कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में लियोनेल मेस्सी के इवेंट में भारी अराजकता, प्रशंसकों ने फेंकी बोतलें और की तोड़फोड़; बीजेपी ने ममता बनर्जी सरकार पर लगाए कुप्रबंधन के आरोप

घटना के बाद पुलिस ने मुख्य आयोजक सताद्रू दत्ता को हिरासत में लिया। पुलिस ने कहा कि प्रशंसकों को टिकटों की राशि वापस की जाएगी और कुप्रबंधन के लिए जिम्मेदारी तय की

Dec 14, 2025 - 11:04
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कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में लियोनेल मेस्सी के इवेंट में भारी अराजकता, प्रशंसकों ने फेंकी बोतलें और की तोड़फोड़; बीजेपी ने ममता बनर्जी सरकार पर लगाए कुप्रबंधन के आरोप
कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में लियोनेल मेस्सी के इवेंट में भारी अराजकता, प्रशंसकों ने फेंकी बोतलें और की तोड़फोड़; बीजेपी ने ममता बनर्जी सरकार पर लगाए कुप्रबंधन के आरोप

कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में 13 दिसंबर 2025 को लियोनेल मेस्सी के जीओएटी इंडिया टूर के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान भारी हंगामा हुआ। स्टेडियम में हजारों की संख्या में प्रशंसक जमा हुए थे, जो मेस्सी को देखने के लिए सुबह से इंतजार कर रहे थे। टिकटों की कीमत 3,500 रुपये से लेकर 25,000 रुपये तक थी। मेस्सी अपने साथी खिलाड़ियों लुइस सुआरेज और रोड्रिगो डी पॉल के साथ स्टेडियम पहुंचे और मैदान पर उतरे। हालांकि, उनकी उपस्थिति मात्र 15 से 30 मिनट की रही। इस दौरान वीआईपी, अधिकारी, नेता और आयोजक मेस्सी के चारों ओर घेरा बनाकर खड़े हो गए, जिससे स्टैंड में बैठे प्रशंसकों को उन्हें देखने में कठिनाई हुई। कई प्रशंसकों को मेस्सी की झलक तक नहीं मिली, क्योंकि वे दूर से ही बड़े स्क्रीन पर देख पाए।

जैसे ही यह स्पष्ट हुआ कि मेस्सी अब वापस नहीं आएंगे, स्टेडियम में अराजकता फैल गई। गुस्साए प्रशंसकों ने स्टैंड से बोतलें और कुर्सियां फेंकनी शुरू कर दीं। कई प्रशंसकों ने बैरिकेड तोड़कर मैदान पर घुसने की कोशिश की और स्टेडियम की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। गोल नेट उखाड़े गए, पोस्टर फाड़े गए और सीटें तोड़ी गईं। पुलिस को स्थिति संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन उन्होंने लाठीचार्ज से बचते हुए भीड़ को नियंत्रित किया। संकरे निकास द्वारों के कारण स्टाम्पेड की आशंका बनी रही, लेकिन पुलिस ने इसे रोका। स्टेडियम को 2017 अंडर-17 फीफा विश्व कप के लिए नवीनीकृत किया गया था, और इस घटना से उसकी संपत्ति को क्षति पहुंची। कार्यक्रम में बॉलीवुड स्टार शाहरुख खान और पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली को भी शामिल होना था। शाहरुख खान स्टेडियम के बाहर इंतजार करते रहे, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर वे चले गए। सौरव गांगुली स्टेडियम पहुंचे और एक अस्थायी तंबू में बैठे, लेकिन कार्यक्रम छोटा होने के कारण वे भी पूरी तरह भाग नहीं ले सके। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी स्टेडियम की ओर जा रही थीं, लेकिन उन्हें स्थिति की जानकारी मिलने पर वापस लौटना पड़ा। मेस्सी ने इससे पहले शहर में अपनी 70 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया था, जो 45 सदस्यीय टीम द्वारा चार सप्ताह में बनाई गई थी।

