जमशेदपुर में बैंक लॉकर से 30 लाख के सोने की चोरी का खुलासा, बैंक क्लर्क गिरफ्तार; लॉकर की सुरक्षा के लिए अपनाएं ये जरूरी कदम। 

झारखंड के जमशेदपुर में बैंक लॉकर से सोने की चोरी का मामला सामने आया है, जहां बैंक के ही एक क्लर्क को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार,

Dec 20, 2025 - 12:03
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जमशेदपुर में बैंक लॉकर से 30 लाख के सोने की चोरी का खुलासा, बैंक क्लर्क गिरफ्तार; लॉकर की सुरक्षा के लिए अपनाएं ये जरूरी कदम। 
जमशेदपुर में बैंक लॉकर से 30 लाख के सोने की चोरी का खुलासा, बैंक क्लर्क गिरफ्तार; लॉकर की सुरक्षा के लिए अपनाएं ये जरूरी कदम। 

झारखंड के जमशेदपुर में बैंक लॉकर से सोने की चोरी का मामला सामने आया है, जहां बैंक के ही एक क्लर्क को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी संजय कुमार यादव बैंक ऑफ इंडिया की बिस्टुपुर ब्रांच में क्लर्क के रूप में कार्यरत था। घटना 16 दिसंबर 2025 को बैंक ब्रांच मैनेजर द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद उजागर हुई, जब लॉकर रूम से लगभग 500 ग्राम सोने के आभूषण गायब पाए गए, जिनकी कीमत 30 लाख रुपये आंकी गई है। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि आरोपी ने लॉकर रूम का ताला तोड़कर चोरी की थी। आरोपी को 17 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया और उसके कब्जे से चोरी का सामान बरामद कर लिया गया। डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (सिटी) निरंजन तिवारी ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले की आगे जांच जारी है। इस घटना से बैंक लॉकरों की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं, और पुलिस ने बैंक प्रबंधन से सहयोग लेकर मामले की तह तक पहुंची।

एक अन्य रिपोर्ट में जमशेदपुर के ही मंगल क्षेत्र में रहने वाले 38 वर्षीय क्लर्क शत्रुघ्न कुमार चौधरी को बैंक ऑफ बड़ौदा की जाकिरनगर ब्रांच से 30 लाख रुपये के सोने की चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया। यह शिकायत 11 दिसंबर 2025 को बैंक प्रबंधन द्वारा आजादनगर पुलिस में दर्ज की गई थी। जांच में आरोपी को मुख्य संदिग्ध पाया गया, और पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या इसमें कोई साथी शामिल था। दोनों मामलों में चोरी की राशि और तरीका समान है, जहां बैंक कर्मचारी ने लॉकर रूम तक पहुंच का फायदा उठाया। इन घटनाओं से बैंक ग्राहकों में लॉकर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है, और पुलिस ने आगे की जांच के लिए टीम गठित की है।

बैंक लॉकरों की सुरक्षा के लिए आरबीआई की नई गाइडलाइंस लागू हैं, जो 1 जनवरी 2023 से प्रभावी हैं। इन नियमों के तहत बैंक लॉकर किराएदार और बैंक के बीच रिश्ता लेसर और लीसी का है, जहां बैंक केवल स्पेस प्रदान करता है। ग्राहक को लॉकर में रखे सामान की पूरी जिम्मेदारी खुद लेनी होती है। यदि बैंक की लापरवाही से नुकसान होता है, जैसे आग, चोरी या बैंक कर्मचारी की धोखाधड़ी, तो बैंक की देयता सालाना लॉकर किराए के 100 गुना तक सीमित है। हालांकि, प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, भूकंप या दंगों में बैंक जिम्मेदार नहीं होता। ग्राहकों को लॉकर एग्रीमेंट ध्यान से पढ़ना चाहिए और उसकी कॉपी रखनी चाहिए। लॉकर का कम से कम साल में एक बार ऑपरेट करना जरूरी है, वरना बैंक इसे इनऑपरेटिव मान सकता है।

लॉकर की सुरक्षा के लिए ग्राहकों को वैल्यूएबल्स की इन्वेंटरी लिस्ट बनानी चाहिए, जिसमें रखे गए आइटम्स का विवरण हो। इस लिस्ट को अपडेट रखें और आइटम्स ऐड या रिमूव करने पर बदलाव दर्ज करें। लॉकर में रखे सामान की वैल्यूएशन करवाएं और इंश्योरेंस पॉलिसी लें, क्योंकि बैंक लॉकर कंटेंट का इंश्योरेंस नहीं करता। थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कंपनियां जैसे टाटा एआईजी या इफको-टोकियो से लॉकर इंश्योरेंस लिया जा सकता है, जो चोरी, आग या बर्गलरी से कवर करता है। लॉकर की चाबी सुरक्षित रखें और कभी किसी को न दें। यदि चाबी खो जाती है, तो तुरंत बैंक को सूचित करें और रिप्लेसमेंट कॉस्ट वहन करें। यदि चाबी मिल जाए तो वापस लौटाएं।

