनुअल चेक): जब तक तकनीकी प्रणाली सभी पंपों पर पूरी तरह सुचारू नहीं होती, तब तक वाहन चालकों को ईंधन भरवाने से पहले वैध पीयूसीसी की मूल प्रति या एम-परिवहन (mParivahan) ऐप पर डिजिटल प्रति दिखाना अनिवार्य किया जा सकता है।

आम वाहन चालकों पर क्या होगा सीधा असर?

इस निर्णय का सीधा प्रभाव नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद की सड़कों पर नियमित रूप से आवाजाही करने वाले लाखों दोपहिया, चारपहिया और व्यावसायिक वाहन मालिकों पर पड़ेगा। विशेष रूप से दिल्ली, फरीदाबाद, हापुड़ या मेरठ से रोजाना एनसीआर में प्रवेश करने वाले वाहनों को भी इस जांच के दायरे में आना होगा।

यदि किसी वाहन का प्रदूषण प्रमाण पत्र समाप्त हो चुका है, तो उसे ईंधन पंप पर सीधे इनकार का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में ईंधन समाप्त होने पर वाहन बीच रास्ते में खड़े होने का जोखिम बढ़ सकता है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे 1 अक्टूबर की अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते अपने वाहनों की जांच कराकर नया प्रमाण पत्र बनवा लें।

प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUCC) की वैधता और नियम

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के मानकों के अनुसार वाहनों के लिए पीयूसीसी से जुड़े नियम इस प्रकार हैं:

  • नए वाहन: शोरूम से निकलने वाले नए वाहनों के लिए पंजीकरण की तारीख से एक वर्ष तक किसी अलग प्रदूषण प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं होती है। उनका निर्माण प्रमाण पत्र ही एक वर्ष के लिए मान्य होता है।

  • बीएस-4 और बीएस-6 वाहन: आधुनिक मानकों (BS-IV और BS-VI) वाले वाहनों के उत्सर्जन परीक्षण के बाद जारी होने वाला पीयूसीसी सामान्यतः एक वर्ष की अवधि के लिए वैध रहता है।

  • पुराने वाहन (बीएस-3 या उससे पहले): पुराने उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों के लिए प्रमाण पत्र की वैधता केवल 3 से 6 महीने की होती है, जिसे समय-समय पर नवीनीकृत कराना पड़ता है।

नियम उल्लंघन पर भारी जुर्माने का प्रावधान

मोटर वाहन अधिनियम (संशोधित) के अनुसार बिना वैध पीयूसीसी के सार्वजनिक मार्ग पर वाहन चलाना पहले से ही एक गंभीर विधिक उल्लंघन है। धारा 190(2) के तहत बिना वैध प्रमाण पत्र के पकड़े जाने पर वाहन चालक पर 10,000 रुपये तक का चालान या छह महीने तक की जेल (या दोनों) का प्रावधान है।

प्रशासन का मानना है कि केवल चालान काटने से लोग अक्सर लापरवाही बरतते हैं, लेकिन जब ईंधन मिलने पर ही रोक लग जाएगी, तो वाहन मालिक स्वतः ही समय पर अपने वाहनों की मरम्मत और प्रदूषण जांच कराने के लिए बाध्य होंगे। इससे सड़कों पर अनियंत्रित धुआं छोड़ती गाड़ियों की संख्या में तत्काल कमी आने की उम्मीद है।

प्रदूषण जांच केंद्र बढ़ाने की तैयारी

नियम लागू होने के बाद पेट्रोल पंपों और आरटीओ से अधिकृत केंद्रों पर वाहनों की लंबी कतारें लगने की संभावना है। इसे देखते हुए दोनों जिलों के संभागीय परिवहन कार्यालयों (एआरटीओ) ने अधिकृत प्रदूषण जांच केंद्रों की क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

अधिकारियों का कहना है कि पेट्रोल पंपों पर स्थित पीयूसीसी केंद्रों पर जांच उपकरणों को कैलिब्रेट रखने और ऑपरेटरों की निरंतर मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि यदि कोई वाहन चालक पंप पर पहुंचता है और उसका प्रमाण पत्र समाप्त पाया जाता है, तो वह तुरंत वहीं जांच कराकर नया प्रमाण पत्र प्राप्त कर सके और उसे ईंधन प्राप्त करने में अनावश्यक परेशानी न हो।

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