घटना के बाद पुलिस ने मुख्य आयोजक सताद्रू दत्ता को हिरासत में लिया। पुलिस ने कहा कि प्रशंसकों को टिकटों की राशि वापस की जाएगी और कुप्रबंधन के लिए जिम्मेदारी तय की जाएगी। पश्चिम बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार ने स्थिति संभालने के लिए खुद स्टेडियम पहुंचकर 90 मिनट तक प्रयास किया। उन्होंने इसे आयोजन समिति के कुप्रबंधन का परिणाम बताया। राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कहा कि उन्हें घटना की आशंका एक रात पहले ही हो गई थी और उन्होंने सरकार को भीड़ प्रबंधन के लिए सुझाव दिए थे, लेकिन वे लागू नहीं किए गए। उन्होंने आयोजक की गिरफ्तारी, टिकट रिफंड, बैंक खातों को फ्रीज करने और स्टेडियम क्षति की भरपाई की मांग की। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घटना पर खेद व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि वे साल्ट लेक स्टेडियम में देखे गए कुप्रबंधन से गहराई से व्यथित और स्तब्ध हैं। उन्होंने लियोनेल मेस्सी, खेल प्रेमियों और उनके प्रशंसकों से इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए माफी मांगी। उन्होंने एक जांच समिति गठित करने की घोषणा की, जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अशीम कुमार राय करेंगे और इसमें मुख्य सचिव तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह एवं पहाड़ी मामलों का विभाग) सदस्य होंगे। समिति विस्तृत जांच करेगी, जिम्मेदारी तय करेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाएगी।

भाजपा ने इस घटना को लेकर ममता बनर्जी सरकार को घेरा। भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के इस्तीफे की मांग की और खेल मंत्री अरूप विश्वास, अग्निशमन मंत्री सुजीत बोस तथा आयोजक सताद्रू दत्ता के इस्तीफे की भी मांग की। उन्होंने इसे पश्चिम बंगाल की प्रतिष्ठा पर आपराधिक हमला और उत्साही फुटबॉल प्रेमियों के साथ विश्वासघात बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसे टीएमसी लूट-पर्व और दयनीय तमाशा कहा, जहां प्रशंसकों को द्वितीय श्रेणी के नागरिकों की तरह व्यवहार किया गया। उन्होंने राज्यपाल को पत्र लिखकर कलकत्ता हाई कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश के नेतृत्व में स्वतंत्र जांच की मांग की। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजुमदार ने भी ममता बनर्जी के इस्तीफे की मांग की और टिकटों की कालाबाजारी तथा टीएमसी कार्यकर्ताओं के व्यवहार को भ्रष्टाचार बताया। भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने खेल मंत्री अरूप विश्वास के इस्तीफे की मांग की और कहा कि उन्होंने लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ किया।

ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन ने घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की, लेकिन स्पष्ट किया कि वे इस निजी कार्यक्रम में शामिल नहीं थे। यह कार्यक्रम एक पीआर एजेंसी द्वारा आयोजित था और कोई विवरण साझा नहीं किया गया था या अनुमति नहीं ली गई थी। घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी पैदा की, क्योंकि मेस्सी वैश्विक स्तर पर लाखों फुटबॉल प्रशंसकों के आइकन हैं। मेस्सी की यह भारत यात्रा 2011 के बाद दूसरी थी, जब उन्होंने इसी स्टेडियम में अर्जेंटीना की ओर से वेनेजुएला के खिलाफ मैच खेला था। घटना के बाद मेस्सी हैदराबाद पहुंचे, जहां टूर का अगला पड़ाव था। हैदराबाद पुलिस आयुक्त सुधीर बाबू ने कहा कि उनकी तैयारी कोलकाता से काफी आगे है और 4,000 अधिकारी तैनात हैं। टूर में मुंबई और नई दिल्ली भी शामिल हैं, जहां मेस्सी सात-ए-साइड मैच में भाग लेंगे। कोलकाता की घटना ने राज्य में चुनाव से पहले सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनौती पैदा की है। पुलिस ने कहा कि प्रशंसकों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाएगा और कुप्रबंधन की सजा दी जाएगी। स्टेडियम में अराजकता की शुरुआत तब हुई जब प्रशंसकों ने महसूस किया कि वे उच्च कीमत चुकाकर भी मेस्सी को ठीक से नहीं देख पाए। वीआईपी की भीड़ ने दृश्य बाधित कर दिया और कार्यक्रम को छोटा कर दिया गया। सुरक्षा कारणों से मेस्सी को जल्दी बाहर निकाला गया। प्रशंसकों ने स्टैंड से वस्तुएं फेंकी और मैदान पर घुसने की कोशिश की। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और स्टाम्पेड को रोका। आयोजक की हिरासत के बाद जांच चल रही है।

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