बैंक लॉकर में नकदी या मुद्रा नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि यह प्रतिबंधित है। हथियार, अवैध सामग्री या खतरनाक चीजें भी नहीं रखी जा सकतीं। लॉकर रेंट समय पर पे करें, वरना तीन साल के नॉन-पेमेंट पर बैंक लॉकर तोड़ सकता है। नए ग्राहकों से बैंक तीन साल का टर्म डिपॉजिट मांग सकता है, लेकिन यदि सेविंग्स बैलेंस पर्याप्त हो तो नहीं। लॉकर एग्रीमेंट में केवाईसी अपडेट रखें, वरना लॉकर फ्रीज हो सकता है। बैंक को ईमेल और मोबाइल नंबर अपडेट रखें, क्योंकि लॉकर ऑपरेशन पर एसएमएस या ईमेल अलर्ट आते हैं। सीसीटीवी कैमरा और 180 दिन की रिकॉर्डिंग आरबीआई की आवश्यकता है, जो सुरक्षा बढ़ाती है।

यदि लॉकर से चोरी होती है, तो सबसे पहले पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराएं। बैंक को क्लेम फाइल करें, जिसमें इन्वेंटरी और वैल्यूएशन सर्टिफिकेट शामिल हों। यदि बैंक इनकार करता है, तो कानूनी कार्रवाई करें, लेकिन कंपनसेशन 100 गुना रेंट तक सीमित है। लॉकर में रखे सामान की वैल्यू 100 गुना रेंट से ज्यादा न रखें, बाकी को घर के सेफ में रखें। घर के सेफ को रेपुटेड मैन्युफैक्चरर से खरीदें। लॉकर में रखे सामान की वैल्यूएशन हर 2-3 साल में अपडेट करवाएं। नॉमिनी या संयुक्त होल्डर जोड़ें, ताकि अनहोनी में वारिसों को एक्सेस मिले। लॉकर में विल या इन्वेंटरी न रखें, इन्हें घर पर रखें।

बैंक लॉकर इंश्योरेंस बेच नहीं सकते, इसलिए बाहरी इंश्योरेंस लें। इंश्योरेंस पॉलिसी में ऑल-रिस्क कवर चुनें, जो 100% वैल्यू कवर करता है। प्रीमियम आइटम वैल्यू पर निर्भर करता है। लॉकर एक्सेस के दौरान गोपनीय जानकारी शील्ड करें। लॉकर रूम में सीसीटीवी और बर्गलर अलार्म होने चाहिए। यदि लॉकर इनऑपरेटिव है, तो बैंक ब्रेक ओपन कर सकता है, लेकिन नोटिस, कारण, बैंक ऑफिसर्स की मौजूदगी, दो गवाह, वीडियो रिकॉर्डिंग और इन्वेंटरी कम्युनिकेशन के साथ। लॉकर किराए का भुगतान एडवांस में करें।

आरबीआई नियमों के तहत बैंक लॉकर एंट्री/एग्जिट पॉइंट्स पर सीसीटीवी इंस्टॉल करेंगे। ग्राहक की निग्लिजेंस जैसे चाबी खोना या लॉकर ठीक से बंद न करना, तो बैंक जिम्मेदार नहीं। एक्ट ऑफ गॉड जैसे बाढ़, भूकंप या दंगे में बैंक लायबल नहीं। यदि बैंक की लापरवाही साबित हो, जैसे खराब मेंटेनेंस से बिल्डिंग कोलैप्स, तो लायबिलिटी लागू होती है, लेकिन कैप्ड। लॉकर में रखे सामान को स्प्लिट करें, ताकि एक जगह सब न हो। इन्वेंटरी घर पर रखें। इंश्योरेंस में वैल्यूएशन सर्टिफिकेट जमा करें। बैंक लॉकर फिजिकल सिक्योरिटी देते हैं, लेकिन इंश्योरेंस फाइनेंशियल लॉस कवर करता है। लॉकर रेंट मेट्रो में एक्स्ट्रा स्मॉल के लिए 1350 रुपये से एक्स्ट्रा लार्ज के लिए 20000 रुपये तक होता है, रूरल में कम।

इन घटनाओं से साफ है कि बैंक लॉकर पूरी तरह सुरक्षित नहीं, इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतनी चाहिए। चोरी के मामलों में पुलिस एफआईआर अनिवार्य है। बैंक से क्लेम में डिजिटल ट्रेल जैसे अलर्ट्स का उपयोग करें। यदि क्लेम डिनाइड, तो कंज्यूमर कोर्ट जा सकते हैं। लॉकर एग्रीमेंट में प्रोहिबिटेड आइटम्स का ध्यान रखें। बैंक कर्मचारी की धोखाधड़ी में बैंक विकेरियस लायबल है। कुल मिलाकर, लॉकर सुरक्षा के लिए इन्वेंटरी, इंश्योरेंस, रेगुलर ऑपरेशन और अलर्ट मॉनिटरिंग जरूरी हैं।

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