मथुरा-वृंदावन में आवारा गोवंश का आतंक- सांड़ों की लड़ाई से दुकान में मची अफरा-तफरी, वीडियो वायरल।
Mathura Viral News: मथुरा और वृंदावन में आवारा गोवंश का आतंक दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। हाल ही में एक ऐसा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें दो सांड़ आपस में लड़ते हुए एक दुकान में जा घुसे। इस
मथुरा और वृंदावन में आवारा गोवंश का आतंक दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। हाल ही में एक ऐसा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें दो सांड़ आपस में लड़ते हुए एक दुकान में जा घुसे। इस दौरान वहां मौजूद एक पुलिसकर्मी ने सांड़ों को अपनी ओर आता देख तुरंत एक तरफ हटकर अपनी जान बचाई। अगर वह समय रहते नहीं हटता, तो बड़ा हादसा हो सकता था। यह घटना मथुरा के वृंदावन क्षेत्र में हुई और स्थानीय लोगों में इसने डर और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है। लोग प्रशासन और नगर निगम से इस समस्या का जल्द समाधान करने की मांग कर रहे हैं।
यह घटना बुधवार दोपहर करीब 12:30 बजे वृंदावन के रमणरेती चौराहे के पास हुई। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दो सांड़ सड़क पर आपस में भिड़ रहे हैं। दोनों एक-दूसरे पर सींगों से हमला कर रहे थे, जिससे आसपास के लोग डर गए। सांड़ों की यह लड़ाई सड़क से होती हुई पास की एक छोटी सी किराने की दुकान तक पहुंच गई। दुकान के बाहर बैठा एक पुलिसकर्मी सांड़ों को अपनी ओर आता देख तुरंत उठकर एक तरफ हट गया। इसके बाद सांड़ दुकान के अंदर घुस गए और वहां रखा सामान तहस-नहस कर दिया। दुकानदार ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई, लेकिन दुकान में काफी नुकसान हुआ। इस घटना में किसी को गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन यह वाकया लोगों के लिए एक चेतावनी बन गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वृंदावन और मथुरा में आवारा गोवंश की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। सड़कों पर घूमने वाले सांड़ और गायें आए दिन हादसों का कारण बन रही हैं। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि ये आवारा पशु अक्सर सड़कों पर आपस में लड़ते हैं या वाहनों के पीछे दौड़ पड़ते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। विशेष रूप से वृंदावन जैसे धार्मिक स्थल पर, जहां हर दिन हजारों श्रद्धालु आते हैं, ऐसी घटनाएं पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए खतरा बन रही हैं। एक दुकानदार ने बताया कि कुछ महीने पहले एक सांड़ ने सड़क पर चल रहे एक व्यक्ति को टक्कर मार दी थी, जिससे उसे गंभीर चोटें आई थीं।
लोगों का यह भी कहना है कि नगर निगम और प्रशासन इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं है। कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। वृंदावन के एक निवासी ने बताया कि कुछ समय पहले प्रशासन ने आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान शुरू किया था, लेकिन वह जल्द ही बंद हो गया। नतीजा यह है कि सड़कों पर आवारा गोवंश की संख्या बढ़ती जा रही है। लोग मांग कर रहे हैं कि इन पशुओं को गोशालाओं में रखा जाए और सड़कों को सुरक्षित किया जाए।
इस घटना के वायरल वीडियो ने लोगों का ध्यान एक बार फिर इस समस्या की ओर खींचा है। सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को शेयर करते हुए प्रशासन की लापरवाही की आलोचना कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा कि वृंदावन जैसे पवित्र स्थान पर ऐसी घटनाएं शर्मनाक हैं और प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया कि जब एक पुलिसकर्मी को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ रहा है, तो आम लोगों की सुरक्षा का क्या हाल होगा।
वृंदावन और मथुरा में आवारा गोवंश की समस्या कोई नई बात नहीं है। पहले भी कई बार ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कुछ समय पहले मथुरा में 40 से अधिक मृत गोवंश मिलने की घटना ने लोगों को झकझोर दिया था। उस समय भी स्थानीय लोगों और गौ रक्षकों ने सड़क जाम कर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इसके बावजूद स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि आवारा पशुओं की समस्या का समाधान तभी संभव है, जब उनके लिए पर्याप्त गोशालाएं बनाई जाएं और सड़कों पर उनके घूमने पर रोक लगे।
स्थानीय प्रशासन ने इस घटना के बाद कुछ कदम उठाने की बात कही है। एक अधिकारी ने बताया कि नगर निगम जल्द ही आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए एक विशेष अभियान शुरू करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सड़कों पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए नाले और अन्य खतरनाक स्थानों को चिह्नित किया जाएगा। हालांकि, लोगों का कहना है कि ऐसी घोषणाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं, लेकिन धरातल पर कोई बदलाव नहीं दिखता।
इस घटना ने एक बार फिर मथुरा-वृंदावन में आवारा गोवंश की समस्या को सुर्खियों में ला दिया है। लोग चाहते हैं कि प्रशासन इस दिशा में ठोस और स्थायी कदम उठाए। विशेष रूप से धार्मिक और पर्यटक स्थल होने के कारण वृंदावन में ऐसी घटनाएं न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी खतरा बन रही हैं। लोग मांग कर रहे हैं कि सड़कों को सुरक्षित करने के लिए तत्काल कार्रवाई की जाए और आवारा पशुओं को गोशालाओं में स्थानांतरित किया जाए।
इसके अलावा, कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया है कि गोशालाओं की स्थिति को बेहतर करने के लिए सामाजिक संगठनों और सरकार को मिलकर काम करना चाहिए। वृंदावन में कई प्राचीन गोशालाएं हैं, जो समाज के सहयोग से चलती हैं, लेकिन उनकी क्षमता सीमित है। अगर इन गोशालाओं को और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो आवारा पशुओं की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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