हरियाणा के फरीदाबाद में बड़ा निर्माण हादसा: जेवर एक्सप्रेसवे फ्लाईओवर के काम के दौरान क्रेन पलटने से तीन श्रमिकों की दर्दनाक मौत, एक गंभीर रूप से घायल।
हरियाणा के औद्योगिक शहर फरीदाबाद में एक बेहद दुखद और भीषण औद्योगिक दुर्घटना सामने आई है, जिसने निर्माण
- सुरक्षा मानकों की अनदेखी पड़ी भारी: विशालकाय क्रेन असंतुलित होकर पलटी, मलबे और लोहे के भारी-भरकम ढांचे के नीचे दबने से मजदूरों ने गंवाई जान।
- प्रशासनिक मुस्तैदी और राहत कार्य: फरीदाबाद प्रशासन ने शुरू की उच्च स्तरीय जांच, हताहतों के परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा और निर्माण स्थल पर सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश।
हरियाणा के औद्योगिक शहर फरीदाबाद में एक बेहद दुखद और भीषण औद्योगिक दुर्घटना सामने आई है, जिसने निर्माण कार्यों के दौरान बरती जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली-एनसीआर को उत्तर प्रदेश के जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से जोड़ने के लिए बनाए जा रहे बेहद महत्वपूर्ण जेवर एक्सप्रेसवे परियोजना के तहत फरीदाबाद क्षेत्र में एक विशाल फ्लाईओवर का निर्माण कार्य चल रहा था। इसी निर्माण स्थल पर काम के दौरान अचानक एक बेहद भारी-भरकम हाइड्रोलिक क्रेन अनियंत्रित होकर पलट गई, जिसकी चपेट में वहां मौजूद कई श्रमिक आ गए। इस हृदयविदारक हादसे में अब तक तीन स्थानीय और प्रवासी मजदूरों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि एक अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हुआ है, जिसे आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल के आईसीयू वार्ड में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है, जहां चिकित्सक उसकी जान बचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
यह भयानक हादसा उस समय घटित हुआ जब एक्सप्रेसवे के ऊंचे खंभों के ऊपर कंक्रीट के भारी गर्डर और गेंट्री को क्रेन की मदद से स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों और मौके पर काम कर रहे अन्य कर्मियों के अनुसार, क्रेन की क्षमता से अधिक भार होने या फिर जमीन की सतह के धंसने के कारण अचानक क्रेन का संतुलन बिगड़ गया और वह तेज आवाज के साथ एक तरफ झुकती चली गई। क्रेन को संभाल रहे ऑपरेटर ने नियंत्रण खो दिया और देखते ही देखते विशालकाय लोहे का ढांचा सीधे नीचे काम कर रहे मजदूरों के ऊपर जा गिरा। क्रेन के विशालकाय बूम और लोहे के केबलों के नीचे दब जाने के कारण निर्माण स्थल पर चीख-पुकार मच गई और वहां मौजूद अन्य कर्मचारी अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे, जिससे कुछ देर के लिए मौके पर पूरी तरह अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्राथमिक जांच और शुरुआती भौतिक निरीक्षण के आधार पर यह बात सामने आई है कि निर्माण स्थल पर मिट्टी की मजबूती की सही तरीके से जांच नहीं की गई थी, जिसके कारण क्रेन के हाइड्रोलिक पैर जमीन में धंस गए। इसके साथ ही, क्रेन की भार वहन क्षमता (लोड कैपेसिटी) और उसके वास्तविक भार के बीच के अनुपात की तकनीकी अनदेखी भी इस बड़े हादसे का मुख्य कारण बनी। सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार, ऐसे भारी वजन को उठाते समय क्रेन के चारों ओर एक निश्चित बफर जोन बनाया जाना अनिवार्य होता है, लेकिन यहां क्रेन के बिल्कुल करीब ही मजदूर काम कर रहे थे।
हादसे की सूचना मिलते ही फरीदाबाद जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस बल और आपदा प्रबंधन की टीमें तुरंत एम्बुलेंस और गैस कटर के साथ घटना स्थल पर पहुंच गईं। स्थानीय पुलिस अधिकारियों और राहत कर्मियों ने मलबे और भारी क्रेन के नीचे दबे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए एक बड़ा बचाव अभियान शुरू किया। क्रेन का वजन कई टन होने के कारण साधारण मशीनों से उसे हटाना असंभव था, जिसके बाद दो अन्य बड़ी क्रेनों को मौके पर बुलाकर पलटी हुई क्रेन को धीरे-धीरे सीधा किया गया। क्रेन के नीचे दबे मजदूरों को निकालने के लिए गैस कटर की मदद से लोहे के ढांचों को काटना पड़ा, जिसमें राहत कर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए निर्माण कार्य को पूरी तरह से रोक दिया है और पूरे इलाके को चारों तरफ से सील कर दिया है।
मलबे से निकाले जाने के बाद सभी हताहतों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने तीन मजदूरों को मृत घोषित कर दिया क्योंकि उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर क्रेन का भारी वजन पड़ने से उन्हें गंभीर आंतरिक चोटें आई थीं और अत्यधिक रक्तस्राव हो चुका था। मृत श्रमिकों की पहचान सुनिश्चित करने और उनके परिजनों को इस दुखद घटना की सूचना देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिनमें से अधिकांश श्रमिक उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले बताए जा रहे हैं। वहीं, जो एक मजदूर इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हुआ है, उसके सिर और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आई हैं, जिसके कारण उसकी स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है और न्यूरोसर्जन व ट्रॉमा विशेषज्ञों की एक पूरी टीम उसकी निगरानी कर रही है।
इस भीषण हादसे के बाद स्थानीय निवासियों और श्रमिक यूनियनों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है, जिन्होंने निर्माण कंपनी पर लापरवाही और सुरक्षा मानकों के घोर उल्लंघन का आरोप लगाया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और जिला मजिस्ट्रेट ने मामले की न्यायिक और तकनीकी जांच के आदेश जारी कर दिए हैं, जिसके लिए लोक निर्माण विभाग और संरचनात्मक इंजीनियरों की एक संयुक्त समिति का गठन किया गया है। यह समिति इस बात की गहन जांच करेगी कि क्या क्रेन का फिटनेस सर्टिफिकेट वैध था, क्या क्रेन ऑपरेटर के पास इस तरह की भारी मशीनरी चलाने का उचित लाइसेंस और अनुभव था, और क्या निर्माण के समय साइट पर कोई सुरक्षा अधिकारी मौजूद था या नहीं। जांच दल को एक सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
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